
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षक भर्ती, पदोन्नति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर तथ्यहीन दावे कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
वंदना राजपूत के अनुसार प्रदेश में 260 स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जिनमें 212 प्राथमिक और 48 मिडिल स्कूल शामिल हैं। वहीं 12,712 विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित होने का दावा किया गया है। इनमें 5,840 प्राथमिक और 6,872 मिडिल स्कूल बताए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
शिक्षक भर्ती और पदोन्नति को लेकर भी सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षक और सहायक शिक्षक पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नई-नई शर्तों के कारण पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उन्होंने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि शिक्षकों के न्यूनतम पदों में कटौती के चलते 54,185 पद समाप्त किए गए, इसके बावजूद लगभग 40 हजार शिक्षक पद रिक्त हैं। कांग्रेस के मुताबिक हर महीने बड़ी संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन नई भर्ती नहीं होने से बेरोजगार बीएड, डीएड और टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ रही है।
युक्तियुक्तकरण के नाम पर स्कूल बंद करने का आरोप
वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर भाजपा सरकार ने 10,463 स्कूल बंद कर दिए। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में सफाई कर्मचारियों, रसोइयों, विद्या मितान, अनियमित कर्मचारियों और अतिथि शिक्षकों की सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
कांग्रेस नेता ने स्कूलों की अधोसंरचना को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक कई विद्यालयों में छतों से पानी टपकने, खराब शौचालय, कीचड़ से भरे मैदान और जर्जर कक्षाओं जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कॉपी-किताब, गणवेश, साइकिल और छात्रवृत्ति योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए।
स्कूल जतन योजना की राशि को लेकर दावा
कांग्रेस ने स्कूल जतन योजना के तहत आवंटित राशि को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। वंदना राजपूत के अनुसार वर्ष 2022-23 से स्कूलों के रखरखाव के लिए 1,807.68 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इनमें से 1,191 करोड़ रुपये पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में खर्च हुए, जबकि शेष 617 करोड़ रुपये भाजपा सरकार आने के बाद लैप्स होने का दावा उन्होंने किया।
80 हजार शिक्षकों के टीईटी मुद्दे पर भी उठी आवाज
शिक्षकों के आंदोलन और टीईटी की अनिवार्यता को लेकर कांग्रेस ने सरकार से राहत देने की मांग की है। वंदना राजपूत ने कहा कि प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षकों को बर्खास्तगी की धमकी देना अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत टीईटी की अनिवार्यता केंद्र स्तर पर 2010 में लागू हुई और छत्तीसगढ़ में 2012 से लागू की गई। कांग्रेस की मांग है कि 2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए। साथ ही 2012 के बाद से सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर विशेष टीईटी परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था की जाए।
कांग्रेस ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने, रिक्त पदों पर भर्ती करने, शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया तेज करने और स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
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