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कविताओं से तस्वीरों तक, हिमालय की खूबसूरती के अनदेखे पहलुओं पर आईआईटी भिलाई में व्याख्यान…

मैकगिल विश्वविद्यालय के डॉ. संदीप बनर्जी ने तस्वीरों, चित्रों, यात्रावृत्तांत और कविताओं के जरिए समझाया पर्वतीय अनुभव

भिलाई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (IIT Bhilai) के लिबरल आर्ट्स विभाग द्वारा 7 सितंबर 2026 को इंटरसेक्शन व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत एक विशेष आमंत्रित व्याख्यान का आयोजन किया गया। कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय के डॉ. संदीप बनर्जी ने परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में “माउंटेन ग्लोम, माउंटेन ग्लोरी: एक्सकर्शन्स इनटू हिमालयन एस्थेटिक्स” विषय पर अपने विचार साझा किए।

व्याख्यान के दौरान डॉ. बनर्जी ने उन्नीसवीं सदी के अंतिम दौर से लेकर बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों के बीच हिमालय को केंद्र में रखकर तैयार किए गए विभिन्न साहित्यिक एवं दृश्य दस्तावेजों का विश्लेषण किया। उन्होंने ‘हिमालयी सौंदर्यशास्त्र’ की अवधारणा पर चर्चा करते हुए बताया कि तस्वीरें, पेंटिंग, यात्रा लेखन और कविताएं किस तरह हिमालय को केवल एक भौगोलिक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक विशिष्ट अनुभवात्मक स्थल के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

कला और साहित्य में पर्वतों की बदलती छवि

डॉ. बनर्जी ने हिमालय के चित्रण के लिए कलाकारों एवं लेखकों द्वारा अपनाई गई विभिन्न पाठ्य रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रकृति के चित्रण के माध्यम से मानव और पर्यावरण के बीच संबंधों को समझने के कई महत्वपूर्ण रास्ते खुलते हैं।

उन्होंने यूरोपीय और भारतीय लेखकों तथा कलाकारों की रचनाओं में हिमालय के प्रतिनिधित्व का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए दोनों परंपराओं में मौजूद समानताओं और अंतरों को रेखांकित किया। उनके व्याख्यान में यह भी सामने आया कि किसी प्राकृतिक भू-दृश्य को देखने और उसे शब्दों या चित्रों में अभिव्यक्त करने की प्रक्रिया केवल सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण भी शामिल होते हैं।

व्याख्यान के बाद हुई जीवंत चर्चा

कार्यक्रम के बाद प्रतिभागियों के बीच जीवंत संवाद हुआ। चर्चा में प्रकृति के उपभोग, मनुष्य के अपने पर्यावरण के प्रति दृष्टिकोण और साहित्यिक पाठों को पढ़ने तथा समझने के विभिन्न तरीकों जैसे समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस दौरान हिमालय को देखने की पारंपरिक धारणाओं के साथ-साथ आधुनिक पर्यावरणीय चिंताओं को भी चर्चा का हिस्सा बनाया गया। व्याख्यान ने प्रतिभागियों को साहित्य, कला और पर्यावरण के बीच संबंधों को एक बहुविषयक दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया।

बहुविषयक संवाद का मंच है इंटरसेक्शन श्रृंखला

आईआईटी भिलाई के लिबरल आर्ट्स विभाग द्वारा आयोजित इंटरसेक्शन व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य लिबरल आर्ट्स के विभिन्न पहलुओं, उनकी शिक्षण पद्धतियों, कार्यप्रणाली और विकास की दिशा पर खुली चर्चा एवं विमर्श के लिए बहुविषयक मंच उपलब्ध कराना है।

इस श्रृंखला के माध्यम से समकालीन सामाजिक एवं अकादमिक जीवन में चिंतनशील और विचारशील दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है। इसके अंतर्गत मानविकी और सामाजिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित प्रोफेसरों एवं विद्वानों को आमंत्रित कर उनके शोध, विचार और अनुभव साझा किए जाते हैं।

आईआईटी भिलाई में आयोजित यह व्याख्यान भी इसी व्यापक अकादमिक पहल का हिस्सा रहा, जिसने हिमालय को कला, साहित्य और पर्यावरणीय दृष्टि से समझने के लिए एक सार्थक संवाद का अवसर प्रदान किया।

 

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