कुदरत का अनोखा करिश्मा ! जुड़वां बहनों के फिंगरप्रिंट और रेटिना भी एक जैसे, आधार कार्ड बनवाने में आई बड़ी अड़चन…
रामपुर की खिजरा-तूबा के बायोमेट्रिक्स ने बढ़ाई तकनीकी चुनौती, 4-5 महीने की मशक्कत के बाद अलग हुए आधार रिकॉर्ड

रामपुर । उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जुड़वां बहनों की जैविक पहचान और डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली जुड़वां बहनों खिजरा और तूबा के फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन एक जैसे पाए जाने की जानकारी सामने आई। इस असामान्य स्थिति के कारण दोनों बहनों के आधार कार्ड अपडेट कराने में तकनीकी परेशानी आने लगी।
परिवार के लिए यह समस्या तब और गंभीर हो गई, जब आधार रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से दोनों के बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने की प्रक्रिया प्रभावित होने लगी।
एक का फॉर्म स्वीकार, दूसरी का आवेदन डुप्लीकेट बताकर खारिज
बताया गया कि दोनों बहनों के आधार बायोमेट्रिक्स में समानता के कारण सिस्टम उनके रिकॉर्ड को अलग-अलग पहचानने में कठिनाई का सामना कर रहा था। एक बहन का आधार संबंधी काम पूरा होने के बाद दूसरी बहन का फॉर्म डुप्लीकेट मानकर खारिज कर दिया जाता था।
इस तकनीकी अड़चन के चलते दोनों के लिए अलग-अलग आधार रिकॉर्ड अपडेट कराना चुनौती बन गया। परिवार ने कई महीनों तक इस समस्या का समाधान तलाशा, लेकिन मामला सामान्य प्रक्रिया से हल नहीं हो सका।
फेस लॉक से खुला बहन का फोन, तभी हुआ समानता का एहसास
परिवार को दोनों बहनों की जैविक पहचान में असामान्य समानता का अंदेशा तब हुआ, जब एक बहन का मोबाइल फोन दूसरी बहन के चेहरे से ही फेस लॉक के जरिए खुल गया।
इस घटना ने परिवार का ध्यान दोनों की शारीरिक समानताओं और डिजिटल पहचान से जुड़ी संभावित समस्या की ओर खींचा। बाद में आधार अपडेट कराने के दौरान भी इसी तरह की तकनीकी उलझन सामने आई।
जिलाधिकारी ने लिया संज्ञान, UIDAI से शुरू हुआ संपर्क
लगातार परेशानी का सामना करने के बाद परिवार ने रामपुर के जिलाधिकारी (DM) से मदद की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के लखनऊ और दिल्ली स्थित कार्यालयों से संपर्क किया।
इसके बाद दोनों बहनों के आधार रिकॉर्ड को अलग-अलग अपडेट करने के लिए विशेष तकनीकी प्रक्रिया पर काम शुरू किया गया।
4 से 5 महीने की मशक्कत के बाद मिली सफलता
बताया गया कि करीब चार से पांच महीने तक प्रयास और तकनीकी प्रक्रियाओं के बाद दोनों बहनों के आधार रिकॉर्ड को अलग-अलग अपडेट करने में सफलता मिली।
इससे उनके सामने खड़ी आधार संबंधी समस्या का समाधान हो सका। प्रशासन ने इस मामले को बेहद दुर्लभ यानी ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ श्रेणी का मामला बताया।
डिजिटल पहचान प्रणाली के सामने असामान्य चुनौती
खिजरा और तूबा का मामला इसलिए चर्चा में है, क्योंकि आधार जैसी पहचान प्रणाली में बायोमेट्रिक जानकारी का उपयोग किसी व्यक्ति की विशिष्ट पहचान स्थापित करने के लिए किया जाता है। ऐसे में दो व्यक्तियों के बायोमेट्रिक्स समान पाए जाने की स्थिति तकनीकी सत्यापन के लिए असाधारण चुनौती बन सकती है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में फिंगरप्रिंट और रेटिना के एक जैसे होने की स्वतंत्र तकनीकी रिपोर्ट या वैज्ञानिक पुष्टि का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस मामले की विशिष्टता के बारे में अंतिम निष्कर्ष संबंधित तकनीकी रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
फिलहाल, परिवार के लिए राहत की बात यह है कि कई महीनों की कोशिशों के बाद दोनों बहनों के आधार रिकॉर्ड अलग-अलग अपडेट हो सके और उनकी पढ़ाई से जुड़ी प्रक्रिया में आ रही बाधा दूर करने का रास्ता खुला।
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