
दुर्ग। साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच दुर्ग पुलिस का “साइबर जागृति अभियान” लगातार जारी है। इसी कड़ी में थाना उतई पुलिस टीम ने CISF क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र उतई पहुंचकर करीब 1000 ट्रेनी जवानों एवं अधिकारी-कर्मचारियों को साइबर अपराधों से बचाव और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, लिंक, OTP, KYC अपडेट और बैंकिंग संबंधी झांसे का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
OTP से लेकर UPI फ्रॉड तक समझाए तरीके
कार्यक्रम में OTP फ्रॉड, KYC के नाम पर ठगी, बैंकिंग फ्रॉड और UPI धोखाधड़ी से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए गए। जवानों एवं कर्मचारियों को समझाइश दी गई कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, ATM/डेबिट कार्ड की जानकारी, CVV, PIN, UPI PIN या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
पुलिस ने अनजान लिंक पर क्लिक करने और किसी अज्ञात मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी।
सोशल मीडिया हैकिंग और ब्लैकमेलिंग से रहें सावधान
जागरूकता सत्र में सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग और साइबर ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों पर भी चर्चा की गई। पुलिस ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय संदिग्ध मैसेज, लिंक, कॉल और एप्लीकेशन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत
पुलिस टीम ने साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में समय गंवाए बिना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई। साथ ही संबंधित बैंक को तत्काल सूचना देने की सलाह दी गई, ताकि वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।
पुलिस ने परिवार और परिचितों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।
“सतर्क रहें, सुरक्षित रहें—साइबर अपराध से बचाव ही सबसे प्रभावी सुरक्षा है।”
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