दुर्ग

जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित…

दुर्ग / कलेक्टर अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता सर्वेक्षण और विभिन्न विकास कार्यों की अद्यतन प्रगति की समीक्षा हेतु प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के स्वच्छता लक्ष्यों और पूर्व में दिए गए निर्देशों के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई, जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग दुबे ने कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के दिशा-निर्देशों के पालन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक के दौरान यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि जिले के समस्त 381 ग्रामों को ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित किया जा चुका है और इनका भौतिक सत्यापन भी पूर्ण हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए ग्राम के सभी परिवारों द्वारा घर पर ही चार प्रकार का कचरा पृथक्करण किया जाना अनिवार्य किया गया है।

साथ ही, बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान कर उनका पंजीयन करने के निर्देश दिए गए हैं। कचरा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सायकल रिक्शा में गीले एवं सूखे कचरे के अतिरिक्त दो अन्य खंड जोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें लाल खंड सेनेट्री पैड एवं डायपर के लिए तथा काला खंड अन्य ई-कचरे के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ग्राम में निर्मित नाडेप और वर्मी कंपोस्ट के उपयोग हेतु साफ-सफाई करने के भी निर्देश प्रदान किए गए हैं।

व्यक्तिगत शौचालयों और प्रोत्साहन राशि के वितरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जनपद पंचायत धमधा से 219 एवं पाटन से 135 प्राप्त मांग पत्रों के अनुसार हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके साथ ही, जनपद पंचायत दुर्ग से 278, धमधा से 02 एवं पाटन से 361 नवीन पात्र परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

ग्रामीण अंचल में घर-घर कचरा संग्रहण प्रणाली को प्रभावी बनाने और प्रत्येक घर से निर्धारित यूजर चार्ज की नियमित वसूली सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। स्वच्छताग्राहियों के मानदेय भुगतान की समीक्षा करते हुए यह कड़े निर्देश दिए गए कि जिन ग्राम पंचायतों में मानदेय लंबित है, उन्हें 15 दिवस के भीतर भुगतान कर प्रतिवेदन प्रेषित किया जाए तथा 15वें वित्त आयोग की राशि से इसका नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

तरल एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के मोर्चे पर जानकारी दी गई कि जिले में वर्तमान में 5 फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट पूरी तरह से क्रियाशील हैं। ग्रामीण अंचल में डी-स्लज वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और नवीन एफएसटीपी निर्माण तथा पूर्व में निर्मित प्लांट के एक्सटेंशन पर भी चर्चा की गई। महतारी सदन में निर्मित सामुदायिक शौचालयों में 15वें वित्त आयोग की राशि का भुगतान करने हेतु ग्राम पंचायतों को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, क्रेडा विभाग को गोवर्धन प्लांट को पुनः क्रियाशील करने के निर्देश दिए गए हैं तथा जिन हितग्राहियों एवं संस्थानों को गैस कनेक्शन प्रदाय किए गए हैं, उनसे निर्धारित शुल्क प्राप्त करने और पुनः उपयोग सुनिश्चित करने हेतु ग्राम स्तर पर बैठक आयोजित कर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था पुख्ता करने को कहा गया है। बैठक में सभी जनपद सीईओ, परियोजना अधिकारी और निर्माण कार्य एजेंसी विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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