businesscareerchhattisgarhknowledgelifestyleकैरियरछत्तीसगढ़यूटिलिटी न्यूजरायपुररोजगारविविध विषयव्यापार

सिर्फ 100 रुपये की बचत से बदली जिंदगी, छत्तीसगढ़ की अहिल्या निषाद बनीं ‘लखपति दीदी’…

स्वयं सहायता समूह से मिला हौसला, बैंक से लिया एक लाख का ऋण और गांव में शुरू किया होटल; आज हर महीने 15 से 24 हजार रुपये तक की कमाई

रायपुर । कहते हैं कि सफलता की शुरुआत हमेशा बड़े कदमों से नहीं होती, कई बार छोटी-सी बचत भी जिंदगी में बड़ा बदलाव लाने का रास्ता खोल देती है। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ (अ) की रहने वाली अहिल्या निषाद की कहानी इसी बात को साबित करती है। कभी परिवार का खर्च चलाने और बच्चों की पढ़ाई की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करने वाली अहिल्या आज अपने पैरों पर खड़ी हैं। उन्होंने मेहनत, बचत और स्वरोजगार के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बिहान योजना से जुड़कर अहिल्या ने आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया। आज वे गांव में ‘निषाद होटल’ का संचालन कर रही हैं और अपनी मेहनत से हर महीने 15 हजार से 24 हजार रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता ने उन्हें ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान दिलाई है।

आर्थिक तंगी के बीच परिवार चलाना था बड़ी चुनौती

अहिल्या निषाद का जीवन भी ग्रामीण परिवारों में महिलाओं के सामने आने वाली आर्थिक चुनौतियों से अछूता नहीं था। सीमित पारिवारिक आमदनी के बीच घर का खर्च संभालना और बच्चों की पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन जुटाना उनके लिए मुश्किल था।

परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आमदनी का साधन तलाशना जरूरी था। ऐसे में उन्हें एक ऐसे अवसर की आवश्यकता थी, जिसके माध्यम से वे अपनी मेहनत के बल पर आमदनी बढ़ा सकें और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकें।

15 मार्च 2018 को बिहान योजना से जुड़कर शुरू की बचत

अहिल्या के जीवन में बदलाव की शुरुआत 15 मार्च 2018 को हुई, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के अंतर्गत लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत करने की आदत विकसित की।

उन्होंने हर महीने केवल 100 रुपये बचाने से शुरुआत की। यह राशि भले ही छोटी थी, लेकिन नियमित बचत ने उनके भीतर आर्थिक अनुशासन और भविष्य के लिए कुछ करने का विश्वास पैदा किया।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का लाभ केवल बचत तक सीमित नहीं रहा। समूह ने उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर दिया और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाया।

स्वयं सहायता समूह की मदद से मिला एक लाख रुपये का ऋण

बचत और समूह से मिली प्रेरणा के बाद अहिल्या ने अपने लिए रोजगार का साधन तैयार करने का निर्णय लिया। इस दिशा में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की मदद से उन्होंने बैंक से एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया।

इस आर्थिक सहायता का उपयोग उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हिम्मत दिखाई और गांव की मुख्य सड़क पर ‘निषाद होटल’ के नाम से नाश्ते की दुकान शुरू की।

यह कदम उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ उन्होंने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत शुरू की।

गांव की मुख्य सड़क पर शुरू किया ‘निषाद होटल’

अहिल्या ने अपने गांव की मुख्य सड़क पर होटल शुरू कर स्थानीय लोगों के लिए नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई। व्यवसाय को आगे बढ़ाने में उनकी मेहनत और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।

उनके पति कीर्तीलाल निषाद ने भी इस काम में उनका साथ दिया। पति के सहयोग और अपनी लगन के बल पर अहिल्या ने धीरे-धीरे व्यवसाय को आगे बढ़ाया।

स्वरोजगार की इस पहल ने उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर दिया। नियमित मेहनत से होटल का संचालन उनके परिवार के लिए आर्थिक सहारा बनने लगा।

प्रतिदिन 500 से 800 रुपये तक की आमदनी

आज अहिल्या निषाद के होटल से प्रतिदिन लगभग 500 से 800 रुपये की आमदनी हो रही है। इसी के आधार पर उनकी मासिक आय करीब 15 हजार से 24 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

यह उपलब्धि उनके लिए केवल कमाई बढ़ने तक सीमित नहीं है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है और बच्चों की शिक्षा तथा भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है।

अहिल्या की कहानी बताती है कि उचित अवसर, नियमित बचत और मेहनत के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के जरिए आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।

परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत, बच्चों के भविष्य को मिला सहारा

होटल से होने वाली नियमित आमदनी ने अहिल्या के परिवार को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाया है। पहले जिन जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था, अब उन्हें पूरा करने में पहले की तुलना में आसानी हुई है।

बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए संसाधन जुटाने की दिशा में भी यह आय महत्वपूर्ण साबित हो रही है। अपनी मेहनत से आय अर्जित करने के कारण अहिल्या के आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है।

उनकी सफलता यह दर्शाती है कि महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए उचित सहयोग मिले, तो वे अपने परिवार की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा

अहिल्या निषाद आज अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन चुकी हैं। उनकी यात्रा में नियमित बचत, स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव, बैंक ऋण और स्वरोजगार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने छोटी बचत से शुरुआत की, उपलब्ध सहायता का उपयोग किया और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर मेहनत की। उनकी उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।

स्वयं सहायता समूह महिलाओं को एक मंच प्रदान करते हैं, जहां वे बचत, आपसी सहयोग और आजीविका से जुड़े अवसरों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

बिहान योजना से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा आजीविका का अवसर

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाने और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों को बढ़ावा देना है। अहिल्या निषाद की सफलता इस दिशा में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आई है।

लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत की शुरुआत की, ऋण लेकर व्यवसाय खड़ा किया और अपनी मेहनत से नियमित आमदनी का साधन विकसित किया। उनकी यात्रा बताती है कि वित्तीय सहयोग के साथ व्यक्तिगत प्रयास भी स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

अहिल्या का संदेश: आत्मनिर्भरता से बेहतर हुआ परिवार का जीवन

अपनी सफलता के लिए अहिल्या निषाद बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि इस योजना की मदद से वे आत्मनिर्भर बन सकीं और अपने परिवार को बेहतर जीवन देने की दिशा में आगे बढ़ पाईं।

उनकी कहानी संघर्ष से स्वावलंबन तक के सफर को सामने लाती है। 100 रुपये की मासिक बचत से शुरू हुआ प्रयास आज एक ऐसे व्यवसाय में बदल गया है, जो उनके परिवार की आमदनी का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।

अहिल्या निषाद की यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों की उपयोगिता को रेखांकित करती है। उनकी कहानी का सार यही है कि छोटी शुरुआत, सही अवसर और निरंतर मेहनत मिलकर जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

Source Link : https://balod.gov.in/en/notice_category/recruitment/

संपूर्ण खबरों के लिए क्लिक करे      https://jantakikalam.com/

इन खबरों का लाभ लेने के लिए अपने परिचितों को फॉरवर्ड करना ना भूलें।

खबरों और विज्ञापन के लिये सम्पर्क करे
[email protected]
मो. – 9827156570

 

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button