बहतराई में तीजा की धूम, लोकसंस्कृति के रंग में रंगा बिलासपुर…
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बहनों के साथ मनाया पर्व, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और ‘रामदेवरी’ नामकरण समेत कई घोषणाओं ने बढ़ाया उत्साह

बिलासपुर | तीजा तिहार के उल्लास और छत्तीसगढ़ी लोकपरंपराओं की खुशबू से रविवार को बहतराई स्टेडियम सराबोर नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं और बहनों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पर्व की खुशियां साझा कीं। गीत-संगीत, झूले, मेहंदी और पारंपरिक रंगों से सजे आयोजन ने पूरे परिसर को उत्सवी माहौल में बदल दिया।
मुख्यमंत्री साय ने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी बहनों के सुख, समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करते हुए तीजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें महिलाओं की आस्था, प्रेम और परिवार की खुशहाली की भावना जुड़ी हुई है।
तीजा से मजबूत होते हैं पारिवारिक रिश्ते
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विवाहित बेटियों के मायके आने और परिवार के साथ तीजा मनाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे पारंपरिक पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में आत्मीयता बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी हैं।
13.85 लाख से ज्यादा महिलाएं बनीं लखपति दीदी
महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं अब सरकारी योजनाओं की लाभार्थी भर नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की सक्रिय भागीदार बन रही हैं।
उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अलग-अलग आजीविका गतिविधियों के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ड्रोन दीदियां आधुनिक तकनीक के जरिए स्वरोजगार से जुड़कर प्रतिदिन करीब 6 से 7 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। इसके अलावा महिलाएं सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, ई-रिक्शा संचालन और अन्य उद्यमों से भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
महतारी वंदन योजना का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। छत्तीसगढ़ में 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना के माध्यम से नियमित आर्थिक सहायता दी जा रही है। योजना की अब तक 31 किश्तों का भुगतान किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।
उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों के फैसले लेने में सक्षम बनाने के साथ परिवार में उनकी भूमिका को और मजबूत कर रही है।
2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रदेश है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और सुविधाएं गांवों तथा लोगों के घरों के नजदीक उपलब्ध हों।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना सरकार का संकल्प है। इस लक्ष्य को हासिल करने में मातृशक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
चोरहादेवरी अब कहलाएगा ‘रामदेवरी’
तीजा मिलन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को कई महत्वपूर्ण सौगातें भी दीं। उन्होंने बिल्हा विकासखंड के चोरहादेवरी गांव का नाम बदलकर ‘रामदेवरी’ किए जाने की घोषणा की।
इसके साथ ही माघी पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा की गई। दोनों घोषणाओं का कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उत्साह के साथ स्वागत किया।
अरुण साव बोले—परंपरा और सामाजिक जुड़ाव का पर्व है तीजा
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तीजा को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह माताओं और बहनों की आस्था, प्रेम तथा पारिवारिक समर्पण का प्रतीक है।
उन्होंने कमल सखी परिवार की ओर से आयोजित तीजा मिलन कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोकसंस्कृति को जीवंत रखने के साथ समाज में आपसी जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, सशक्तीकरण और विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की माटी से गहराई से जुड़ा पर्व है, जिसमें महिलाओं की आस्था, त्याग और पारिवारिक प्रेम की झलक दिखाई देती है।
झूले, मेहंदी और गीत-संगीत ने बढ़ाई रौनक
बहतराई स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और नारी शक्ति का आकर्षक संगम देखने को मिला। महिलाओं के लिए झूले, मेहंदी और मनोरंजन की विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।
भोजन और उपहार की व्यवस्था के साथ बच्चों के लिए भी अलग-अलग गतिविधियां रखी गईं। पारंपरिक परिधानों में पहुंचीं महिलाओं, गीत-संगीत और उत्सवी माहौल ने आयोजन को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, भावना बोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष राजा पांडे, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, संभागायुक्त सुनील जैन, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।
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