भिलाई

विश्व जनसंपर्क दिवस के उपलक्ष्य में भिलाई इस्पात संयंत्र में ‘कनेक्टकॉन–2026’ पीआर कॉन्क्लेव का आयोजन…

सेल-भिलाई विश्व जनसंपर्क दिवस के उपलक्ष्य में सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के जनसंपर्क विभाग द्वारा 18 जुलाई 2026 को भिलाई निवास के बहुउद्देशीय सभागार में राष्ट्रीय स्तर के पीआर कॉन्क्लेव ‘कनेक्टकॉन–2026’ का आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय कॉन्क्लेव का उद्देश्य जनसंपर्क के क्षेत्र में उभरती तकनीकों, नवीन प्रवृत्तियों, चुनौतियों, अवसरों तथा बदलते संचार परिदृश्य पर सार्थक विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी चित्तरंजन महापात्र रहे। उन्होंने संयंत्र के कार्यपालक निदेशकों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित भिलाई इस्पात संयंत्र की कॉफी टेबल बुक “आई एम भिलाई” का भी विमोचन किया गया।

कॉन्क्लेव में सेल की विभिन्न इकाइयों जैसे राउरकेला इस्पात संयंत्र, सेल कॉर्पोरेट कार्यालय (नई दिल्ली), वीआईएसएल, सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट तथा चंद्रपुर फेरो अलॉय प्लांट के जनसंपर्क प्रतिनिधियों के साथ-साथ आकाशवाणी, प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), दूरदर्शन, एनएसपीसीएल, भारतीय स्टेट बैंक, माई भारत सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। भिलाई इस्पात संयंत्र के विभिन्न विभागों के अनेक आंतरिक संसाधन व्यक्तियों ने भी प्रतिनिधि के रूप में सहभागिता की।

इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) ए. के. चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) पी. के. सरकार, कार्यपालक निदेशक (खदान) कमल भास्कर, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) अरुण कुमार तथा मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सेवाएं) तुषार कांत सहित मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, अधिकारी संघ के पदाधिकारी एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व अधिकारी उपस्थित रहे।

निदेशक प्रभारी चित्तरंजन महापात्र ने अपने संबोधन में ‘कनेक्टकॉन–2026’ के आयोजन के लिए जनसंपर्क विभाग को बधाई देते हुए कहा कि जनसंपर्क आज केवल सूचना प्रसारित करने का माध्यम नहीं, बल्कि विश्वास निर्माण, हितधारकों के साथ सशक्त संवाद स्थापित करने तथा किसी भी संगठन की उपलब्धियों को पारदर्शिता एवं उद्देश्यपूर्ण ढंग से समाज तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपकरण बन चुका है।

उन्होंने कहा कि सेल की उत्पादन क्षमता को 20 मिलियन टन से बढ़ाकर 30 मिलियन टन तथा भिलाई इस्पात संयंत्र की क्षमता को 6.8 मिलियन टन से बढ़ाकर 10.2 मिलियन टन करने की महत्वाकांक्षी योजना केवल औद्योगिक विस्तार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ऐसे विकास कार्यों से रोजगार सृजन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन, आधारभूत संरचना के विकास तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों एवं उनके व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुँचाने में जनसंपर्क पेशेवरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में महाप्रबंधक प्रभारी (संपर्क प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कॉन्क्लेव की विषयवस्तु, उद्देश्य एवं विभिन्न तकनीकी सत्रों की रूपरेखा से प्रतिभागियों को अवगत कराया। कॉन्क्लेव का प्रथम तकनीकी सत्र ‘पेचा-कुचा ’ प्रारूप पर आधारित था, जिसमें प्रत्येक वक्ता ने 20 स्लाइडों के माध्यम से 20-20 सेकंड की संक्षिप्त एवं प्रभावी प्रस्तुति दी। इस सत्र में सेल एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने जनसंपर्क की आधुनिक कार्यप्रणालियों, नवाचारों तथा प्रभावी संचार रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए।

वक्ताओं में निशांत वर्मा (सीएडी), जॉयदेव मजूमदार (आरएसपी), शकील अहमद खान (सीएफपी),  परिमल सिन्हा एवं सुश्री भावना नायक (एनएसपीसीएल), रमेश जयभाये, कुणाल व्यास(पीआईबी, रायपुर), शौकत इमाम खान एवं एम. श्रीनिवास राव (आकाशवाणी, रायपुर), अर्पित तिवारी (माई भारत), अनिल कुमार यादव ( एसबीआई) सहित एसबीआई के अधिकारीगण शरद बैस, लुकेश रामटेके, सुशील अग्रवाल तथा भिलाई इस्पात संयंत्र की उप प्रबंधक (जनसंपर्क) सुश्री शालिनी चौरसिया शामिल थीं।

सुश्री शालिनी चौरसिया ने इस अवसर पर भिलाई इस्पात संयंत्र की उपलब्धियों, विकास यात्रा एवं जनसंपर्क की रणनीतिक पहलों पर आधारित प्लांट ओवरव्यू प्रस्तुति भी दी। इस अवसर पर एचआरसी, रायपुर की तरफ से मनीष मिश्रा, वीआईएसएल से नवीन राहुल, सेल रेफ्रेक्टरी यूनिट से डॉ. प्रियंका दास एवं मधुसूदन राव तथा सीएसपीडीसीएल से विकास शर्मा ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

इसके उपरांत “ट्रुथ, ट्रस्ट एंड टेक्नोलॉजी: टेकिंग पीआर टू द नेक्सट लेवल” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस सत्र का नेतृत्व शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व विभागाध्यक्ष (जनसंपर्क) एस. पी. एस. जग्गी तथा भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), रायपुर के प्रोफेसर डॉ. मृणाल चावड़ा ने किया। सत्र का संचालन महाप्रबंधक प्रभारी (सम्पर्क प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के दौरान भिलाई इस्पात संयंत्र के जनसंपर्क विभाग द्वारा निर्मित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया। प्रतिभागियों के लिए ‘माइंड मेज़’ नामक विशेष गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसमें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी निर्णय एवं संचार कौशल का अभ्यास कराया गया। इसके अतिरिक्त मीडिया, ब्रांड एवं जनसंपर्क विषयों पर आधारित प्रश्नोत्तरी एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने विजेताओं, प्रतिभागियों, निर्णायकों एवं पैनल सदस्यों को सम्मानित किया। अपने समापन संबोधन में कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार ने कहा कि जनसंपर्क एक गतिशील एवं निरंतर विकसित होने वाला क्षेत्र है, जहाँ बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि तकनीक के सकारात्मक और चुनौतीपूर्ण दोनों पक्ष हैं तथा संचार के क्षेत्र में उसका जिम्मेदारीपूर्ण एवं विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना जनसंपर्क पेशेवरों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सूचनाओं का प्रवाह अत्यंत तीव्र गति से होता है ।

और किसी भी सूचना को लंबे समय तक सीमित नहीं रखा जा सकता। ऐसे में संगठनों के लिए यह आवश्यक है कि वे विश्वसनीय माध्यमों के जरिए समय पर, सटीक एवं प्रामाणिक जानकारी साझा करें, जिससे सूचना के अभाव की स्थिति उत्पन्न न हो तथा हितधारकों के साथ पारदर्शी एवं विश्वासपूर्ण संवाद स्थापित किया जा सके।

कार्यक्रम का संचालन उप महाप्रबंधक (सम्पर्क प्रशासन एवं जनसंपर्क) श्रीमती अपर्णा चंद्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन उप प्रबंधक (जनसंपर्क) सुश्री शालिनी चौरसिया द्वारा प्रस्तुत किया गया। आयोजन को सफल बनाने में सहायक महाप्रबंधक (जनसंपर्क) जवाहर बाजपेयी सहित भिलाई इस्पात संयंत्र के जनसंपर्क विभाग की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।

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