ताड़ोकी-रावघाट रेलखंड पर यात्री सेवा का रास्ता साफ, सीआरएस निरीक्षण के बाद तैयारियां तेज…
95 किमी दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना के अहम हिस्से को मिली स्वीकृति, बस्तर के रेल संपर्क को विस्तार मिलने की उम्मीद

भिलाई/रायपुर। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र और भारतीय रेल के संयुक्त प्रयासों से विकसित की जा रही दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना के तहत ताड़ोकी-रावघाट एकल रेलखंड पर यात्री परिचालन शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 22 सितंबर 2026 को दक्षिण-पूर्व परिमंडल, कोलकाता के रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा रेलखंड का निरीक्षण एवं स्वीकृति दिए जाने के बाद यात्री सेवा शुरू करने से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

यात्री परिचालन से संबंधित जरूरी प्रक्रियाएं अब पूर्णता की ओर हैं। इससे ताड़ोकी से आगे रावघाट तक रेल सेवा विस्तार की लंबे समय से प्रतीक्षित उम्मीदों को बल मिला है।
58 वैगन की रेक से हुआ था तकनीकी परीक्षण
रावघाट रेलखंड पर इससे पहले 17 जून 2026 को तकनीकी परीक्षण शुरू किया गया था। नियंत्रित गति और सीमित भार की परिस्थितियों में 58 वैगन वाली बॉक्सएन रेक के माध्यम से परीक्षण किया गया। इसके जरिए रेलखंड की परिचालन क्षमता और आवश्यक तकनीकी तैयारियों को आगे बढ़ाया गया।
सीआरएस के निरीक्षण एवं स्वीकृति के बाद अब यात्री परिचालन से संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
95 किलोमीटर लंबी परियोजना में 1,735 करोड़ रुपये का निवेश
लगभग 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र और भारतीय रेल के संयुक्त प्रयासों से विकसित की जा रही है। परियोजना के तहत रेल लाइन निर्माण के अलावा रेलवे स्टेशनों तथा विद्युतीकरण से जुड़े कार्यों के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से वित्तीय सहयोग दिया गया है।
परियोजना में सेल द्वारा अब तक लगभग 1,735 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है, जबकि पूरी परियोजना के निर्माण पर 1,880 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ा काम
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना का निर्माण दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरने के कारण चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके बावजूद परियोजना से जुड़े विभिन्न हितधारकों के निरंतर समन्वय और प्रयासों से निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई।
वर्ष 2008 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के आधार पर इस परियोजना की परिकल्पना मुख्य रूप से लौह अयस्क के परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा और यह बस्तर क्षेत्र को आर्थिक एवं सामाजिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना के रूप में सामने आई।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद
रावघाट तक यात्री रेल सेवा का विस्तार बस्तर क्षेत्र के लोगों के लिए बेहतर रेल संपर्क की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रेल सेवा के विस्तार के साथ रेलवे स्टेशनों के आसपास जनसुविधाओं के विकास और अस्पताल जैसी आवश्यक सेवाओं के विस्तार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
2022 में दल्लीराजहरा से ताड़ोकी के बीच यात्री रेल सेवा शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यवसाय से जुड़े अवसरों तक पहुंच में सुविधा मिली है। अब रावघाट तक रेल संपर्क बढ़ने से इन सुविधाओं का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।
बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगा बेहतर संपर्क
रावघाट तक रेल संपर्क पहुंचने से बस्तर के दूरस्थ इलाकों की आवाजाही सुगम होने के साथ छत्तीसगढ़ और देश के प्रमुख शहरों एवं नगरों से संपर्क मजबूत होने की संभावना है। रेलवे स्टेशनों के आसपास आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं भी बन सकती हैं।
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल कॉरिडोर के परिचालन में आने से एक ओर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर लौह अयस्क परिवहन के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स आधारभूत संरचना भी मजबूत होगी। परियोजना इस्पात क्षेत्र की दीर्घकालिक जरूरतों के साथ बस्तर के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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