एमजीएम स्कूल में गूंजा ‘हर घर स्वदेशी, हर युवा उद्यमी’ का संदेश…
उद्यमिता प्रोत्साहन कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद, वक्ताओं ने कौशल, नवाचार और स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देने पर दिया जोर

भिलाई। एमजीएम स्कूल सेक्टर-6 में विद्यार्थियों के बीच स्वदेशी, स्वावलंबन और उद्यमिता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्वावलंबी भारत अभियान एवं भिलाई चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के तत्वावधान में आयोजित इस उद्यमिता प्रोत्साहन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भविष्य में रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान “हर घर स्वदेशी, हर युवा उद्यमी” का संदेश विद्यार्थियों तक पहुंचाया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश महामंत्री अजय भसीन ने विद्यार्थियों से कहा कि “यही समय है—सही समय है। आइए, मिलकर भारत को समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर बनाएं।” उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत व्यक्ति के अपने संकल्प से होती है। विद्यार्थियों से उन्होंने अपने घरों में अधिक से अधिक देश में निर्मित उत्पादों को अपनाने और स्वदेशी वस्तुओं के प्रति जागरूकता विकसित करने का आह्वान किया।
अजय भसीन ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ उद्यमिता और व्यवसाय की दुनिया को समझने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी पढ़ाई के साथ काम करना चाहते हैं, उनके लिए इंटर्नशिप के माध्यम से कार्य के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा और कौशल को केवल नौकरी तक सीमित न रखते हुए उसे व्यवसाय और रोजगार के अवसरों में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी “पढ़ते-पढ़ते उद्यम और व्यवसाय से जुड़ें” और व्यावहारिक अनुभव हासिल करें। उनके अनुसार, शिक्षा के साथ कौशल और कार्य अनुभव युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है।
पास आउट विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में एमजीएम स्कूल से पास आउट विद्यार्थी और वर्तमान में उद्यमी के रूप में कार्य कर रहे हेमंत अरोरा ने भी विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाले के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य में रोजगार देने वाले उद्यमी के रूप में तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
एमजीएम के पूर्व विद्यार्थी अनिल जेठानी ने अपने संघर्ष और अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत की बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। उन्होंने युवाओं के कौशल, नवाचार और उद्यमिता को सही दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के साथ-साथ स्थानीय उद्यमियों और व्यवसायों को प्रोत्साहित करने की अपील की।
संघर्ष और सफलता की कहानियों से विद्यार्थियों को मिली प्रेरणा
कार्यक्रम में पूर्णिमा जी और सरोजिनी पाणिग्रही जी के संघर्ष, मेहनत और उद्यमिता के माध्यम से सफल व्यवसाय खड़ा करने के उदाहरण भी विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किए गए। उनके जीवन संघर्ष और सफलता की यात्रा के जरिए विद्यार्थियों को बताया गया कि सही सोच, कौशल, मेहनत और निरंतर प्रयास के माध्यम से अपने लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों के सामने अपने अनुभव रखते हुए यह समझाने का प्रयास किया कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ व्यावहारिक कौशल, नए विचार, मेहनत और अवसरों को पहचानने की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विशेष अतिथियों ने भी साझा किए जीवन के अनुभव
कार्यक्रम का संचालन सुनील मिश्रा ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उद्यमिता और स्वावलंबन से जुड़े विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में राजीव नायक, सलज जेम्स, मोहन राव, कोमल जैन और राजेश तिवारी भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने अपने जीवन संघर्ष और अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि युवा अपनी शिक्षा और कौशल का उपयोग नए अवसरों के निर्माण के लिए कर सकते हैं। साथ ही स्थानीय उत्पादों, व्यवसायों और उद्यमियों को प्रोत्साहन देकर स्वावलंबन की दिशा में योगदान देने की बात भी कही गई।
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