सुरक्षित बचपन अभियान : नुक्कड़ नाटक और ड्राइंग प्रतियोगिता से बच्चों को बताया अधिकारों का महत्व…
दुर्ग, पाटन, भिलाई-3 और धमधा के स्कूलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, बाल शोषण, बाल विवाह और साइबर अपराधों से बचाव की दी जा रही जानकारी

दुर्ग। बच्चों को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सुरक्षित बचपन अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार जिले के दुर्ग, पाटन, भिलाई-3 एवं धमधा क्षेत्रों के अधिकाधिक विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल शोषण, बाल विवाह, अच्छे-बुरे स्पर्श की पहचान, साइबर अपराध और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है।
न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और विधि विद्यार्थियों की सहभागिता
अभियान का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन तथा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के समन्वय से किया जा रहा है।
जागरूकता कार्यक्रमों में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीशों, पैनल अधिवक्ताओं, साइबर सेल के अधिकारियों, लॉ यूनिवर्सिटी के प्राध्यापकों, विधि विद्यार्थियों तथा पैरा लीगल वॉलंटियर्स की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।
छह प्रमुख विषयों पर केंद्रित है अभियान
सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत प्रत्येक चयनित विद्यालय में छह निर्धारित विषयों में से एक विषय पर विस्तारपूर्वक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- मेरा बचपन, मेरा अधिकार
- कानून जानो, बचपन बचाओ
- सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन
- बोलो, बताओ, बचाओ
- ना बाल विवाह, ना बाल शोषण
- जागरूक बचपन, सशक्त भारत
इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, अच्छे एवं बुरे स्पर्श की पहचान, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर अपराधों से बचाव तथा बाल विवाह और बाल शोषण से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है।
बच्चों को यह भी समझाया जा रहा है कि किसी भी असुरक्षित परिस्थिति या अनुचित व्यवहार का सामना करने पर चुप रहने के बजाय माता-पिता, शिक्षक अथवा संबंधित सक्षम अधिकारी से सहायता मांगना उनका अधिकार है।
मर्रा स्कूल में नुक्कड़ नाटक से दिया सुरक्षा का संदेश
अभियान के अंतर्गत स्वामी आत्मानंद हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, मर्रा में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मैट्स यूनिवर्सिटी के सहायक प्राध्यापक एवं मैट्स लॉ स्कूल, रायपुर के विधि विभाग से जुड़े डॉ. आई. नागमणी देशलहरे, विधि विद्यार्थियों, विद्यालय के अध्यापकों, विद्यार्थियों और स्टाफ ने सहभागिता की।
इस अवसर पर मैट्स यूनिवर्सिटी, रायपुर के विधि विद्यार्थियों ने बच्चों के लिए नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने नाटक को बड़े ध्यानपूर्वक देखा। इसके माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और असुरक्षित परिस्थितियों की पहचान के बारे में रोचक एवं सरल तरीके से समझाया गया।
वहीं, कुछ विद्यालयों में ड्राइंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने सुरक्षित बचपन, बाल अधिकार और बाल संरक्षण जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की।
बच्चों में विश्वास पैदा करना भी अभियान का उद्देश्य
सुरक्षित बचपन अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों को कानूनी जानकारी देना नहीं है, बल्कि उनसे सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझना और जरूरत पड़ने पर उनकी बात संबंधित सक्षम व्यक्ति एवं संस्था तक पहुंचाना भी है।
इसके माध्यम से बच्चों में ऐसा विश्वास विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे बिना किसी भय या संकोच के अपनी समस्याएं साझा कर सकें और समय पर उचित सहायता प्राप्त कर सकें।
बच्चों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी
अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण में रहने का अधिकार है। बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सामूहिक दायित्व है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के अधिकाधिक विद्यालयों तक पहुंचकर बच्चों को उनके अधिकारों, कानूनी संरक्षण और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास लगातार जारी है।
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