
भिलाई। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने कार्बन उत्सर्जन में कमी और डी-कार्बोनाइजेशन के प्रयासों को गति देने की दिशा में एक अहम पहल की है। 18 अगस्त 2026 को बीएसपी एवं चंद्रपुर फेरो एलॉय प्लांट (सीएफपी), चंद्रपुर के लिए CO₂ डैशबोर्ड का शुभारंभ किया गया। इसका उद्घाटन भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी चित्तरंजन महापात्र ने किया।

कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) राकेश कुमार, कार्यपालक निदेशक (सीएफपी चंद्रपुर) पी. मुरुगेसन, कार्यपालक निदेशक (ईएमडी, कोलकाता) राजीव पांडेय सहित बीएसपी, सीएफपी एवं ईएमडी-कोलकाता के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने डिजिटल कार्बन प्रबंधन की दिशा में इस नई पहल की उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।
हर दिन दिखेगी कार्बन की तस्वीर
CO₂ डैशबोर्ड को ईएमडी, कोलकाता द्वारा नियुक्त कंसल्टेंट मेसर्स सेंट्रा वर्ल्ड के सहयोग से विकसित किया गया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म संयंत्र और विभिन्न शॉप स्तरों पर CO₂ उत्सर्जन की दैनिक निगरानी, विश्लेषण और प्रबंधन को आसान बनाएगा।
डैशबोर्ड के जरिए उत्सर्जन की समग्र स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी और किसी भी असामान्यता की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। इससे प्रक्रिया दक्षता बढ़ाने के साथ कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्षित प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम में मेसर्स सेंट्रा वर्ल्ड के इंजीनियरों ने डैशबोर्ड की प्रमुख विशेषताओं और कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया। शॉपवार उत्सर्जन की निगरानी और डेटा विश्लेषण के माध्यम से उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों तथा सुधार की संभावनाओं को चिन्हित करने में सहायता मिलेगी।
यह प्रणाली वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (WSA) पद्धति, GHG प्रोटोकॉल और कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) सहित विभिन्न मानकों के अनुरूप उत्सर्जन आकलन की सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही नियामकीय और रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करने में भी यह उपयोगी साबित होगी।
कार्बन बाजार की तैयारियों को भी मिलेगा बल
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के संदर्भ में भी इस डिजिटल प्रणाली की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत में विकसित हो रहे कार्बन बाजार तंत्र के तहत निर्धारित उत्सर्जन-तीव्रता लक्ष्यों की दिशा में प्रदर्शन को ट्रैक करने में डैशबोर्ड उपयोगी रहेगा।
उत्पाद और शॉप स्तर पर उपलब्ध उत्सर्जन डेटा से डी-कार्बोनाइजेशन के अवसरों की पहचान, लक्षित सुधारात्मक उपायों की योजना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सेल के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के CBAM के संभावित वित्तीय प्रभावों के आकलन में भी यह प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दैनिक परिचालन का हिस्सा बने कार्बन प्रबंधन
निदेशक प्रभारी, बीएसपी चित्तरंजन महापात्र ने कहा कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी केवल नियामकीय आवश्यकता नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विभागों और उत्पादन शॉप्स से हरित एवं ऊर्जा-दक्ष पहलों को सक्रिय रूप से अपनाने तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी को दैनिक परिचालन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) राकेश कुमार ने कहा कि निरंतर कार्बन कमी के लिए तकनीकी मानकों, प्रक्रिया अनुशासन और गुणवत्ता मानदंडों का कड़ाई से पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रक्रिया दक्षता से उत्पादकता बढ़ने के साथ उत्पादन लागत और कार्बन उत्सर्जन दोनों को कम किया जा सकता है।
उन्होंने डैशबोर्ड की संकल्पना और क्रियान्वयन में पर्यावरण प्रबंधन विभाग, बीएसपी एवं सीएफपी की टास्क फोर्स, ईएमडी-कोलकाता तथा मेसर्स सेंट्रा वर्ल्ड के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
सही डेटा से सही समय पर सही फैसला
कार्यपालक निदेशक (सीएफपी चंद्रपुर) पी. मुरुगेसन ने पहल की सराहना करते हुए कहा कि शॉप और प्रक्रिया स्तर पर CO₂ उत्सर्जन की प्रभावी निगरानी से प्रमुख उत्सर्जन स्रोतों तथा सुधार के संभावित क्षेत्रों की पहचान आसान होगी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध डेटा का प्रभावी उपयोग कर अधिक सटीक और लक्षित निर्णय लिए जा सकेंगे।
कार्यपालक निदेशक (ईएमडी, कोलकाता) राजीव पांडेय ने विश्वसनीय और समयबद्ध डेटा को प्रभावी डी-कार्बोनाइजेशन की आधारशिला बताया। उन्होंने CO₂ डैशबोर्ड को डेटा-आधारित कार्बन प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से मानकीकृत डेटा, पारदर्शिता और समयबद्ध प्रबंधन हस्तक्षेप को बढ़ावा मिलेगा।
अजंता सेनगुप्ता ने पहल की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि CO₂ डैशबोर्ड की संकल्पना सेल अध्यक्ष के उस दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें शीर्ष प्रबंधन के लिए सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने की परिकल्पना की गई थी। इसका उद्देश्य दैनिक उत्सर्जन की स्थिति को समझने, निगरानी करने और कमी के लिए समयबद्ध निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है।
उन्होंने इस पहल को मूर्त रूप देने में ईएमडी-कोलकाता, बीएसपी के पर्यावरण प्रबंधन विभाग, बीएसपी एवं सीएफपी की टास्क फोर्स और मेसर्स सेंट्रा वर्ल्ड के सहयोगात्मक प्रयासों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संचालन महाप्रबंधक (पर्यावरण प्रबंधन) के. प्रवीण ने किया। उन्होंने CO₂ डैशबोर्ड को साकार करने में योगदान देने वाले सभी विभागों और एजेंसियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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