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भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में भारी उद्योग बनेगा गेमचेंजर: बृजमोहन अग्रवाल…

छत्तीसगढ़ में आधुनिक मशीनरी निर्माण, इंडस्ट्री 4.0 और युवाओं के तकनीकी कौशल विकास पर दिया जोर

नई दिल्ली/रायपुर, 18 अगस्त। भारत को वैश्विक विनिर्माण शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए भारी इंजीनियरिंग एवं पूंजीगत वस्तु क्षेत्र को और मजबूत करना जरूरी है। यह बात रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई दिल्ली में संसद की प्राक्कलन समिति की उच्चस्तरीय बैठक में कही। बैठक का विषय ‘देश में भारी उपकरण उत्पादन क्षमता की समीक्षा’ था, जिसमें भारी उद्योग मंत्रालय और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र के उत्पादन विस्तार, तकनीकी क्षमता तथा भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को साकार करने में भारी इंजीनियरिंग एवं पूंजीगत वस्तु उद्योग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र खनन, बिजली, निर्माण, ऑटोमोबाइल और रक्षा सहित अनेक प्रमुख उद्योगों को आवश्यक मशीनरी और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराता है।

उत्पादन और निर्यात में बड़ी छलांग

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने बताया कि अर्थमूविंग, निर्माण एवं खनन मशीनरी क्षेत्र का उत्पादन 2020-21 में 29,021 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 80,750 करोड़ रुपये हो गया है। इस अवधि में उत्पादन में 178.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निर्यात में 274.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

उन्होंने बताया कि मशीन टूल्स एवं डाई-मोल्ड क्षेत्र का उत्पादन भी 6,602 करोड़ रुपये से बढ़कर 14,286 करोड़ रुपये तक पहुंचा है, जो 116.4 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं ट्रांसफॉर्मर, बॉयलर और टर्बाइन जैसी भारी विद्युत मशीनरी के उत्पादन में भी तेजी आई है और आयात पर निर्भरता में 19.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में भारी उद्योग बनेगा गेमचेंजर: बृजमोहन अग्रवाल...

स्वदेशी तकनीक को मिल रहा बढ़ावा

अग्रवाल ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय की ‘भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता संवर्धन योजना’ के चरण I एवं II के माध्यम से IITs, IISc, CMTI, ARAI और BHEL जैसे प्रमुख संस्थानों के सहयोग से उत्कृष्ट अनुसंधान केंद्र, कॉमन इंजीनियरिंग फैसिलिटी सेंटर और उद्योग त्वरक विकसित किए गए हैं।

इन प्रयासों के तहत 25 से अधिक स्वदेशी तकनीकों का विकास एवं व्यावसायीकरण किया जा चुका है, जबकि 70 से अधिक बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) दाखिल किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में बन सकते हैं भारी मशीनरी के नए केंद्र

छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास को लेकर अग्रवाल ने बैठक में विशेष सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि खनिज, ऊर्जा, खनन और इस्पात उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी होने के कारण राज्य में भारी मशीनरी एवं खनन उपकरणों के आधुनिक विनिर्माण और मेंटेनेंस हब विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने इंडस्ट्री 4.0 की जरूरतों को देखते हुए स्थानीय युवाओं के लिए उच्चस्तरीय तकनीकी कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की मांग रखी। इससे युवाओं को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी तैयार होंगे।

अग्रवाल ने विश्वास जताया कि प्राक्कलन समिति द्वारा तैयार किए जाने वाले नीतिगत सुझाव भारत को भारी उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही, छत्तीसगढ़ जैसे औद्योगिक राज्यों को आधुनिक तकनीक, कुशल मानव संसाधन और नई विनिर्माण क्षमताओं के जरिए विकास की नई रफ्तार मिल सकती है।

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