जशपुर में ‘गजरथ’ ने जगाई जागरूकता की अलख, हाथियों से सुरक्षित सह-अस्तित्व का दिया संदेश…
साजापानी में ग्रामीणों और बच्चों को समझाया वन्यजीवों के व्यवहार, विचरण मार्ग और सुरक्षा का महत्व

रायपुर । वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से जशपुर जिले में वन विभाग द्वारा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वन्यप्राणी सुरक्षा सप्ताह के तहत हाथी प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को हाथियों के व्यवहार, उनके विचरण क्षेत्रों और सुरक्षित रहने के उपायों की जानकारी दी जा रही है।

इसी अभियान के तहत वन परिक्षेत्र कांसाबेल के ग्राम साजापानी स्थित प्राथमिक शाला चट्टानपारा में गजरथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से मानव और हाथियों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व तथा वन्यजीव संरक्षण का संदेश ग्रामीणों तक पहुंचाया गया।
ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ ग्रामीण, पंच-सरपंच और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हाथियों के प्राकृतिक आवास, उनके व्यवहार तथा विचरण मार्गों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि हाथी वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय समुदाय की जागरूकता और सक्रिय सहभागिता बेहद जरूरी है।
हाथी दिखे तो दूरी बनाएं, सूचना तुरंत दें
जनजागरूकता कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई। हाथी दिखाई देने पर उसके करीब जाने, पीछा करने, फोटो या वीडियो बनाने अथवा उसे किसी भी तरह उकसाने से बचने की अपील की गई।
ग्रामीणों को समझाया गया कि हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उनकी मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।
रात में जंगल जाने से बचने की अपील
वन विभाग ने रात्रि के समय अकेले जंगल की ओर नहीं जाने और हाथियों के संभावित विचरण मार्गों से दूर रहने की सलाह दी। हाथी दिखाई देने पर भीड़ जुटाने से भी बचने को कहा गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पटाखे, आग या तेज आवाज के जरिए हाथियों को भगाने या उत्तेजित करने का प्रयास स्थिति को जोखिमपूर्ण बना सकता है।
सूचना तंत्र को मजबूत करने पर जोर
जशपुर के हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मैदानी अमला हाथियों के विचरण से जुड़ी जानकारी जुटाकर प्रभावित गांवों तक समय पर चेतावनी पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम में ग्रामीणों ने भी हाथियों की गतिविधियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वन विभाग ने उनसे अपील की कि हाथियों की मौजूदगी या गतिविधि की जानकारी तत्काल विभाग के साथ साझा करें और जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
बच्चों को भी अभियान से जोड़ा
गजरथ कार्यक्रम के जरिए वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने पर भी जोर दिया गया। स्कूली बच्चों को अभियान से जोड़कर उन्हें जंगल, पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी समझाई गई।
वन विभाग का संदेश है कि हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार को समझने, उनके विचरण मार्गों का सम्मान करने और आवश्यक सावधानी बरतने से मानव-हाथी द्वंद्व को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
‘हाथी बचाएं, जंगल बचाएं’ का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर ग्रामीणों और विद्यार्थियों को “हाथी बचाएं, जंगल बचाएं और मानव जीवन सुरक्षित रखें” का संदेश दिया गया।
वन विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की कि हाथी दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखें, भीड़ न लगाएं और तत्काल संबंधित वन अमले को इसकी जानकारी दें। जनभागीदारी के माध्यम से ही वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
इन खबरों का लाभ लेने के लिए अपने परिचितों को फॉरवर्ड करना ना भूलें।
सोशल मीडिया लिंक
https://www.facebook.com/
https://twitter.com/
https://instagram.com/
https://whatsapp.com/channel/
खबरों की अपडेट पाने के लिये subscribe करे
www.jantakikalam.com.




