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रावघाट रेल लाइन पर तकनीकी ट्रायल, जल्द शुरू हो सकेगी यात्री सेवा…

दल्लीराजहरा- रावघाट रेल परियोजना ने 17 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब रावघाट रेलखंड पर नियंत्रित गति और सीमित भार के साथ तकनीकी ट्रायल प्रारंभ किया गया। इस ट्रायल में 58 BOXN रेक का उपयोग किया गया। यह ट्रायल आगामी दिनों में विभिन्न चरणों में जारी रहेगा और रेल लाइन की परिचालन क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा तथा तकनीकी मानकों का परीक्षण किया जाएगा।

इस प्रगति के साथ रावघाट रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। करीब 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना को सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र और भारतीय रेलवे के साझा प्रयासों से विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2008 में हुए एमओयू के बाद शुरू हुई यह परियोजना केवल लौह अयस्क परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि बस्तर अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बन चुकी है।

इस परियोजना में सेल द्वारा अब तक करीब 1800 करोड़ रुपये रेल लाइन निर्माण पर तथा रावघाट परियोजना के समग्र विकास पर लगभग 2000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। उल्लेखनीय है नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों से गुजरने वाली इस परियोजना को पूरा करना आसान नहीं था।

आज रेल लाइन निर्माण का अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में रावघाट स्टेशन भवन, यात्री सुविधाओं तथा सिग्नलिंग एवं दूरसंचार (एस एंड टी) से जुड़े कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जुलाई 2026 के अंत तक स्टेशन परिसर के शेष कार्य पूर्ण होने की संभावना है। इसके बाद कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) द्वारा निरीक्षण और सुरक्षा स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार तकनीकी ट्रायल का उद्देश्य रेल लाइन की परिचालन तैयारियों का आकलन करना है। विभिन्न गति और भार स्थितियों में परीक्षण किए जाने के बाद आवश्यक अनुमतियां प्राप्त होंगी। सीआरएस की स्वीकृति मिलने के उपरांत इस रेलखंड पर यात्री ट्रेन संचालन का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा, जिसका लंबे समय से बस्तर क्षेत्र के लोग इंतजार कर रहे हैं।

इस परियोजना का प्रभाव पहले से ही दिखाई देने लगा है। वर्ष 2022 में दल्लीराजहरा से तरोकी तक यात्री ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। रावघाट तक रेल संपर्क स्थापित होने के बाद यह लाभ और व्यापक होगा तथा बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों की पहुंच राज्य और देश के प्रमुख शहरों तक और अधिक सुगम हो जाएगी।

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