
दुर्ग | साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की रकम खपाने में मदद करने वालों के खिलाफ दुर्ग पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में शामिल दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी कमीशन के लालच में बैंक खाते और उनसे जुड़े जरूरी दस्तावेज अन्य लोगों को उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें करीब ₹2,000 से ₹15,000 तक का कमीशन मिलने की बात सामने आई है।
बैंक खातों के लेन-देन से सामने आई भूमिका
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
थाना सुपेला के अपराध क्रमांक 718/2026 की जांच के दौरान साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेन-देन और हस्तांतरण में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों का विश्लेषण किया गया।
तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों के ट्रांजेक्शन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में दो आरोपियों की भूमिका सामने आई।
कमीशन लेकर बैंकिंग सामग्री सौंपने का आरोप
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने स्वयं अथवा अन्य खाताधारकों के बैंक खातों से संबंधित पासबुक, ATM कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड कमीशन के बदले दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए थे।
इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया।
6 सितंबर को पकड़े गए दोनों फरार आरोपी
मामले की विवेचना के दौरान फरार आरोपियों की लगातार पतासाजी की जा रही थी। थाना सुपेला और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों एवं बैंकिंग लेन-देन के आधार पर दोनों आरोपियों तक पहुंच बनाई।
पुलिस टीम ने 6 सितंबर 2026 को दोनों को गिरफ्तार कर विधिसम्मत कार्रवाई की।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
1. यशपाल सिंह उर्फ लक्की पाजी, उम्र 38 वर्ष
निवासी रामनगर, नवनीत डेयरी के पीछे, थाना वैशाली नगर, जिला दुर्ग।
2. हेमत दास दखानी, उम्र 50 वर्ष
निवासी बैंक ऑफ इंडिया के पीछे, सिंधी कॉलोनी, पानी टंकी के पास, तिल्दा, जिला रायपुर।
इन बैंकों के खातों की हुई जांच
पुलिस के अनुसार साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल बैंक खाते पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक, तिल्दा, जिला रायपुर से संबंधित पाए गए हैं।
क्या-क्या जब्त किया गया?
पुलिस ने आरोपियों से जांच से संबंधित—
- बैंक पासबुक
- ATM कार्ड
- चेकबुक
- सिम कार्ड
- मोबाइल फोन
- अन्य संबंधित दस्तावेज
जब्त किए हैं।
ऐसे काम करता है म्यूल अकाउंट नेटवर्क
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी अक्सर दूसरे व्यक्तियों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
इस प्रक्रिया में कुछ लोग कमीशन के लालच में अपने या अन्य खाताधारकों के बैंक खाते, ATM कार्ड, चेकबुक, पासबुक और मोबाइल सिम दूसरे व्यक्तियों को उपलब्ध करा देते हैं। ऐसे खाते म्यूल अकाउंट के रूप में साइबर अपराध की रकम को घुमाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
दुर्ग पुलिस की नागरिकों से अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या किसी अन्य लालच में अपना बैंक खाता, पासबुक, ATM कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम किसी दूसरे व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें।
पुलिस ने चेताया कि बैंक खाते का गलत इस्तेमाल होने पर खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को जानकारी मिले कि उसके बैंक खाते या बैंकिंग दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हो रहा है, तो तत्काल संबंधित बैंक, नजदीकी पुलिस थाना या साइबर पुलिस को सूचना दें। ऑनलाइन अथवा लिखित शिकायत की प्राप्ति भी सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
दुर्ग पुलिस ने कहा है— आपका बैंक खाता आपकी जिम्मेदारी है। खाते के दुरुपयोग को रोकना साइबर अपराध की रोकथाम में महत्वपूर्ण कदम है।
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