मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था को “खेत से कारखाने तक और कारखाने से बाजार तक” विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर से राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का उद्घाटन किया। राज्य के सभी 55 जिलों में 13 नवंबर तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और कृषि आधारित गतिविधियां होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि हित और किसानों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष ओम जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक मधु वर्मा, श्रीमती मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, श्रवण चावड़ा, कपिल यार्डेन एवं अन्य जन-प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। इस क्षेत्र की 250 से अधिक नदियाँ लाखों लोगों के जीवन को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों ने नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदी के जल का उचित उपयोग नहीं किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा घाटी परियोजनाओं को नई गति मिली।
कई योजनाओं ने मालवा क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराया और इस क्षेत्र की विद्युत उत्पादन क्षमता को भी मजबूत किया। उन्होंने कहा कि 1956 से 2003 तक इस क्षेत्र में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध थीं, जबकि हमारी सरकारों ने इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर कर दिया है। आने वाले वर्षों में सिंचित क्षेत्र को और बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि का आधार जल, बिजली और सड़कें हैं। सरकार ने इन तीनों क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को रात के बजाय दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम कर रही है, जिससे दुर्घटनाएं कम होंगी और खेती अधिक सुविधाजनक होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस वर्ष गेहूं 2625 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा गया। इसी प्रकार भावांतर योजना के माध्यम से सोयाबीन उत्पादकों को सहायता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को छोड़कर पिछली सरकारों के कार्यकाल में किसानों को न तो उचित मूल्य मिला और न ही उन्हें समर्थन मूल्य पर उचित खरीद मिली।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने की योजना का उल्लेख किया और कहा कि अब किसानों को हर छह महीने में अपने ऋण का नवीनीकरण नहीं कराना होगा। यदि किसान जून में ऋण लेते हैं, तो वे अगले वर्ष जून में यह राशि जमा कर सकेंगे। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। नदी जोड़ने की परियोजनाओं से 13 जिलों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में परिकल्पित केन-बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना मध्य प्रदेश के जल इतिहास को बदल देगी। लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली ये परियोजनाएं श्योपुर, मोरेना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच और मंदसौर सहित 13 जिलों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराएंगी। इससे पश्चिमी मध्य प्रदेश और मालवा क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि पूरी कृषि अर्थव्यवस्था को “खेत से कारखाने तक और कारखाने से बाजार तक” विकसित कर रही है। क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां तेजी से स्थापित की जा रही हैं। उज्जैन में हाल ही में 1250 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आलू प्रसंस्करण इकाई क्षेत्र के 32 जिलों से आलू खरीदेगी, जिससे किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा। इसी प्रकार, इंदौर, अगर और उज्जैन सहित कई जिलों में कृषि आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना शुरू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस योजना शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को किसानों की आय बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान में मध्य प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन में लगभग 12 प्रतिशत का योगदान देता है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है।
उन्होंने घोषणा की कि सरकार 40 लाख रुपये तक की डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी, जिससे युवाओं और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार कमजोर गायों की नस्लों के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर गौशालाएं चला रही है। गौशाला निदेशकों को प्रति गाय प्रति दिन 40 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इसके साथ ही, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय और अन्य जंगली जानवरों के प्रबंधन के लिए एक विशेष योजना लागू की जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड के साथ हुए समझौते के बाद किसानों को दूध की कीमत में प्रति लीटर 8 से 10 रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। उन्होंने एक किसान का उदाहरण देते हुए कहा कि बेहतर कीमत मिलने से किसानों की आमदनी प्रतिदिन हजारों रुपये बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 43 प्रतिशत है। खाद्यान्न उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। यह क्षेत्र मोटे अनाज, बाजरा, धनिया, लहसुन, संतरा, सोयाबीन, गेहूं, दालें और तिलहन के उत्पादन में अग्रणी राज्यों में से एक है। पुष्प उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है।
उन्होंने कहा कि धार जिले में प्रधानमंत्री मित्र वस्त्र पार्क की स्थापना की जा रही है, जिससे क्षेत्र के लगभग 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को लाभ होगा। इससे कपास से लेकर धागे, कपड़े और तैयार वस्त्रों तक की पूरी औद्योगिक तकनीक विकसित होगी और किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा।
बलराम कृषि महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान बलराम की पूजा करते हुए कहा कि हल भारतीय कृषि संस्कृति, श्रम और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने किसानों से किसान कल्याण वर्ष के लिए जन आंदोलन संगठित करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रमुख घोषणाएँ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।
• इंदौर में स्थित वर्तमान कृषि उपज मंडी को स्थानांतरित किया जाएगा और इसे एक आधुनिक और विशाल कृषि उपज मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा।
• संबंधित क्षेत्र में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
• मंडी क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की घोषणा।
• किसानों को प्रतिदिन कृषि बिजली उपलब्ध कराने की एक प्रणाली लागू की जाएगी।
• 40 लाख रुपये तक के डेयरी प्रतिष्ठानों पर 10 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।
• गौशाला के संचालन के लिए प्रति गाय प्रति दिन 40 रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी।
• किसानों की आय बढ़ाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मछली पालन और कृषि आधारित उद्योगों का व्यापक विस्तार किया जाएगा।
• फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय और अन्य जंगली जानवरों के प्रबंधन के लिए एक विशेष योजना लागू की जाएगी। हेलीकॉप्टरों की सहायता से नीलगाय और अन्य जंगली जानवरों को नियंत्रित करने की योजना बनाई जाएगी।
इस महोत्सव में किसानों को इस मंच पर सभी विभागों के बारे में जानकारी मिली।
बलराम कृषि महोत्सव में कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लघु एवं मध्यम उद्यम, ऊर्जा और राजस्व सहित विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया।
किसानों को आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक और जैविक खेती, ड्रोन प्रौद्योगिकी, कृषि मशीनीकरण, बागवानी, दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि ऋण, बीमा, विपणन, मूल्य संवर्धन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। किसानों को विभागीय विशेषज्ञों से सीधे बातचीत करने और विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने का अवसर भी प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले किसानों, किसान परिवारों के छात्रों और कृषि की बेहतरी के लिए काम करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी सम्मानित किया।
शहरी विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती, आधुनिक खेती और जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि खेती में नई तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से किसानों की आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
मंत्री विजयवर्गीय ने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले किसानों को कृषि ऋण पर 18 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ता था, जबकि राज्य सरकार ने किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा प्रदान की है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज केंद्र सरकार से 6 हजार रुपये और राज्य सरकार से 6 हजार रुपये, कुल मिलाकर 12 हजार रुपये प्रति वर्ष सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं और किसानों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावत ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और हमारी सरकार गांवों, मातृशक्ति, युवाशक्ति और समाज के अंतिम व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार वर्ष के 365 दिन किसानों के विकास, प्रगति और समृद्धि के लिए समर्पित भाव से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी सोच और निर्णयों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में किसानों के हित में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों के विकास, प्रगति और समृद्धि के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार किसानों को आधुनिक और उन्नत कृषि से जोड़ रही है। आदर्श खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें शिक्षित और प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।
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