ईश्वर और जीव के मिलन का नाम है रास: भिलाई में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भव्य समापन, पुष्प होली ने बांधा समां…
3 से 9 अक्टूबर तक भक्ति की रसधारा में डूबा भिलाई, स्वामी रामललाचार्य महाराज ने सुनाई श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथा; आई.पी. मिश्रा ने दी भावभीनी विदाई

भिलाई । भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन भिलाई में 3 से 9 अक्टूबर 2026 तक भव्यता के साथ संपन्न हुआ। श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति आई.पी. मिश्रा द्वारा आयोजित इस सात दिवसीय कथा में पूज्य स्वामी रामललाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, रास पंचाध्यायी और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। समापन अवसर पर ठाकुर जी की भव्य पुष्प होली आयोजित हुई, वहीं कथा पूर्ण होने के बाद पूज्य महाराज श्री को भावभीनी विदाई दी गई।

ईश्वर और जीव के मिलन का नाम है रास
कथा के षष्ठम दिवस पर पूज्य स्वामी रामललाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए रास पंचाध्यायी की आध्यात्मिक महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि ईश्वर और जीव के मिलन का नाम ही रास है। प्रत्येक जीव में परमात्मा का अंश विद्यमान है। मनुष्य को अपने अहंकार का त्याग कर स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।

महाराज श्री ने कहा कि जब जीव पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान की शरण में जाता है, तब प्रभु स्वयं उसकी चिंता करते हैं। जीवन में भगवान के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए। अहंकार छोड़कर प्रभु के चरणों में समर्पित होने से मनुष्य के भीतर प्रेम, श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत होता है।
श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव में भक्तों ने लिया आनंद
श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस का प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन रहा। कथा पंडाल में विवाहोत्सव के दौरान मंगलगीत, जयघोष और भक्ति का वातावरण छा गया। श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह के साथ ठाकुर जी के विवाहोत्सव के दर्शन किए।

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और रुक्मिणी विवाह की कथा ने भक्तों को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया। आयोजन में श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली।
श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय, श्रीकृष्ण का चरित्र मननीय
कथा के विश्राम दिवस पर पूज्य महाराज श्री ने अनेक धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से जीवन में भक्ति और सदाचार का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान के समान उदार कोई नहीं है। भगवान श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र मननीय है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन का प्रत्येक क्षण ठाकुर जी की कृपा है। संसार के कार्यों का निर्वहन करते हुए भी हृदय में भगवान का स्मरण और भगवत् भजन बना रहना चाहिए। यही जीवन की वास्तविक सार्थकता है।
महाराज श्री के इन विचारों ने श्रद्धालुओं को दैनिक जीवन में आध्यात्मिकता अपनाने, प्रभु के प्रति विश्वास बनाए रखने और अपने आचरण में सद्गुणों को स्थान देने की प्रेरणा दी।
भव्य पुष्प होली के साथ संपन्न हुआ कथा महोत्सव
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के समापन के पश्चात ठाकुर जी की भव्य पुष्प होली आयोजित की गई। पुष्पों के बीच भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालुओं ने उत्सव में भाग लिया और ठाकुर जी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।

इस अवसर पर अनेक गुरु भाइयों और भक्तों ने पूज्य महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के समापन ने सात दिनों तक चले आध्यात्मिक आयोजन को भावपूर्ण विराम दिया।
शंकराचार्य समूह के शैक्षणिक संस्थानों का किया भ्रमण
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति आई.पी. मिश्रा ने पूज्य महाराज श्री को अपने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण कराया।

इस दौरान पूज्य स्वामी रामललाचार्य महाराज ने श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, श्री शंकराचार्य इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, अभिषेक आई.पी. मिश्रा मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और श्री शंकराचार्य नर्सिंग महाविद्यालय की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने परिसर में स्थित दिव्य मंदिरों के दर्शन भी किए।
शिक्षा और जनहित के कार्यों की महाराज श्री ने की सराहना
शैक्षणिक संस्थानों की व्यवस्थाओं और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को देखकर पूज्य गुरुदेव भगवान ने आई.पी. मिश्रा की सराहना की। उन्होंने कहा, “आपने शिक्षा जगत और जनहित के लिए बहुत बड़ा कार्य किया है। आपके जीवन में गुरु-कृपा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।”
महाराज श्री के इन शब्दों ने इस मुलाकात को विशेष भावनात्मक आयाम दिया। धार्मिक आयोजन के साथ शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण शिक्षा और जनहित के कार्यों के प्रति सम्मान का अवसर भी बना।
नम आंखों से दी विदाई, श्री मानसपीठ खजुरीताल के लिए हुए रवाना
भिलाई में कथा आयोजन और शैक्षणिक संस्थानों के भ्रमण के बाद पूज्य महाराज श्री ने श्री मानसपीठ खजुरीताल के लिए प्रस्थान किया। विदाई के समय कुलाधिपति आई.पी. मिश्रा भावुक हो उठे। उन्होंने नम आंखों से पूज्य महाराज श्री के श्रीचरणों में प्रणाम कर उन्हें भावभीनी विदाई दी।

इस भावुक क्षण ने कथा आयोजन से जुड़े श्रद्धा और आत्मीयता के संबंधों को भी अभिव्यक्त किया। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन धार्मिक अनुष्ठानों, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव, पुष्प होली और आध्यात्मिक संदेशों के साथ हुआ।
श्रद्धा, समर्पण और प्रभु स्मरण का संदेश
भिलाई में 3 से 9 अक्टूबर तक आयोजित इस श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं के साथ जीवन में भक्ति और समर्पण का महत्व समझने का अवसर मिला। पूज्य स्वामी रामललाचार्य महाराज के प्रवचनों का केंद्रीय संदेश यही रहा कि मनुष्य को अहंकार त्यागकर ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए और संसार के कार्य करते हुए भी हृदय में प्रभु का स्मरण बनाए रखना चाहिए।
कथा का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति और भक्ति से जुड़ने का अवसर बना।
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