bhilai-steel-planteducationknowledgelifestyleकैरियरछत्तीसगढ़दुर्गभिलाई

तरंग 3.0 : जब नेतृत्व की सोच बदली, तो बदलाव का असर काम करने के तरीके पर भी दिखा…

SAIL की तरंग 3.0 पहल ने भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों की नेतृत्व शैली में सकारात्मक बदलाव लाया। टीम सशक्तिकरण, रणनीतिक सोच, डेटा आधारित निर्णय और स्थायी सुधार पर बढ़ा फोकस

भिलाई । किसी संगठन की वास्तविक ताकत केवल तकनीक, प्रक्रियाओं और संसाधनों से नहीं, बल्कि उन लोगों की क्षमता और नेतृत्व दृष्टिकोण से बनती है, जो इन संसाधनों को परिणामों में बदलते हैं। इसी सोच के साथ SAIL की तरंग 3.0 पहल ने भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों को अपनी नेतृत्व शैली को नए दृष्टिकोण से देखने और उसे निरंतर बेहतर बनाने का अवसर दिया है।

तरंग 3.0 : जब नेतृत्व की सोच बदली, तो बदलाव का असर काम करने के तरीके पर भी दिखा...

तरंग 3.0 की यात्रा ने इन अधिकारियों की नेतृत्व सोच में एक उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। जहां पहले नेतृत्व मुख्यतः अपनी विशेषज्ञता के आधार पर निर्णय लेने, समस्याओं का समाधान स्वयं करने और परिणाम सुनिश्चित करने तक सीमित था, वहीं अब नेतृत्व की परिभाषा अधिक व्यापक हो गई है। अब इसमें लोगों को सक्षम बनाना, टीम में स्वामित्व की भावना विकसित करना, बेहतर सवालों के माध्यम से समाधान तलाशना, विभिन्न कार्यक्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करना और ऐसे समाधान एवं प्रणालियां विकसित करना शामिल है, जो दीर्घकालिक और टिकाऊ परिणाम दे सकें।

तरंग 3.0 : जब नेतृत्व की सोच बदली, तो बदलाव का असर काम करने के तरीके पर भी दिखा...

यह परिवर्तन केवल नेतृत्व के बारे में सोच बदलने तक सीमित नहीं है। इसका असर उनके काम करने के तरीके में भी दिखाई देता है। तत्काल समस्या के समाधान से आगे बढ़कर root cause पर ध्यान, व्यक्तिगत प्रयास से सामूहिक क्षमता निर्माण की ओर बढ़ना और मौजूदा प्रक्रियाओं को केवल संचालित करने के बजाय उन्हें बेहतर बनाने की पहल—तरंग 3.0 से उपजे इस बदलाव की कहानी को रेखांकित करते हैं।

तरंग 3.0 को एक क्रमबद्ध और अनुभव-आधारित नेतृत्व विकास यात्रा के रूप में तैयार किया गया था। इस यात्रा में प्रतिभागियों ने आत्म-मूल्यांकन व व्यक्तित्व एवं नेतृत्व क्षमता के आकलन से शुरुआत करते हुए नेतृत्व कार्यशालाओं, समूह एवं व्यक्तिगत कोचिंग, एक्शन लर्निंग प्रोजेक्ट्स, समस्या-समाधान एवं डिजाइन थिंकिंग, रणनीतिक सोच, डेटा आधारित निर्णय-निर्माण, व्यावसायिक एवं वित्तीय समझ तथा अनुभवात्मक अधिगम जैसे विभिन्न चरणों से गुजरते हुए अपने नेतृत्व कौशल को विकसित किया। इस सतत सीखने और आत्मचिंतन की प्रक्रिया ने उन्हें अपनी कार्यशैली, निर्णय लेने के तरीके और नेतृत्व की भूमिका को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर दिया।

तरंग 3.0 : जब नेतृत्व की सोच बदली, तो बदलाव का असर काम करने के तरीके पर भी दिखा...तरंग 3.0 : जब नेतृत्व की सोच बदली, तो बदलाव का असर काम करने के तरीके पर भी दिखा...

भिलाई स्टील प्लांट के पीबीएस विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक श्री राजुल पाण्डेय के लिए तरंग 3.0 ने नेतृत्व को देखने का नजरिया ही बदल दिया। पहले उनका मानना था कि एक लीडर की भूमिका सही निर्णय लेने और कठिन परिस्थितियों में समाधान प्रस्तुत करने तक है। इस यात्रा के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि प्रभावी नेतृत्व का वास्तविक अर्थ हर सवाल का जवाब अपने पास रखना नहीं, बल्कि दूसरों की क्षमताओं पर भरोसा करना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है। अब वे निर्णय लेने से पहले सुनने, सही प्रश्नों के माध्यम से सोच को दिशा देने और टीम में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने को अधिक महत्व देते हैं। उनके लिए नेतृत्व की सबसे बड़ी उपलब्धि वह क्षमता है, जो किसी व्यक्ति के साथ काम करते हुए उसके भीतर विकसित होती है और उसके बाद भी संगठन के काम आती रहती है।

ईएमडी विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक श्री अनु पी. के लिए भी तरंग 3.0 एक नए दृष्टिकोण की शुरुआत रही। पहले उनका ध्यान सामने आई समस्या का त्वरित समाधान करने और अपनी विशेषज्ञता के आधार पर उसे प्रभावी ढंग से पूरा करने पर अधिक रहता था। तरंग की यात्रा के साथ उनकी सोच अपने कार्यक्षेत्र से आगे बढ़कर व्यापक संगठनात्मक परिप्रेक्ष्य और उसके दीर्घकालिक प्रभाव को देखने की ओर विकसित हुई। अब वे किसी समाधान की सफलता को केवल तत्काल परिणाम से नहीं, बल्कि उसकी व्यापक उपयोगिता और स्थायित्व से जोड़कर देखते हैं। विचारों को ठोस और मापनीय सुधारों में बदलना, सहयोग के माध्यम से बेहतर परिणाम हासिल करना और प्रौद्योगिकी का उपयोग कर निर्णय प्रक्रिया को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाना उनकी बदली हुई नेतृत्व दृष्टि का हिस्सा बन गया है।

इस बदलाव का एक पहलू भिलाई स्टील प्लांट के पावर सिस्टम्स विभाग की वरिष्ठ प्रबंधक सुश्री स्वाति सिंह की यात्रा में भी दिखाई देता है। उनके लिए नेतृत्व पहले जिम्मेदारी लेने, सही निर्णय करने, समस्याओं को स्वयं सुलझाने और कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने से जुड़ा था। तरंग 3.0 के अनुभव ने इस सोच को एक नया विस्तार दिया। उन्होंने महसूस किया कि नेतृत्व की प्रभावशीलता केवल समस्याओं के समाधान में नहीं, बल्कि ऐसी टीम बनाने में है जहां लोग स्वयं जिम्मेदारी लें, अपनी बात खुलकर रख सकें और चुनौतियों का सामना मिलकर कर सकें। आज वे लोगों को ध्यान से सुनने, उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करने और उनकी क्षमताओं को उभारने को अपने नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनके लिए एक चुनौती का स्वयं समाधान कर देना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है टीम को इस योग्य बनाना कि वह अगली चुनौती का सामना अधिक आत्मविश्वास और सामूहिकता के साथ कर सके।

वरिष्ठ प्रबंधक (एसएमएस 3) श्री लोकेश प्रसाद मोगरे अपनी इस यात्रा को तीन चरणों में देखते हैं—पहले समस्याओं का समाधान करने वाले, फिर पूरी व्यवस्था को समझने वाले और अब टीम की क्षमता बढ़ाने वाले लीडर के रूप में। पहले उनका मानना था कि एक लीडर को हर सवाल का जवाब पता होना चाहिए, कठिन समस्याओं को खुद हल करना चाहिए और काम को करीब से देखते हुए पूरा करवाना चाहिए। अब वे मानते हैं कि नेतृत्व का मतलब हर समस्या को खुद हल करना नहीं, बल्कि सही सवाल पूछना, टीम को जिम्मेदारी देना और ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिससे वही समस्या बार-बार न आए। साथ ही, सुरक्षा और कामकाज से जुड़े फैसलों को कारोबार, लागत और भविष्य की जरूरतों से जोड़कर देखना भी उनकी नेतृत्व सोच का हिस्सा बन गया है।

तरंग 3.0 का प्रभाव एचआर-एलएंडडी के क्षेत्र में भी प्रक्रियाओं को देखने और उनमें सुधार लाने के तरीके में दिखाई देता है। उप प्रबंधक(एचआर-एलएंडडी) सुश्री सुष्मिता पाटला के लिए इस यात्रा ने केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से लागू करने के बजाय उनके मूल कारणों को समझने और उनमें बदलाव लाने की सोच विकसित की। इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रशिक्षुओं की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने का अनुभव रहा। इस पहल के दौरान उन्होंने एचआर-एलएंडडी, सी एंड आईटी, वित्त और संबंधित विभागों को एक साझा उद्देश्य के लिए साथ लाने तथा मिलकर जिम्मेदारी निभाने का अनुभव प्राप्त किया। इस प्रक्रिया ने आंकड़ों, मापनीय मानकों और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से स्थायी सुधार लाने की उनकी समझ को भी मजबूत किया।
इन अनुभवों को साथ रखकर देखें तो तरंग 3.0 ने सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों के नेतृत्व दृष्टिकोण में एक स्पष्ट और सकारात्मक बदलाव लाया है। इस पहल ने उन्हें नेतृत्व को केवल समस्याओं के समाधान और परिणाम हासिल करने तक सीमित न रखकर, टीम को सक्षम बनाने, व्यापक प्रभाव को समझने और स्थायी सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र की इस पहल ने “मैं” से “हम” की ओर बढ़ने की सोच को मजबूत किया है। स्वयं हर समस्या का समाधान करने के बजाय टीम को जिम्मेदारी देना, सही सवालों के माध्यम से नए समाधान तलाशना और मिलकर बेहतर परिणाम हासिल करना अब नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
तरंग 3.0 की इन अनुभव-कथाओं में सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र की निरंतर सीखने और नेतृत्व विकास की संस्कृति की झलक भी मिलती है। व्यक्तिगत प्रयास से सामूहिक क्षमता और तत्काल समाधान से स्थायी सुधार की ओर बढ़ता यह बदलाव न केवल इन अधिकारियों के नेतृत्व को मजबूत कर रहा है, बल्कि टीमों और संगठन की क्षमता को भी नई दिशा दे रहा है।

 

संपूर्ण खबरों के लिए क्लिक करे      https://jantakikalam.com

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button