दुधारू पशुओं में नस्ल सुधार कर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करें – कमिश्नर शीलेंद्र सिंह

रीवा संभाग कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने बुधवार को कमिश्नर कार्यालय के वीसी कक्ष में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह पशुओं में अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार करें।
कमिश्नर ने कहा कि हर ग्राम पंचायत में दुग्ध समितियां बनाई जाएं। इन समितियों के माध्यम से किसानों को पशुओं का पालन करने एवं उनसे दूध उत्पादन प्राप्त कर आर्थिक रूप से अपने जीवन स्तर में सुधार करने के लिए प्रेरित करें। कमिश्नर ने कहा कि पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान में भी शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की जाए।
इसके लिए उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान केंद्र एवं कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भिजवाने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान से पशुओं की नस्ल में व्यापक स्तर पर सुधार होगा एवं दूध उत्पादन में भी वृद्धि होगी। कमिश्नर ने सभी शासकीय गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के निर्देश दिए और कहा कि सभी गौशालाएं कामर्शियल रूप से मजबूत रहें।
गौशाला किसी पर निर्भर न रहे, अपितु वह गो ग्रास वर्मी कंपोस्ट, दूध उत्पादन एवं कंडे बनाकर आर्थिक रूप से सक्षम बनें। कमिश्नर ने पशुपालन विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह पशुओं को मुख एवं खुरी रोग से बचाने हेतु पशुओं में एफएमडी का टीकाकरण 31 अगस्त तक शत प्रतिशत करना सुनिश्चित करें।
कमिश्नर ने बैठक में रीवा संभाग के सभी जिलों में वर्तमान में संचालित मिल्क रुट की समीक्षा की , साथ ही प्रस्तावित मिल्क रुट एवं अक्रियाशील मिल्क रुट को पुनः क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए, साथ ही उन्होंने सहकारी दुग्ध संघ द्वारा वर्तमान में संचालित चिलिंग केंद्र एवं दुग्ध संकलन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।
कमिश्नर ने निर्देश दिए की शेष रह गई सभी ग्राम पंचायतो में जल्द से जल्द दुग्ध समितियों का गठन कर लिया जाए। कमिश्नर ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना एवं आचार्य विद्यासागर योजना में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की। कमिश्नर ने क्षीरधारा ग्राम योजना एवं अन्य छह प्रकार की शासकीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए योजनाओं से संबंधित बैनर एवं होर्डिंग सभी ग्राम पंचायत भवनों में लगाने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि संभाग में दुग्ध संघ द्वारा कुल 158 दुग्ध समितियों से 19 मिल्क रूटों में 8 हजार लीटर दूध का संग्रहण किया जाता है। कमिश्नर ने निर्देश दिए की दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले किसानों को पशुपालन करने एवं पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाए।
इससे दूध उत्पादन में वृद्धि होगी। पशु चिकित्सा अधिकारी किसानों के बीच जाकर उन्हें दूध उत्पादन में वृद्धि के लिए प्रेरित करें तथा दूध से होने वाले आर्थिक लाभ के बारे में बताएं। इससे किसानों के जीवन स्तर में भी व्यापक स्तर पर सुधार होगा। किसान खेती के साथ पशुपालन कर अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं।
बताया गया कि दुग्ध समितियों द्वारा रीवा में 1600 किलो, सतना में 900 किलो, मऊगंज में 1000 किलो, सीधी में 550 किलो, सिंगरौली में 2900 किलो तथा मैहर में 1450 किलो दूध का संग्रहण किया जा रहा है। कमिश्नर ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान में संग्रहित दूध का प्रोडक्शन दुगना किया जाए और नए मिल्क रूट डेवलप किए जाएं।
कमिश्नर ने निर्देश दिए कि जिन गांवों में दुग्ध उत्पादन ज्यादा होता है लेकिन अभी तक वहां पर दुग्ध समितियों का गठन नहीं हुआ है तो उन ग्रामों में प्राथमिकता से समितियों का गठन कर रुट तय कर दिया जाए। कमिश्नर ने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र का सर्वे कर लें कि कितने किसान पशुपालन करते हैं, कितने किसान घरेलू उपयोग के लिए पशु रखते हैं एवं कितने किसान कॉमर्शियल उद्देश्य से पशुपालन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे सभी किसानों की लिस्ट बनाकर उन सबको दूध उत्पादन के लिए प्रेरित किया जाए। कमिश्नर ने कहा कि दूध उत्पादन से स्थानीय युवाओं को भी रोजगार की प्राप्ति होगी और क्षेत्र में पलायन भी रुकेगा। उन्होंने सभी अधिकारियों को तीव्र गति से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने क्षीरधारा योजना, डॉ भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, आचार्य विद्यासागर योजना के संबंध में अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी।
बताया गया कि रीवा संभाग में 332 सहायक पशु क्षेत्र अधिकारी एवं पशु चिकित्सा अधिकारी संलग्न हैं। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि यह सभी अधिकारी अपने-अपने आवंटित क्षेत्र में एक-एक दुग्ध उत्पादन समिति अनिवार्य रूप से गठित करें। कमिश्नर ने कहा कि लगभग 332 समितियों का गठन शीघ्र ही किया जाए।
कमिश्नर ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी, पशु नस्ल में सुधार, कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने तथा पशुपालन को बढ़ावा देने के दिशा में व्यापक रूप से कार्य करें। कमिश्नर ने कहा कि जब गांव में दुग्ध समितियां बनेंगी तो गांव में पशुधन में भी वृद्धि होगी और उससे दूध उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
पशु नस्ल सुधार की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान के तहत लक्षित पशुओं में उन्नत नस्ल के सीमन एवं सेक्स सार्टेड सीमन का उपयोग कर उन्नत नस्ल के पशुओं की उत्पत्ति की जा रही है। बैठक में संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र पटेल, डिप्टी कमिश्नर श्रीमती दिव्या त्रिपाठी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित जबलपुर, संयुक्त संचालक पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधक डेयरी संयंत्र रीवा एवं पशुपालन विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित रहे।




