सीने में आग, मुँह में शक्कर, सिर में बर्फ और पैर में चक्कर रखने वाला ही सच्चा युवा : बृजमोहन अग्रवाल…
दिशा कॉलेज में ‘विकसित भारत युवा संवाद’ के दौरान सांसद ने युवाओं को दिया मतदान का मंत्र, कहा- व्यक्तिगत मुद्दों से ऊपर उठकर देश के विकास को दें प्राथमिकता

रायपुर । राजधानी रायपुर के दिशा कॉलेज में गुरुवार को ‘माई भारत’ के तत्वावधान में ‘विकसित भारत युवा संवाद’ (नो योर वोट) कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करते हुए लोकतंत्र में मतदान के महत्व, सही जनप्रतिनिधि के चयन और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।

युवा होने का मतलब सिर्फ उम्र नहीं, सोच और कर्म भी जरूरी
कार्यक्रम के दौरान छात्रा करीना डेका ने पहली बार मतदान करते समय सही निर्णय लेने के आधार को लेकर सवाल किया। इस पर बृजमोहन अग्रवाल ने युवाओं को प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि युवा होने का मतलब केवल 15 से 30 वर्ष की उम्र के बीच होना नहीं है। सच्चा युवा वह है, जिसके सीने में आग, मुँह में शक्कर, सिर में बर्फ और पैर में चक्कर हो।

उन्होंने कहा कि सीने में आग का अर्थ कुछ कर गुजरने का जुनून, मुँह में शक्कर का अर्थ मधुर वाणी, सिर में बर्फ का अर्थ कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर निर्णय लेने की क्षमता और पैर में चक्कर का अर्थ निरंतर सक्रिय रहकर समाज के लिए काम करने की भावना है। यदि 80 वर्ष के व्यक्ति में भी ये चारों गुण मौजूद हैं, तो वह भी वास्तव में युवा है। युवाओं को अपने व्यवहार और विचारों में इन गुणों को अपनाना चाहिए।
भारत की विविधता को समझकर करें विकास की अपेक्षा
वैश्विक परिस्थितियों और भारत की स्थानीय जरूरतों की तुलना करते हुए सांसद ने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है। अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे देशों में होने वाले विकास को देखकर युवाओं के मन में सवाल उठता है कि वैसी सुविधाएं भारत में क्यों नहीं हो सकतीं।

उन्होंने कहा कि ऐसा सोचते समय हमें देश की विशाल आबादी और भौगोलिक विविधताओं को भी समझना होगा। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतें अलग हैं, जबकि पोर्ट ब्लेयर की परिस्थितियां अलग हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी सरगुजा, बस्तर और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां, वातावरण और जन-आवश्यकताएं अलग-अलग हैं। इसलिए विकास की योजनाएं स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
पहली बार वोट देने वाले युवा विकास को बनाएं आधार
पहली बार मतदान करने जा रहे युवाओं को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि वोट डालते समय यह जरूर विचार करें कि कौन विकास को प्राथमिकता दे सकता है। शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का स्थायी समाधान किसकी नीतियों में दिखाई देता है, इसका आकलन करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मतदान केवल व्यक्तिगत पसंद या तात्कालिक मुद्दों के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि जनप्रतिनिधि की विकास के प्रति सोच, नीतियों और कार्ययोजना को देखकर निर्णय लेना चाहिए।
विकास के मुद्दों पर केंद्रित हुआ देश का चुनावी विमर्श
सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में मतदान का पैटर्न और जनता की सोच में व्यापक बदलाव आया है। पहले चुनावों में राजनीतिक समीकरण प्रमुख होते थे, लेकिन अब चुनावी विमर्श में विकास के मुद्दों को अधिक महत्व मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सड़क, पानी, बिजली, रोजगार, किसानों की उपज का उचित मूल्य और वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक नीतियों को मजबूत बनाने जैसे विषय अब जनता के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अग्रवाल ने युवाओं से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत मुद्दों और तात्कालिक बातों से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास, बेहतर नीतियों और देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि जागरूक युवा ही मजबूत लोकतंत्र और विकसित भारत की नींव हैं।
महाविद्यालय के प्राध्यापक और विद्यार्थी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में दिशा कॉलेज के प्राचार्य ए.के. तिवारी, रमन पटेल, सुयश पांडे, अर्पित तिवारी सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी के साथ मतदान करने के लिए प्रेरित किया गया।
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