सिंटर प्लांट-3 में तकनीकी सुधार से बढ़ी सीओ गैस प्रणाली की दक्षता, मशीन-1 की इग्निशन प्रक्रिया होगी और बेहतर…
यू-सील और अतिरिक्त शाखा लाइन की स्थापना से गैस पृथक्करण का समय 60 से घटकर 10-15 मिनट, उत्पादन व ऊर्जा दक्षता को मिलेगा लाभ

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के सिंटर प्लांट-3 (एसपी-3) में सिंटर मशीन-1 की इग्निशन फर्नेस की सीओ गैस आपूर्ति प्रणाली को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए गए हैं। इन सुधारों के तहत इग्निशन फर्नेस के समीप नया यू-सील स्थापित करने के साथ सीओ गैस हेडर में बर्नर क्रमांक-1 के पास एक अतिरिक्त शाखा लाइन उपलब्ध कराई गई है।
इन दोनों तकनीकी कार्यों को आंतरिक संसाधनों और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सुधारित प्रणाली का उद्घाटन तत्कालीन महाप्रबंधक (प्रचालन, एसपी-3) ए.के. बेडेकर एवं एस.सी. चांवरिया द्वारा किया गया।
इस अवसर पर महाप्रबंधक प्रभारी (एसपी-3) राहुल बिजुरकर, महाप्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) भादेव टुडू सहित एसपी-3 के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
यू-सील से गैस लाइन पृथक्करण हुआ आसान
सिंटर मशीन-1 के इग्निशन फर्नेस की सीओ गैस आपूर्ति लाइन में ग्राउंड लेवल एवं द्वितीय स्तर पर यू-सील स्थापित किए गए हैं। एक्सहॉस्टर, फर्नेस अथवा सिंटर मशीन के बंद होने की स्थिति में सीओ गैस लाइन को सुरक्षित रूप से अलग करने के लिए इन यू-सील में पानी भरना पड़ता था।
पूर्व व्यवस्था में सीओ गैस लाइन को पृथक करने में लगभग 45 से 60 मिनट का समय लगता था। इसके कारण रखरखाव और मशीन के पुनः संचालन की गतिविधियों में देरी होने की संभावना रहती थी, जिसका असर मशीन की उपलब्धता और उत्पादन पर पड़ सकता था।
नए यू-सील की स्थापना के बाद अब गैस लाइन को सुरक्षित रूप से अलग करने में लगने वाला समय घटकर लगभग 10 से 15 मिनट रह गया है।
45-60 मिनट से घटकर 10-15 मिनट हुआ समय
नए यू-सील से सबसे महत्वपूर्ण सुधार गैस लाइन के सुरक्षित पृथक्करण की प्रक्रिया में आया है। पहले जहां इसके लिए लगभग एक घंटे तक का समय लग सकता था, वहीं अब यही कार्य करीब 10 से 15 मिनट में किया जा सकेगा।
इससे शटडाउन और रखरखाव के दौरान परिचालन टीम को अधिक सुविधा मिलेगी। साथ ही मशीन की उपलब्धता बनाए रखने और पुनः संचालन की प्रक्रिया को तेज करने में भी मदद मिलेगी।
बर्नर नंबर-1 तक नहीं पहुंच रही थी पर्याप्त सीओ गैस
सुधार का दूसरा प्रमुख पहलू इग्निशन फर्नेस में सीओ गैस के समान वितरण से जुड़ा था। मौजूदा गैस हेडर के अंतिम छोर पर स्थित होने के कारण बर्नर क्रमांक-1 को अन्य बर्नरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम सीओ गैस मिल रही थी।
गैस वितरण में इस असमानता का प्रभाव पैलेट की पूरी चौड़ाई में सिंटर मिक्स के समान दहन पर पड़ रहा था। इससे इग्निशन प्रक्रिया की एकरूपता प्रभावित होने की संभावना रहती थी।
अतिरिक्त शाखा लाइन से सुधरेगा गैस वितरण
इस परिचालन संबंधी समस्या के समाधान के लिए ए.के. बेडेकर एवं एस.सी. चांवरिया के मार्गदर्शन में एक क्रॉस-फंक्शनल टीम का गठन किया गया। टीम ने मौजूदा सीओ गैस पाइपलाइन व्यवस्था का अध्ययन किया और विभिन्न विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर तकनीकी समाधान तैयार किया।
योजना के तहत बर्नर क्रमांक-1 के समीप सीओ गैस हेडर से अतिरिक्त शाखा पाइपलाइन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इससे बर्नर नंबर-1 तक पर्याप्त मात्रा में सीओ गैस पहुंचाना संभव हुआ।
इग्निशन प्रक्रिया में आएगी एकरूपता
अतिरिक्त शाखा लाइन उपलब्ध होने से बर्नर क्रमांक-1 को पर्याप्त और अपेक्षाकृत समान रूप से सीओ गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकी है।
गैस वितरण में सुधार से सिंटर बेड में इग्निशन अधिक एकसमान और प्रभावी होने की उम्मीद है। इससे सिंटर की गुणवत्ता तथा पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन में सुधार में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही बेहतर इग्निशन से सिंटर उत्पादकता बढ़ाने, सिंटर रिटर्न कम करने और प्रति टन सिंटर उत्पादन में कोक की खपत घटाने में भी सहायता मिलने की संभावना है।
इन-हाउस संसाधनों से तैयार हुआ तकनीकी समाधान
इन सुधार कार्यों की खास बात यह रही कि इन्हें संयंत्र के उपलब्ध आंतरिक संसाधनों और विभिन्न विभागों की तकनीकी क्षमता का उपयोग करते हुए पूरा किया गया।
इंजीनियरिंग डिजाइन विभाग (ईडीडी) एवं एनर्जी मैनेजमेंट विभाग (ईएमडी) ने प्रस्ताव के तकनीकी पक्ष को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
महाप्रबंधक (ईडीडी) मेजी मेजर सिंह, महाप्रबंधक (ईएमडी) एस. रमानी, उप महाप्रबंधक (ईडीडी) देवेंद्र सोनार, उप महाप्रबंधक (ईएमडी) ऋतुराज, वरिष्ठ प्रबंधक (ईएमडी) प्यारे लाल देशमुख एवं प्रबंधक (ईडीडी) टी.के. बंजारे के नेतृत्व में संबंधित टीमों ने तकनीकी समाधान तैयार किया।
कई विभागों के समन्वय से पूरा हुआ कार्य
सुधार कार्यों के क्रियान्वयन में विभिन्न विभागों की टीमों ने समन्वित रूप से काम किया। उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए दोनों तकनीकी संशोधनों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इससे यह भी प्रदर्शित हुआ कि संयंत्र के विभिन्न विभागों की विशेषज्ञता और टीमवर्क का उपयोग कर परिचालन संबंधी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान इन-हाउस स्तर पर विकसित किए जा सकते हैं।
अधिकारियों और कर्मचारियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
सुधार कार्यों को सफलतापूर्वक लागू करने में महाप्रबंधक (ऑपरेशन) आर.डी. शर्मा, उप महाप्रबंधक (मैकेनिकल) एम.यू. राव, उप महाप्रबंधक (ऑपरेशन) एस.के. सतपथी, उप महाप्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) डी.के. गुप्ता, सहायक महाप्रबंधक (पीएलईएम) एस. देशपांडे, सहायक महाप्रबंधक (पीएलईएम) एस.के. सारंगी, सहायक महाप्रबंधक (मैकेनिकल, एसपी-3) जितेश शाहानी, वरिष्ठ प्रबंधक (मैकेनिकल, एसपी-3) विपिन मौर्य, वरिष्ठ प्रबंधक (मैकेनिकल, एसपी-3) निरंजन एक्का तथा प्रबंधक (मैकेनिकल, एसपी-3) दिनेश मानिकपुरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
टीमवर्क को मिली सराहना
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने आंतरिक क्षमताओं, प्रभावी टीमवर्क और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से तकनीकी सुधारों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए क्रॉस-फंक्शनल टीम को बधाई दी।
इन सुधारों से सिंटर मशीन-1 की सीओ गैस प्रणाली की सुरक्षा, विश्वसनीयता और परिचालन सुगमता में सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही इग्निशन प्रक्रिया में एकरूपता आने से सिंटर की गुणवत्ता, उत्पादकता और ऊर्जा दक्षता को भी लाभ मिलने की संभावना है।
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