आईआईटी भिलाई में कलाकारों के लिए नई उड़ान, 3 महीने का आवासीय कार्यक्रम शुरू…
CCLT-NTPC पहल से छत्तीसगढ़ की लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा संरक्षण का मंच

भिलाई। आईआईटी भिलाई द्वारा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षण देने तथा कलाकारों को रचनात्मक कार्य के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। आईआईटी भिलाई के सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑन कल्चर, लैंग्वेज एंड ट्रेडिशन्स (CCLT) द्वारा नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) के वित्तीय सहयोग से विशेष Artist Residency Program आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की एक विशेष पहल है, जिसके माध्यम से कलाकारों को कुछ समय के लिए एक ऐसे वातावरण में काम करने का अवसर मिलेगा, जहां वे रोजमर्रा की व्यस्तताओं से अलग अपनी कला, परंपरा और रचनात्मक विचारों पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
इस आवासीय कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल कलाकारों को रहने और काम करने की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि पारंपरिक कला विधाओं को समझने, उन पर शोध करने, उनके दस्तावेज तैयार करने और बदलते समय के अनुरूप उनके संरक्षण के लिए नए विचार विकसित करने की दिशा में काम करना भी है। कार्यक्रम के दौरान चयनित कलाकार अपनी कला विधा से जुड़े अनुभवों, तकनीकों, पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ा सकेंगे। इससे कला और अकादमिक जगत के बीच संवाद का एक नया अवसर भी तैयार होने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में जनजातीय कला की अहम भूमिका
छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जीवंत और विविध सांस्कृतिक परंपराओं से होती है। राज्य के विभिन्न जनजातीय समुदायों के जीवन में संगीत, नृत्य, लोककथाएं, कहानी-कहने की परंपरा, हस्तशिल्प, पारंपरिक वाद्ययंत्र, आभूषण और पारंपरिक परिधान लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ये कलाएं केवल मनोरंजन या सजावट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से समुदायों का इतिहास, सामाजिक जीवन, प्रकृति के साथ संबंध, मान्यताएं और पीढ़ियों से चले आ रहे अनुभव एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचते हैं।
लोक एवं जनजातीय कला में स्थानीय समाज की जीवनशैली और उसके आसपास के प्राकृतिक परिवेश की भी स्पष्ट झलक दिखाई देती है। कई पारंपरिक कला विधाएं स्थानीय संसाधनों, पीढ़ियों से चले आ रहे कौशल और सामुदायिक ज्ञान पर आधारित हैं। ऐसे में इन कलाओं का संरक्षण केवल किसी कला शैली को बचाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक स्मृतियों को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।
बदलते समय में पारंपरिक कलाकारों के सामने बढ़ रही चुनौतियां
हाल के वर्षों में पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े कलाकारों तथा कारीगरों को अनेक व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आजीविका के सीमित अवसर, कला के लिए पर्याप्त और उचित पारिश्रमिक नहीं मिलना, कच्चे माल एवं आवश्यक सामग्री की उपलब्धता में कठिनाई और अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में आने वाली बाधाएं इनमें प्रमुख हैं। विशेष रूप से हस्तशिल्प क्षेत्र में काम करने वाले कलाकारों के लिए बाजार, विक्रेताओं और वितरकों तक सीधी पहुंच बनाना कई बार कठिन हो जाता है।
इसके अलावा बदलती जीवनशैली और रोजगार के नए विकल्पों के कारण युवा पीढ़ी का पारंपरिक कला विधाओं की ओर आकर्षण भी कम होता जा रहा है। यदि नई पीढ़ी इन कलाओं से दूर होती है तो पारंपरिक तकनीक और वर्षों से मौखिक रूप से हस्तांतरित होता आ रहा ज्ञान भी प्रभावित हो सकता है। संगीत वाद्ययंत्रों के निर्माण, पारंपरिक आभूषणों, वेशभूषा, लोककथाओं और विभिन्न हस्तशिल्प से जुड़े अनेक कौशल इसी चुनौती का सामना कर रहे हैं।
कलाकारों को मिलेगा शोध और सृजन के लिए अनुकूल वातावरण
CCLT-NTPC का यह आवासीय कार्यक्रम इसी व्यापक संदर्भ में कलाकारों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराने का प्रयास है, जहां वे अपनी कला पर बिना किसी व्यवधान के काम कर सकें। आईआईटी भिलाई परिसर में कलाकार को रहने के लिए आवास और रचनात्मक कार्य के लिए स्टूडियो उपलब्ध कराया जाएगा। इससे चयनित कलाकार को अपनी कला विधा पर केंद्रित होकर काम करने, नए प्रयोग करने और अपने कार्य का दस्तावेजीकरण करने के लिए आवश्यक वातावरण मिल सकेगा।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू कला के माध्यम से शोध को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत पारंपरिक कलाओं को केवल अतीत की विरासत के रूप में देखने के बजाय वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता को समझने और उनके लिए नए विचार विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे पारंपरिक कला और आधुनिक रचनात्मक दृष्टिकोण के बीच संवाद स्थापित करने का अवसर मिल सकता है।
प्रदर्शन कला और हस्तशिल्प से जुड़े कलाकार कर सकेंगे आवेदन
तीन महीने की इस आवासीय पहल के लिए छत्तीसगढ़ के एक कलाकार का चयन किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदर्शन कला तथा हस्तशिल्प के क्षेत्र में कार्य करने वाले कलाकार आवेदन कर सकते हैं। प्रदर्शन कला के अंतर्गत संगीत, नृत्य और नाट्य जैसी विधाओं में काम करने वाले कलाकारों को अवसर दिया जाएगा। वहीं हस्तशिल्प से जुड़े कलाकार भी इस कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकेंगे।
चयनित कलाकार को कार्यक्रम की अवधि के दौरान प्रत्येक महीने मानदेय प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही आईआईटी भिलाई परिसर में रहने के लिए आवास और कला पर काम करने के लिए स्टूडियो की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य कलाकार को एकाग्र होकर अपने रचनात्मक कार्य को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक आधार उपलब्ध कराना है।
पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में पहल
कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक कलाओं के प्रति वर्तमान समय में रुचि बढ़ाने के लिए नए विचार विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। बदलते डिजिटल और सामाजिक परिवेश में लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके दस्तावेजीकरण, अध्ययन और रचनात्मक प्रस्तुति की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे में कलाकारों को शोध और प्रयोग के लिए समय एवं संसाधन उपलब्ध कराना पारंपरिक कलाओं के संरक्षण की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
आईआईटी भिलाई जैसे तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थान में इस प्रकार की पहल कला, संस्कृति, शोध और शिक्षा के बीच संवाद का अवसर भी तैयार करती है। इससे पारंपरिक कला विधाओं से जुड़े अनुभवों और ज्ञान को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने तथा उन्हें व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की संभावनाएं बन सकती हैं।
31 अक्टूबर 2026 तक जमा कर सकते हैं आवेदन
इस Artist Residency Program में भाग लेने के इच्छुक कलाकार 31 अक्टूबर 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। कार्यक्रम, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य आवश्यक जानकारी CCLT, IIT Bhilai के आधिकारिक वेबपेज पर उपलब्ध कराई गई है। इच्छुक कलाकार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
यह पहल छत्तीसगढ़ की पारंपरिक एवं जनजातीय कला विधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी रचनात्मक यात्रा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अपनी कला के अध्ययन, दस्तावेजीकरण और संरक्षण की दिशा में काम करने का अवसर प्रदान करेगी। साथ ही, इस तरह की पहल राज्य की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और पारंपरिक ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में योगदान दे सकती है।
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