
दुर्ग। चौकी जेवरा सिरसा के अपराध क्रमांक 247/2025 में पुलिस की प्रभावी विवेचना और न्यायालयीन समन्वय के चलते अभियुक्तों को कठोर सजा मिली है। मामले में पुलिस द्वारा प्रारंभिक और अग्रिम विवेचना पूरी कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। प्रकरण में माननीय न्यायालय ने 5 सितंबर 2026 को अभियुक्तों को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया।
इस मामले में न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान समंस और वारंट की तामीली एवं वापसी तथा संबंधित सूचनाएं थाना और विवेचक तक समय पर पहुंचाने में उत्कृष्ट भूमिका निभाने वाले कोर्ट मुहर्रिर आरक्षक क्रमांक 307 खेमू राम साहू को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्रारंभिक जांच से लेकर कोर्ट तक पुलिस की प्रभावी पैरवी
चौकी जेवरा सिरसा, थाना पुलगांव के अपराध क्रमांक 247/2025 में धारा 296, 109 और 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना और आरोपियों की गिरफ्तारी तत्कालीन चौकी प्रभारी निरीक्षक प्रकाश कांत द्वारा की गई।
इसके बाद तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक खगेंद्र पठारे ने अग्रिम विवेचना पूरी करते हुए अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। पुलिस की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया में प्रभावी समन्वय के परिणामस्वरूप मामले में सजा सुनाई गई।
अभियुक्तों को दो धाराओं में मिली सजा
माननीय न्यायालय द्वारा 5 सितंबर 2026 को पारित निर्णय के अनुसार अभियुक्तों को धारा 109 सहपठित धारा 3(5) बीएनएस के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 1,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।
वहीं, धारा 296 बीएनएस के तहत 1 माह के साधारण कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई।
विवेचना में पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना और गिरफ्तारी में तत्कालीन चौकी प्रभारी निरीक्षक प्रकाश कांत की भूमिका रही, जो वर्तमान में रक्षित केंद्र दुर्ग में पदस्थ हैं। अग्रिम विवेचना पूरी कर न्यायालय में अभियोग पत्र पेश करने का कार्य तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक खगेंद्र पठारे ने किया, जो वर्तमान में थाना मोहन नगर में पदस्थ हैं।
विवेचना और गिरफ्तारी में हेड कांस्टेबल 1481 पुनेश साहू, कांस्टेबल 969 वसीम खान, कांस्टेबल 1256 महिपाल यादव, कांस्टेबल 1349 नरोत्तम साहू, कांस्टेबल 1612 श्याम सिंह और कांस्टेबल 235 रामेश्वर कोमा का भी सहयोग रहा।
समंस-वारंट की तामीली में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान
न्यायालय में पदस्थ कोर्ट मुहर्रिर आरक्षक क्रमांक 307 खेमू राम साहू ने अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान प्रकरण से संबंधित समंस एवं वारंट की तामीली और वापसी में तत्परता दिखाई। साथ ही न्यायालयीन कार्यवाही से संबंधित आवश्यक जानकारी थाना और विवेचक तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने तथा अभियोजन एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके इस उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहित किया।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी आपराधिक घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। पुलिस के अनुसार प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और नियमानुसार विवेचना करते हुए अभियोजन तथा न्यायालयीन प्रक्रिया में प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।
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