IIT भिलाई की बड़ी उपलब्धि: गर्म होते ही आकार बदलेगा स्मार्ट हाइड्रोजेल…
4D-प्रिंटेबल सामग्री में सॉफ्ट रोबोटिक्स से लेकर जल प्रदूषण नियंत्रण तक की क्षमता, 1 ग्राम सूखे हाइड्रोजेल ने उठाया 250 ग्राम का भार

भिलाई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी बहुउद्देशीय स्मार्ट हाइड्रोजेल सामग्री विकसित की है, जो गर्म करने पर अपना आकार बदल सकती है और अपशिष्ट जल से प्रदूषकों को हटाने में भी सक्षम है। यह तकनीक भविष्य में सॉफ्ट रोबोटिक्स, स्मार्ट एक्ट्यूएटर्स, 4D प्रिंटिंग और पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती है।
इस शोध में सुदीप्ता पॉल, प्रियंक सिन्हा, अमूल जैन और डॉ. संजीब बनर्जी शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से डिजाइन किए गए फोर-आर्म स्टार पॉलिमर को ऐक्रेलिक एसिड, ऐक्रेलामाइड और PEGDA के साथ मिलाकर हाइड्रोजेल तैयार किया। इसे UVA प्रकाश की मदद से तेजी से तैयार किया जा सकता है और अलग-अलग संरचनाओं में ढाला जा सकता है। इससे भविष्य में प्रोग्राम किए गए आकार में बदलाव करने वाले स्मार्ट उपकरण विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
गर्म होते ही बदलता है आकार
इस हाइड्रोजेल की सबसे खास विशेषता इसका शेप-मेमोरी व्यवहार है। शोधकर्ताओं ने फूल जैसी संरचना के जरिए इसका प्रदर्शन किया। गर्म करने पर यह संरचना खुल जाती है और निर्धारित प्रोग्राम किए गए आकार में वापस आ जाती है।
परीक्षण में सामग्री ने करीब 94 प्रतिशत शेप फिक्सिटी और 85 प्रतिशत शेप रिकवरी दर्ज की। यह लगभग 25 सेकंड में अपने निर्धारित आकार में लौट आई। बार-बार आकार परिवर्तन के चक्रों के दौरान भी हाइड्रोजेल ने अपनी कार्यक्षमता बरकरार रखी।
1 ग्राम सामग्री ने उठाया 250 ग्राम का भार
स्मार्ट आकार परिवर्तन के साथ इस सामग्री ने मजबूत यांत्रिक क्षमता भी प्रदर्शित की। एक प्रदर्शन में केवल 1 ग्राम सूखे हाइड्रोजेल ने 250 ग्राम के धातु भार को बार-बार उठाने की क्षमता दिखाई।
यह क्षमता इसे हल्के और लचीले सॉफ्ट एक्ट्यूएटर्स तथा रोबोटिक सिस्टम में इस्तेमाल के लिए संभावित सामग्री बनाती है। यानी भविष्य में ऐसी सामग्री से ऐसे उपकरण विकसित किए जा सकते हैं जो बाहरी तापमान के अनुसार अपनी आकृति या गति बदल सकें।
पानी से खतरनाक प्रदूषकों को हटाने में भी सक्षम
इस हाइड्रोजेल का उपयोग केवल रोबोटिक्स तक सीमित नहीं है। शोधकर्ताओं ने इसे जल शुद्धिकरण के लिए भी परखा। परीक्षण में सामग्री ने पानी से मेथिलीन ब्लू, रोडामाइन B और ईओसिन B जैसे कार्बनिक रंगों को हटाने की क्षमता दिखाई।
इसके अलावा यह विषैले लेड (Pb²⁺) आयनों को भी पानी से हटाने में सक्षम पाया गया। इस तरह एक ही सामग्री में आकार बदलने की क्षमता, यांत्रिक मजबूती और प्रदूषकों को हटाने की क्षमता का संयोजन सामने आया है।
4D प्रिंटिंग में खुल सकती हैं नई संभावनाएं
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह हाइड्रोजेल प्लेटफॉर्म भविष्य में ऐसे स्मार्ट और 4D-प्रिंटेबल पदार्थों के विकास का आधार बन सकता है, जिनमें प्रोग्राम किए गए आकार परिवर्तन के साथ पर्यावरणीय प्रदूषण नियंत्रण की क्षमता भी मौजूद हो।
4D प्रिंटिंग में तैयार वस्तु केवल एक निश्चित आकार में नहीं रहती, बल्कि किसी बाहरी उत्तेजना जैसे तापमान के प्रभाव से निर्धारित तरीके से अपना आकार बदल सकती है। ऐसे में IIT भिलाई का यह शोध स्मार्ट सामग्री आधारित उपकरणों और पर्यावरणीय अनुप्रयोगों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
‘Small Methods’ में प्रकाशित हुआ शोध
IIT भिलाई के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन पीयर-रिव्यू जर्नल Small Methods में प्रकाशित हुआ है। शोध से सामने आए परिणाम स्मार्ट हाइड्रोजेल को भविष्य की बहुउद्देशीय सामग्री के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को मजबूत करते हैं।
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