क्या एलियन सचमुच मौजूद हैं? जांच के लिए व्हाइट हाउस ने बनाई नई टीम, हार्वर्ड के चर्चित वैज्ञानिक को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

वॉशिंगटन: क्या एलियन वास्तव में मौजूद हैं? क्या आसमान में दिखाई देने वाली रहस्यमयी उड़ने वाली वस्तुएं या UFOs किसी दूसरी दुनिया की तकनीक हैं? वर्षों से इन सवालों पर बहस होती रही है। अब अमेरिका की सरकार इन रहस्यों की गहराई तक पहुंचने की कोशिश करने जा रही है। यही वजह है कि व्हाइट हाउस ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के चर्चित खगोलशास्त्री और कॉस्मोलॉजिस्ट एवी लोएब को नई वैज्ञानिक सलाहकार परिषद का प्रमुख बनाया है।
क्या है इस सलाहकार परिषद का काम?
वैज्ञानिक सलाहकार परिषद हाल के वर्षों में अमेरिकी सैन्य कर्मियों द्वारा देखी गई रहस्यमयी गोलाकार वस्तुओं और अन्य अज्ञात उड़ने वाली चीजों की जांच करेगी। इन घटनाओं को अब आधिकारिक तौर पर अनआइडेंटिफाइड एनोमलस फेनोमेना या UAP कहा जाता है। यह पहल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत UFO और एलियन से जुड़े मामलों में ज्यादा से ज्यादा सरकारी जानकारी सार्वजनिक की जा रही है। लोएब की टीम अपनी रिपोर्ट व्हाइट हाउस की नई यूएपी समिति को सौंपेगी।
लोएब के दावों पर क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
लोएब पिछले कई वर्षों से एलियन जीवन की संभावना पर शोध कर रहे हैं। वर्ष 2017 में पृथ्वी के पास से गुजरने वाली एक रहस्यमयी अंतरतारकीय वस्तु को लेकर उन्होंने दावा किया था कि वह किसी एलियन अंतरिक्ष यान से अलग हुई ‘लाइट सेल’ हो सकती है, जबकि अधिकांश वैज्ञानिक उसे धूमकेतु या बर्फ का टुकड़ा मानते रहे। उनके इस दावे ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय का बड़ा वर्ग उनसे सहमत नहीं हुआ। कई विशेषज्ञों का कहना है कि लोएब बिना पर्याप्त सबूतों के असाधारण दावे करते हैं।
लोएब ने नई जिम्मेदारी मिलने पर क्या कहा?
लोएब हालांकि आलोचनाओं की परवाह नहीं करते। उनका कहना है,
‘यह किसी जासूसी कहानी जैसा है। यह बेहद रोमांचक काम है, बशर्ते आप आलोचकों पर ज्यादा ध्यान न दें।’
उन्होंने कहा कि उनकी टीम जांच की शुरुआत इस मानकर करेगी कि रहस्यमयी उड़ने वाली वस्तुएं इंसानों द्वारा बनाई गई हो सकती हैं और पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाएगा। लेकिन उनका यह भी मानना है कि अगर सरकार बेहतर डेटा जुटाती है, तो एलियन जीवन को लेकर दशकों पुरी बहस का हमेशा के लिए जवाब मिल सकता है।
लोएब की टीम में कौन-कौन है शामिल?
लोएब की टीम में एक दर्जन से ज्यादा वैज्ञानिकों और UFO शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है। इनमें अमेरिकी नेवी के रिटायर्ड रियर एडमिरल टिमोथी गैलोडेट भी हैं, जो पहले दावा कर चुके हैं कि कुछ यूएपी ‘गैर-मानवीय बुद्धिमत्ता’ के नियंत्रण में हो सकते हैं और अमेरिका को ऐसे दुर्घटनाग्रस्त विमान भी मिले हैं। टीम में अरबपति कारोबारी बेन लैम भी शामिल हैं, जो विलुप्त प्रजातियों को दोबारा जीवित करने के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। पहली बैठक के बाद टीम ने पेंटागन से UAP से जुड़े 50 से अधिक वीडियो, तस्वीरें और अन्य दस्तावेज मांगे हैं।
ट्रंप के आदेश के बाद बढ़ी पारदर्शिता
बता दें कि इस साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रशासन को UFO और एलियन जीवन से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया था। इसके बाद पेंटागन ने कई पुराने और नए दस्तावेज जारी किए हैं। इनमें दशकों पुराने FBI रिकॉर्ड से लेकर हाल के सैन्य वीडियो शामिल हैं, जिनमें आसमान में तेज गति से उड़ती या मंडराती रहस्यमयी गोलाकार वस्तुएं दिखाई देती हैं। इसी आदेश के बाद ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI) के तहत UAP गवर्नेंस बोर्ड बनाया गया। इसकी पहली बैठक जून में हुई और लोएब की टीम समेत कई सलाहकार समूह इसकी मदद करेंगे।
क्या एलियन से जुड़े सबूत छिपा रही सरकार?
इस बीच अमेरिकी कांग्रेस के दोनों दलों के कुछ सांसद भी सरकार पर और अधिक जानकारी सार्वजनिक करने का दबाव बना रहे हैं। कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने दावा किया है कि सरकार एलियन से जुड़े सबूत छिपा रही है। हालांकि UAP की जांच करने वाले पेंटागन के विशेष कार्यालय का कहना है कि अब तक एलियन जीवन का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। लोएब भी सरकारी साजिश की थ्योरी से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है,
‘मेरे हिसाब से सरकार खुद इन रहस्यमयी वस्तुओं की असली प्रकृति समझ नहीं पा रही है।’
ब्लैक होल के वैज्ञानिक से एलियन शोध तक
एलियन से जुड़े दावों से पहले एवी लोएब ब्लैक होल और आकाशगंगाओं के निर्माण पर अपने शोध के लिए जाने जाते थे। उन्होंने सैकड़ों वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे हैं और लगभग 10 साल तक हार्वर्ड विश्वविद्यालय के खगोल विज्ञान विभाग के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने हार्वर्ड में गैलीलियो प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसका उद्देश्य एलियन सभ्यताओं के संभावित अवशेषों की खोज करना है।
वर्ष 2023 में उनकी टीम ने प्रशांत महासागर से धातु के छोटे-छोटे गोल कण निकाले और दावा किया कि वे किसी दूरस्थ ग्रह या एलियन तकनीक से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि कई वैज्ञानिकों ने इसे ज्वालामुखीय चट्टानों या कोयले की राख बताया।
आलोचनाओं को लेकर बेफिक्र दिख रहे लोएब
पेंटागन के ऑल-डोमेन एनोमली रेजोल्यूशन ऑफिस (AARO) के पूर्व प्रमुख शॉन किर्कपैट्रिक का कहना है कि वैज्ञानिक समुदाय में लोएब की छवि विवादित है और उनके पास राष्ट्रीय सुरक्षा का अनुभव भी नहीं है। उनके मुताबिक टीम की संरचना से लगता है कि व्हाइट हाउस ठोस विज्ञान की बजाय विवादित सिद्धांतों को ज्यादा महत्व दे रहा है।
हालांकि व्हाइट हाउस ने इन आलोचनाओं पर कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं लोएब का कहना है कि उनका पूरा ध्यान केवल वैज्ञानिक तथ्यों पर रहेगा। उन्होंने कहा, ‘हमें सोशल मीडिया नहीं, बल्कि आसमान में दिखने वाली उन रहस्यमयी गोलाकार वस्तुओं पर नजर रखनी चाहिए।’
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