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दुर्ग में दुर्गा पूजा पंडालों के बीच होगी स्वच्छ और सुरक्षा की प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेगा पुरस्कार…

100 अंकों के आधार पर होगा मूल्यांकन, सुरक्षा, साफ-सफाई, पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था और आकर्षक झांकी पर रहेगा विशेष ध्यान

दुर्ग । दुर्ग शहर में दुर्गा पूजा को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम ने इस वर्ष दुर्गा पूजा पंडालों के बीच प्रतियोगिता आयोजित करने की पहल की है। इसके तहत शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का निरीक्षण कर निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। बेहतर व्यवस्था करने वाली दुर्गा पूजा समितियों को नगर निगम की ओर से पुरस्कृत किया जाएगा। मूर्ति विसर्जन तक पंडालों का निरीक्षण जारी रहेगा।

महापौर अलका बाघमार एवं निगम आयुक्त लीना कोसम के निर्देशानुसार आयोजित इस प्रतियोगिता में सुरक्षा, पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था, स्वच्छता, साफ-सफाई, झांकी की प्रस्तुति और पंडाल की सजावट सहित विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य पूजा समितियों को बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करना और श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित तथा सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।

चार सदस्यीय समिति करेगी पंडालों का निरीक्षण

प्रतियोगिता के संचालन और पंडालों के मूल्यांकन के लिए नगर निगम के सभापति श्याम शर्मा एवं सांस्कृतिक विभाग प्रभारी हर्षिका संभव जैन द्वारा समिति का गठन किया गया है। गठित समिति में विजय मनहरे, रमेश भावनकर, मिश्री गुप्ता एवं देवानंद साहू शामिल हैं। समिति के सदस्य नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का निरीक्षण कर निर्धारित मापदंडों के अनुसार अंक प्रदान करेंगे।

निरीक्षण के दौरान पंडालों में उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सजावट सहित सभी निर्धारित बिंदुओं का आकलन किया जाएगा। मूर्ति विसर्जन तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी, ताकि पूजा अवधि के दौरान व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा सके।

100 अंकों में होगा मूल्यांकन

नगर निगम द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार दुर्गा पूजा पंडालों का कुल 100 अंकों में मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन, पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, झांकी की प्रस्तुति एवं रचनात्मकता तथा पंडाल की सजावट और आकर्षण जैसे प्रमुख बिंदु शामिल होंगे।

प्रतियोगिता में केवल पंडाल की सजावट ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सार्वजनिक व्यवस्था को भी महत्व दिया जाएगा। पंडाल परिसर के साथ आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई, कूड़ेदान की उपलब्धता, कचरे का उचित निपटान तथा प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग पर रोक जैसे पहलुओं की भी जांच की जाएगी।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष जोर

दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। निरीक्षण के दौरान अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग आवागमन मार्ग, पार्किंग व्यवस्था और पर्याप्त रोशनी की स्थिति का आकलन किया जाएगा।

इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की भी जांच होगी। इन उपायों के माध्यम से पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाने तथा संभावित अव्यवस्थाओं को कम करने पर जोर दिया जाएगा।

स्वच्छता और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था को मिलेगा प्रोत्साहन

नगर निगम की इस पहल में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को भी प्रमुखता दी गई है। पूजा समितियों से अपेक्षा की गई है कि वे पंडाल परिसर को साफ रखें, कचरे का उचित निपटान करें और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को अपनाएं। सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने और प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग से बचने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

झांकी की रचनात्मकता और पंडाल की सजावट के साथ-साथ व्यवस्थित परिसर, स्वच्छ वातावरण और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता भी मूल्यांकन में महत्वपूर्ण रहेगी। प्रतियोगिता के माध्यम से पूजा समितियों के बीच बेहतर व्यवस्थाएं अपनाने के लिए सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

महापौर ने पूजा समितियों से की अपील

महापौर अलका बाघमार ने सभी दुर्गा पूजा समितियों से अपील की है कि वे अपने पंडालों और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कचरे को निर्धारित स्थान पर डालने, पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने तथा सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक नियमों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य दुर्गा पूजा के दौरान शहर में स्वच्छता, सुरक्षा और सुव्यवस्था को बढ़ावा देना है। पंडालों के निरीक्षण और मूल्यांकन के जरिए समितियों को बेहतर प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जाएगा, वहीं उत्कृष्ट व्यवस्था करने वाली समितियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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