ओरछा में स्वास्थ्य सेवा का बड़ा अभियान, 237 मरीजों की जांच-इलाज; मलेरिया और एनीमिया पर खास फोकस…
सेवा संकल्प शिविर में दूरदराज के ग्रामीणों को एक ही जगह मिली जांच, दवा और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

रायपुर। राज्य सरकार के सेवा संकल्प अभियान के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा में आयोजित एक दिवसीय विशेष स्वास्थ्य शिविर दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और एक ही स्थान पर विभिन्न बीमारियों की जांच, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधा प्राप्त की।

शिविर में 237 से अधिक मरीजों ने पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। दूरस्थ क्षेत्र में आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अलग-अलग रोगों की जांच के साथ मरीजों को आवश्यक दवाएं और चिकित्सकीय सलाह भी उपलब्ध कराई। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण आबादी तक स्वास्थ्य सेवाओं को आसानी से पहुंचाना और समय पर बीमारी की पहचान कर उपचार की दिशा में कदम उठाना रहा।
मलेरिया की जांच में सामने आए पॉजिटिव मामले
शिविर में मलेरिया उन्मूलन को विशेष प्राथमिकता दी गई। स्वास्थ्य दल ने कुल 169 लोगों की मलेरिया जांच की। जांच के दौरान 41 मरीज पीएफ और 7 मरीज पीवी पॉजिटिव पाए गए। इन मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सलाह और उपचार उपलब्ध कराया गया।
दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया जैसी बीमारियों की समय पर पहचान को महत्वपूर्ण माना जाता है। शिविर के माध्यम से बड़ी संख्या में ग्रामीणों की जांच होने से ऐसे मरीजों की पहचान संभव हुई, जिन्हें आगे उपचार एवं निगरानी की आवश्यकता है।
एनीमिया और कुपोषण की रोकथाम पर भी जोर
शिविर में एनीमिया और कुपोषण की स्थिति की पहचान के लिए भी विशेष जांच की गई। स्वास्थ्य दल ने 146 लोगों के हीमोग्लोबिन की जांच की। इसमें 39 ग्रामीणों में रक्त की कमी दर्ज की गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से ऐसे मरीजों को आवश्यक सलाह दी गई तथा आगे स्वास्थ्य देखभाल के लिए मार्गदर्शन किया गया। ग्रामीण क्षेत्र में एनीमिया की पहचान के लिए इस तरह के शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि समय पर जांच होने से प्रभावित लोगों को उपचार और पोषण संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जा सकती है।
मधुमेह और उच्च रक्तचाप की भी हुई जांच
शिविर में मधुमेह की पहचान और नियंत्रण के लिए 138 लोगों की रक्त शर्करा की जांच की गई। जांच में 6 मरीजों में उच्च रक्त शर्करा स्तर पाया गया। इन मरीजों को आवश्यक दवाएं और चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।
इसके अलावा शिविर में उच्च रक्तचाप से संबंधित मरीजों की भी पहचान की गई। स्वास्थ्य दल ने मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार नियमित जांच और चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी।
सिकल सेल मरीजों की भी हुई पहचान
स्वास्थ्य शिविर में सिकल सेल से संबंधित मरीजों की पहचान पर भी ध्यान दिया गया। जांच और चिकित्सकीय परीक्षण के माध्यम से ऐसे लोगों को चिन्हित करने का प्रयास किया गया, जिन्हें आगे निरंतर स्वास्थ्य निगरानी और चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मरीजों को नियमित उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श के महत्व के बारे में भी बताया। इस तरह शिविर को केवल तत्काल इलाज तक सीमित न रखते हुए आगे की स्वास्थ्य देखभाल से जोड़ने का प्रयास किया गया।
19 गर्भवती महिलाओं की हुई प्रसव पूर्व जांच
शिविर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी गई। इस दौरान 19 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन किया गया और उनकी प्रसव पूर्व जांच की गई।
गर्भवती महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ नियमित जांच, सुरक्षित मातृत्व और प्रसव पूर्व देखभाल के संबंध में जानकारी दी गई। दूरस्थ क्षेत्र की महिलाओं तक ऐसी सुविधाएं पहुंचाने से उन्हें समय पर स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सेवाएं प्राप्त करने में मदद मिलती है।
आंख और दांतों की जांच की भी सुविधा
ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विभिन्न विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। शिविर में नेत्र जांच और दंत चिकित्सा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
ग्रामीणों ने इन सेवाओं का लाभ उठाया और चिकित्सकों से अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर परामर्श लिया। शिविर में सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ अलग-अलग रोगों से संबंधित सेवाओं को शामिल किए जाने से ग्रामीणों को कई प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलीं।
टीबी समेत कई महत्वपूर्ण बीमारियों की जांच
शिविर में टीबी की पहचान के लिए संदिग्ध मरीजों के बलगम के नमूने भी एकत्र किए गए। इसके अलावा स्वास्थ्य टीम ने एचआईवी, हेपेटाइटिस, डेंगू और टाइफाइड जैसी बीमारियों की आवश्यक जांच भी की।
लिवर, किडनी और थायरॉइड से संबंधित जांच की सुविधा भी शिविर में उपलब्ध कराई गई। इससे ग्रामीणों को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की प्राथमिक जांच कराने का अवसर मिला और आवश्यकतानुसार आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
मौके पर बनाए गए आयुष्मान कार्ड
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शिविर में दो पात्र हितग्राहियों के ऑन-द-स्पॉट आयुष्मान कार्ड भी तैयार किए गए।
आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ने की दिशा में यह पहल की गई। शिविर में उपचार और जांच के साथ सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया गया।
चिन्हित मरीजों की आगे भी होगी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार शिविर में चिन्हित किए गए मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी की जाएगी। जिन मरीजों को आगे उपचार या निरंतर चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है, उन्हें आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे स्वास्थ्य शिविरों का उद्देश्य केवल एक दिन में जांच और इलाज उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि बीमारी की पहचान के बाद मरीजों को आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना भी है। इससे ग्रामीणों को समय पर उपचार मिलने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की नियमित निगरानी में मदद मिलेगी।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया। बड़ी संख्या में मरीजों की जांच, विभिन्न रोगों की पहचान, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच और स्वास्थ्य योजनाओं से पात्र हितग्राहियों को जोड़ने की पहल के साथ शिविर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार की पहुंच बढ़ाने की दिशा में आयोजित किया गया।
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