ग्राम पंचायतों में QR कोड से पारदर्शिता को नई ताकत, श्रमिकों को एक स्कैन में मिली 375 कार्यों की जानकारी…
रोजगार सह आवास दिवस पर पंजीकृत श्रमिकों ने जानी वीबीजीरामजी योजना की नई अनुमेय गतिविधियां, आवास संबंधी समस्याओं का भी हुआ समाधान

रायपुर। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की पारदर्शिता और ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। विकसित भारत जीरामजी योजना के तहत कोरिया जिले की ग्राम पंचायतों में लगाए गए स्वप्रकटीकरण QR कोड अब ग्रामीणों और पंजीकृत श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी का सहज माध्यम बन गए हैं। एक स्कैन करते ही ग्रामीणों को योजना के लाभ, अनुमेय कार्यों और ग्राम पंचायत स्तर पर किए जा सकने वाले विकास कार्यों की जानकारी मिल रही है।
सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य देश के विकास की प्रत्येक गतिविधि में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसी भावना के तहत जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार सह आवास दिवस आयोजित किया गया। इस दौरान पंजीकृत श्रमिकों ने QR कोड स्कैन कर वीबीजीरामजी योजना से जुड़ी नई जानकारी हासिल की। साथ ही कार्य की मांग और स्थानीय आवश्यकताओं को चिन्हित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की तकनीकी समस्याओं का भी स्थानीय स्तर पर समाधान किया गया।
सात तारीख बनी रोजगार सह आवास दिवस की पहचान
ग्राम पंचायतों में अब हर महीने की सात तारीख को रोजगार सह आवास दिवस के रूप में विशेष महत्व दिया जा रहा है। ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी, तकनीकी सहायता और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण से इस दिवस की उपयोगिता बढ़ी है।
तकनीक से ग्रामीणों का बढ़ता जुड़ाव भी इस पहल की खास उपलब्धि है। QR कोड के माध्यम से आवश्यक जानकारी आसानी से उपलब्ध होने से पंजीकृत श्रमिकों को अपनी योजनाओं और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को समझने में सुविधा मिल रही है।
एक QR कोड में 375 तरह के कार्यों की जानकारी
जिले की सभी 162 ग्राम पंचायतों में विकसित भारत जीरामजी तथा प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ग्राम पंचायतों में लगाए गए स्वप्रकटीकरण QR कोड को बड़ी संख्या में पंजीकृत श्रमिकों और ग्रामीणों ने स्कैन किया। इसके माध्यम से उन्हें वीबीजीरामजी योजना के अंतर्गत अपनी ग्राम पंचायत में किए जा सकने वाले 375 प्रकार के कार्यों की जानकारी मिली।
इस पहल से ग्रामीणों को यह समझने में मदद मिल रही है कि उनके गांव में योजना के तहत किस प्रकार के कार्य कराए जा सकते हैं और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप किन कार्यों की मांग की जा सकती है।
पांच वर्षों की कार्ययोजना पर ग्रामीणों की भागीदारी
रोजगार सह आवास दिवस के दौरान ग्राम पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।
ग्रामीणों ने विकसित ग्राम की कार्ययोजना तैयार करने में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के सभी परिवारों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही आगामी विकसित भारत ग्राम पंचायत प्लान में ग्रामीणों की सहभागिता के संबंध में जानकारी दी गई।
पंजीकृत श्रमिकों की मांग के अनुसार स्वीकृत कार्यों को शीघ्र प्रारंभ कराने पर भी चर्चा हुई, ताकि रोजगार के अवसरों के साथ गांव के विकास कार्यों को गति मिल सके।
आवास निर्माण की प्रगति की भी हुई समीक्षा
रोजगार सह आवास दिवस के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों के निर्माण की प्रगति पर भी चर्चा की गई। हितग्राहियों को अपने आवास निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
निर्माण कार्यों के दौरान सामने आ रही समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान किया गया। वहीं कुछ ग्राम पंचायतों में मुख्यमंत्री आवास योजना और जनमन आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों के निर्माण को गति देने के लिए लंबित तकनीकी प्रक्रियाएं भी पूरी कराई गईं।
इनमें जियो-टैगिंग जैसी आवश्यक कार्यवाहियों को तत्काल पूर्ण कराया गया, ताकि आवास निर्माण की प्रगति को आगे बढ़ाया जा सके।
पारदर्शिता और सहभागिता को मिल रहा तकनीक का साथ
ग्राम पंचायतों में QR कोड की व्यवस्था से ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हुई है। एक स्कैन के माध्यम से योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध होना ग्रामीणों की जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
तकनीक, पारदर्शिता और ग्रामीण सहभागिता के इस समन्वय से विकसित ग्राम पंचायतों की दिशा में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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