भिलाई

भिलाई में सेल-प्रबंध प्रशिक्षु-2026का सेन्ट्रल इंडक्शन शुरू; सीएमडी डॉ. ए.के. पंडा ने प्रतिस्पर्धी दौर में नवाचार एवं तकनीकी उन्नयन पर दिया जोर

भिलाई – सेल के प्रबंध प्रशिक्षु (टेक्निकल)-2026 के सेन्ट्रल इंडक्शन कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सेल) डॉ. अशोक कुमार पंडा ने 12 अगस्त 2026 को भिलाई निवास में किया। इस अवसर पर निदेशक (कार्मिक), सेल के.के. सिंह तथा निदेशक प्रभारी (बीएसपी) चित्त रंजन महापात्र सहित सेल एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

इस अवसर पर आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ देश के अग्रणी इस्पात संगठन स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) से जुड़े नए प्रबंध प्रशिक्षु (टेक्निकल) के सफर की औपचारिक शुरुआत हुई। नवनियुक्त प्रबंध प्रशिक्षु भिलाई इस्पात संयंत्र में 11 दिवसीय सेन्ट्रल इंडक्शन कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सेन्ट्रल इंडक्शन के उपरांत वे सेल के उन विभिन्न इस्पात संयंत्रों व इकाइयों में कार्यभार ग्रहण करेंगे, जहां उनकी पदस्थापना की गई है।

इस अवसर पर निदेशक (माइनिंग), सेल मनीष राज गुप्ता, निदेशक प्रभारी (आरएसपी) आलोक वर्मा, निदेशक प्रभारी (आईएसपी एवं डीएसपी) सुरजीत मिश्रा, निदेशक प्रभारी (बीएसएल) प्रिय रंजन, निदेशक (वाणिज्यिक-सेल), टी.एन. नटराजन, तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी (सेल) दिलीप कुमार, ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की। उन्होंने नए प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए अपने व्यावसायिक अनुभव साझा किए, महत्वपूर्ण सुझाव दिए तथा सेल में उनके उज्ज्वल एवं सफल करियर की कामना की।

कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) ए.के. चक्रवर्ती, कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) पी.के. सरकार, कार्यपालक निदेशक (खदान) कमल भास्कर, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) अरुण कुमार, कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (संकार्य) बी.के. बेहेरा सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख, मुख्य महाप्रबंधकगण एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान ‘ग्लिम्प्सेस फ्रॉम ऑन-बोर्डिंग ऑफ सेल एमटी(टी)-2026’ तथा ‘इंट्रोडक्शन टू सेल’ शीर्षक से परिचयात्मक वीडियो प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रशिक्षुओं को सेल की विभिन्न इकाइयों, परिचालन एवं अधोसंरचना, कार्य परिवेश तथा संगठन की विकास यात्रा की जानकारी दी गई।

प्रतिस्पर्धी दौर में नवाचार और तकनीकी उन्नयन पर जोर

नए प्रबंध प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए सीएमडी (सेल) डॉ. अशोक कुमार पंडा ने सेल की सात दशकों से अधिक की गौरवशाली विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने इस्पात उद्योग में आए व्यापक बदलावों तथा सेल की उस यात्रा पर प्रकाश डाला, जिसमें संगठन ने एक समय के एकाधिकार वाले बाजार से निकलकर आज के अत्यंत प्रतिस्पर्धी खुले बाजार में अपनी मजबूत पहचान कायम रखी है। ऐसे प्रतिस्पर्धी वातावरण में केवल मूल्य-आधारित संगठन ही निरंतर आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सेल की सात दशक से अधिक की विरासत स्वयं संगठन की दृढ़ता, क्षमता और मजबूती का प्रमाण है।

डॉ. पंडा ने कहा कि चुनौतियां अपने साथ अवसर भी लेकर आती हैं। प्रतिस्पर्धी बाजार में नवाचार, कार्यप्रणाली में सुधार और तकनीकी उन्नयन की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कम मैनपावर वाले संगठनात्मक परिवेश में फ्रंटलाइन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए युवा प्रोफेशनल्स से अपनी विशेषज्ञता का उपयोग लाभप्रदता बढ़ाने, मानव संसाधन प्रथाओं में सुधार, लागत प्रभावी उत्पादन, सुरक्षा तथा उपकरणों की बेहतर दीर्घकालिक प्रदर्शन हेतु नवीन उपाय तलाशने का आह्वान किया।

उन्होंने प्रशिक्षुओं को निरंतर सीखने, अध्ययन करने तथा आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताएं हासिल करने की सलाह दी। प्रशिक्षुओं को उनके व्यावसायिक विकास में संगठन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए डॉ. पंडा ने कहा कि संगठनात्मक विकास के लिए आवश्यक सकारात्मक सोच एवं कार्य संस्कृति विकसित करना समय की मांग है।

अपना मनचाहा सेल बनाने’ का आह्वान

नए प्रबंध प्रशिक्षु का स्वागत करते हुए निदेशक (कार्मिक), सेल श्री के.के. सिंह ने कहा कि प्रशिक्षुओं ने ऐसे महत्वपूर्ण समय में संगठन में प्रवेश किया है, जब विश्व के भविष्य के इस्पात उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा दुनिया के इसी क्षेत्र से आने की उम्मीद है और एक अग्रणी संगठन के रूप में सेल की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने देश में औद्योगिक स्तर पर इस्पात उत्पादन के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि जब देश में इस्पात संयंत्रों की स्थापना की जा रही थी, तब देश के अनेक प्रतिभाशाली लोगों ने ऐसे स्थानों पर आकर राष्ट्र निर्माण का कार्य किया, जहां आसपास बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। उनके समर्पण और अथक परिश्रम से इस्पात संयंत्रों का निर्माण संभव हुआ। जब पहली बार धमन-भट्टियों से हॉट मेटल निकला, तो इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जुड़े सभी लोगों के लिए वह अत्यंत भावुक क्षण था।

के.के. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं के रूप में स्वयं को तैयार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने प्रबंध प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे उस सेल के निर्माण में योगदान दें, जैसा सेल वे स्वयं देखना चाहते हैं।

हर दिन सीखने का दिन बने : चित्त रंजन महापात्र

निदेशक प्रभारी (बीएसपी) चित्त रंजन महापात्र ने इस अवसर को सेल के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नए प्रशिक्षु देशभर से आए सर्वश्रेष्ठ तकनीकी प्रतिभाओं में से हैं। उन्होंने प्रशिक्षुओं को सीखने के प्रत्येक अवसर का पूरा लाभ उठाने, विभिन्न कार्यक्षेत्रों के लोगों के साथ संवाद करने और अपने आसपास के प्रत्येक व्यक्ति से सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों के व्यावसायिक जीवन में यह दृष्टिकोण उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने प्रशिक्षुओं से हर दिन को सीखने का दिन बनाने का आह्वान किया और कहा कि प्रत्येक प्रशिक्षु में भविष्य का नेतृत्वकर्ता बनने की क्षमता है। उन्होंने प्रबंध प्रशिक्षु प्रणाली को संगठन के सबसे मजबूत लर्निंग प्लेटफॉर्म में से एक बताते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के युवा प्रोफेशनल्स पर सेल के भविष्य को आकार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

श्री महापात्र ने कहा कि वर्तमान समय में सेल का तात्कालिक फोकस कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करना है, व प्रबंध प्रशिक्षुओं को उन्होंने संगठन के भावी लक्ष्य नेट जीरो की दिशा में अपना योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने सुरक्षा को प्रभावी एवं सतत कार्यप्रणाली की पहली सीढ़ी बताते हुए प्रशिक्षुओं से इस उद्देश्य पर केंद्रित रहने और सेल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आग्रह किया।

52 सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत

कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन), सेल-एमटीआई, रांची संजय धर ने 52 सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाले विभिन्न सीखने के अवसरों, व्यावसायिक अनुभव एवं एक्सपोजर की जानकारी दी तथा उनके संपूर्ण प्रशिक्षण सफर से अवगत कराया।

कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन-ज्ञानार्जन एवं विकास) एस.के. श्रीवास्तव ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन DGM (मानव संसाधन-ज्ञानार्जन एवं विकास) सुश्री नीरजा शर्मा ने किया।

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