उत्तराखंड अध्ययन दौरे पर पहुंचे बृजमोहन अग्रवाल, केदारनाथ-बद्रीनाथ में की पूजा-अर्चना…
प्राक्कलन समिति की बैठकों में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सुविधाओं पर चर्चा, माना गांव में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की समीक्षा

देहरादून/रायपुर । रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल संसद की प्राक्कलन समिति (एस्टिमेट्स कमेटी) के आधिकारिक अध्ययन प्रवास के तहत उत्तराखंड पहुंचे। समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल तथा अन्य साथी सांसदों के साथ उन्होंने उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया।
अध्ययन दौरे के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भगवान केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर देश की खुशहाली, छत्तीसगढ़ की समृद्धि और जनता के सुख-शांति एवं कल्याण की कामना की।
इस दौरे में धार्मिक आस्था के साथ-साथ तीर्थस्थलों के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास से जुड़े विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
धार्मिक स्थलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक
अध्ययन प्रवास के दौरान केदारनाथ में संसद की प्राक्कलन समिति की ओर से “देश में धार्मिक स्थलों पर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा संबंधी मुद्दों का आकलन” विषय पर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय तथा उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और उसके अनुरूप उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
चर्चा में तीर्थस्थलों तक सुगम आवागमन, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसे विषय प्रमुख रहे।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप सुविधाएं जरूरी
बैठक में अपने विचार रखते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि देश के प्रमुख आस्था केंद्रों पर हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। धार्मिक स्थलों की बढ़ती लोकप्रियता के साथ वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना भी आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए उन्हें सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी, प्रभावी भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था और कड़े सुरक्षा इंतजाम समय की आवश्यकता हैं।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और सुविधाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राक्कलन समिति की यह समीक्षा देश के तीर्थस्थलों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थस्थलों के विकास पर भी जोर
उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के विकास और व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के विकास का मुद्दा भी बैठक में रखा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चारधाम और हिमालयी तीर्थ क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जा रहा है, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थस्थलों में भी सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि माता बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़, मां दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा, बाबा भोरमदेव, राजीव लोचन मंदिर राजिम और सिरपुर जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
सांसद ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा को सुविधाजनक बनाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
“अध्ययन के अनुभवों से छत्तीसगढ़ को भी मिलेगा लाभ”
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्राक्कलन समिति के इस अध्ययन दौरे के दौरान देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के विकास मॉडल, सुरक्षा व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अनुभवों का अध्ययन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के अनुभवों से छत्तीसगढ़ के तीर्थ पर्यटन को भी नई दिशा मिल सकती है। राज्य के प्रमुख धार्मिक केंद्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि “केदारनाथ-बद्रीनाथ की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थस्थलों के समग्र विकास को भी नई गति मिलनी चाहिए।” इसके लिए केंद्र और राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय के साथ विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।
भारत के प्रथम गांव माना पहुंचे सांसद
धार्मिक स्थलों के अध्ययन और बैठक के बाद सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्राक्कलन समिति के साथ भारत-चीन सीमा क्षेत्र में स्थित देश के प्रथम गांव ‘माना’ का भी दौरा किया।
माना में गृह मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार और स्थानीय हितधारकों के साथ “जीवंत ग्राम कार्यक्रम (वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) की समीक्षा” विषय पर बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सीमावर्ती गांवों के विकास और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर चर्चा हुई।
सांसद ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, संचार, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्थानीय स्तर पर आजीविका से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों और संबंधित प्रतिनिधियों से योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
सीमांत गांवों को मजबूत बनाना राष्ट्रीय प्राथमिकता
बैठक के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सीमावर्ती गांव केवल सामान्य ग्रामीण क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि वे देश की सुरक्षा और संप्रभुता के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन बेहतर बनाना और उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में सड़क, बिजली, संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा। साथ ही, इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की निरंतर मौजूदगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों के साथ आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की और योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
आस्था, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा का मिला संदेश
उत्तराखंड का यह अध्ययन दौरा धार्मिक आस्था के साथ विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के अध्ययन का अवसर भी बना। एक ओर जहां सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में देश और छत्तीसगढ़ की खुशहाली के लिए पूजा-अर्चना की, वहीं दूसरी ओर समिति की बैठकों में तीर्थस्थलों की सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विचार-विमर्श किया।
वहीं भारत के प्रथम गांव माना के दौरे में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की प्रगति की समीक्षा की गई। इस प्रकार अध्ययन प्रवास के दौरान धार्मिक पर्यटन, बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास जैसे विषयों को प्रमुखता से देखा गया।
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