दहेज प्रताड़ना से मुक्ति तक: सारंगढ़-बिलाईगढ़ की महिला को ‘सखी’ ने दिलाया आत्मसम्मान और स्त्रीधन…
दहेज में स्कूटी और ₹20 हजार महीने की मांग से परेशान महिला को राहत, सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल पर वापस मिला विवाह का सामान

रायपुर । छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में दहेज की मांग और घरेलू प्रताड़ना से परेशान एक महिला को सखी वन स्टॉप सेंटर की मदद से राहत मिली है। केंद्र की काउंसलिंग और पुलिस विभाग के सहयोग से महिला को विवाह में मिला उसका पूरा सामान वापस दिलाया गया। इस पहल से महिला को अपने अधिकारों के साथ सम्मानपूर्वक आगे बढ़ने का संबल मिला।
शादी के एक महीने बाद शुरू हुई प्रताड़ना
महिला ने खुशहाल वैवाहिक जीवन के सपनों के साथ नई जिंदगी की शुरुआत की थी, लेकिन शादी के महज एक महीने बाद ही परिस्थितियां बदलने लगीं। आरोप है कि पति ने दहेज में स्कूटी की मांग को लेकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
बेटी का घर बचाने की उम्मीद में महिला के माता-पिता स्कूटी की किस्त भरने के लिए भी तैयार हो गए। इसके बावजूद मांगें खत्म नहीं हुईं। पति कथित तौर पर मायके से हर महीने 20 हजार रुपये नकद लाने का दबाव बनाने लगा।
मांग पूरी नहीं होने पर महिला को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसे मायके जाने से भी रोका जाने लगा।
रिश्ते को बचाने की कोशिश नाकाम, ‘सखी’ से मांगी मदद
महिला ने लंबे समय तक रिश्ते को बचाने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसने प्रताड़ना भरे रिश्ते से अलग होने और विवाह के समय मिले अपने स्त्रीधन व अन्य सामान को वापस पाने का निर्णय लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला संरक्षण अधिकारी के माध्यम से प्रकरण सखी वन स्टॉप सेंटर को सौंपा गया। केंद्र ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महिला के पति की काउंसलिंग की और उसे महिला के कानूनी अधिकारों, सुरक्षा तथा गरिमा के प्रति जागरूक किया।
पुलिस के सहयोग से वापस मिला विवाह का सामान
मामले के समाधान के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर के अधिकारियों ने पुलिस विभाग के साथ मिलकर संयुक्त टीम बनाई। काउंसलिंग और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद पति विवाह में मिला सामान लौटाने के लिए राजी हो गया।
इसके बाद केंद्र के प्रशासक, पुलिस बल और संबंधित पक्षों की संयुक्त टीम महिला के ससुराल पहुंची। पूरी प्रक्रिया के दौरान महिला की सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखते हुए उसका सामान वापस दिलाया गया।
सामान वापस मिलने से महिला और उसके परिजनों को राहत मिली। परिवार ने इस सहयोग के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर के प्रति आभार जताया।
104 प्रकरण दर्ज, 86 मामलों का निराकरण
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का सखी वन स्टॉप सेंटर संकट में फंसी महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महिला संरक्षण अधिकारी के अनुसार, केंद्र में अब तक कुल 104 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 86 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है।
एक ही छत के नीचे मिलती हैं कई सुविधाएं
सखी वन स्टॉप सेंटर में जरूरतमंद महिलाओं को एक ही स्थान पर कानूनी सलाह, चिकित्सीय सहायता, पुलिस संरक्षण और मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
यह मामला बताता है कि समय पर सहायता, उचित काउंसलिंग और प्रशासनिक सहयोग महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से निकलने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, यह अपने अधिकारों और आत्मसम्मान के साथ नई शुरुआत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
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