दुर्ग में न्यायालयों में लंबी कानूनी प्रक्रिया से सम्बंधित मध्यस्थता 3.0 के तहत कैंपस प्रतियोगिता आयोजित, 100 से अधिक विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन…
संवाद, सहमति और आपसी समझ से विवादों के समाधान पर जोर; समूह एवं व्यक्तिगत स्पर्धाओं में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर

दुर्ग। विवादों का समाधान केवल न्यायालयों में लंबी कानूनी प्रक्रिया से ही नहीं, बल्कि संवाद, आपसी समझ और स्वैच्छिक सहमति के माध्यम से भी संभव है। इसी सोच को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने और मध्यस्थता की प्रक्रिया से विद्यार्थियों को व्यावहारिक रूप से परिचित कराने के उद्देश्य से दुर्ग में मध्यस्थता 3.0 के अंतर्गत कैंपस मध्यस्थता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 100 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराकर मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान के प्रति अपनी रुचि प्रदर्शित की।

इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना था कि विवादों को टकराव के बजाय बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है। प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को संवाद कौशल, सक्रिय श्रवण, सहानुभूति और समझौते की प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव भी मिला।
न्यायपालिका और शैक्षणिक संस्थानों की संयुक्त पहल
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग तथा शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (साइंस कॉलेज), दुर्ग के मनोविज्ञान विभाग का सहयोग रहा। महाविद्यालय के समान अवसर प्रकोष्ठ ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
यह आयोजन सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में 1 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक संचालित राष्ट्रव्यापी मध्यस्थता 3.0 अभियान का हिस्सा रहा। इस संयुक्त पहल के जरिए न्यायपालिका, विधिक सेवा संस्थाओं और शैक्षणिक समुदाय के बीच समन्वय को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
मध्यस्थता सामाजिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा : के. विनोद कुजूर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने युवाओं के बीच मध्यस्थता के प्रति जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि मध्यस्थता भारतीय सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रही है। वर्तमान पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संवाद, आपसी समझ और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान की संस्कृति अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और सहमति के जरिए विवादों का समाधान खोजने से सामाजिक संबंधों में सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलती है।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने भी अपने संबोधन में मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने ऐसी शैक्षणिक पहलों में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता तथा विश्वविद्यालय और न्यायिक संस्थाओं के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
‘तारीख पर तारीख’ से सहमति आधारित न्याय तक
जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दुर्ग अनीश दुबे ने अपने संबोधन की शुरुआत फिल्म के चर्चित संवाद ‘तारीख पर तारीख’ से करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में होने वाले विलंब की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने न्यायालयों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या और सीमित न्यायिक संसाधनों के कारण सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय लोक अदालतें लंबित मामलों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी क्रम में मध्यस्थता 3.0 अभियान भी विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मध्यस्थता के माध्यम से संबंधित पक्ष अपनी बात रखकर आपसी सहमति से समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
विवादों के समाधान में मनोविज्ञान की भूमिका
कार्यक्रम में मध्यस्थता की प्रक्रिया में मनोविज्ञान के महत्व को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। मानवीय व्यवहार, भावनाओं, संवाद और पारस्परिक संबंधों की समझ विवादों के मूल कारणों को पहचानने में सहायक होती है। इससे संबंधित पक्षों के बीच रचनात्मक बातचीत और सहमति की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए सक्रिय श्रवण, सहानुभूति, प्रभावी संवाद, तार्किक चिंतन, समझौते की क्षमता और विवाद प्रबंधन जैसे कौशल सीखने का अवसर बनी। ये क्षमताएं उनके भावी व्यावसायिक जीवन के साथ-साथ व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
समूह प्रतियोगिता में ग्रुप-8 को प्रथम पुरस्कार
कैंपस मध्यस्थता प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने समूह और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भाग लेकर संवाद, बातचीत और सहमति निर्माण से जुड़ी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं के नाम इस प्रकार रहे।
समूह प्रतियोगिता
- प्रथम पुरस्कार: ग्रुप-8 — यामिनी बघेल, नीता साहू, आदित्य कुमार चंद्रपक्षी एवं मृणाल डप।
- द्वितीय पुरस्कार: ग्रुप-5 — कंचना कोषा, करुणा जैन, संध्या ठाकुर एवं अंजलि वर्मा।
- तृतीय पुरस्कार: ग्रुप-2 — श्रेया साहू, गरिमा साहू, ओमकुमारी एवं ध्यसंत साहू।
स्नातक स्तर की व्यक्तिगत प्रतियोगिता
- प्रथम पुरस्कार: मृणाल डप।
- द्वितीय पुरस्कार: तोशी।
- तृतीय पुरस्कार: श्लोक।
स्नातकोत्तर स्तर की व्यक्तिगत प्रतियोगिता
- प्रथम पुरस्कार: आशा।
- द्वितीय पुरस्कार: अंजलि।
- तृतीय पुरस्कार: नीतू।
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों और शिक्षाविदों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय सिंह, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार पांडेय, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनीश दुबे, स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी कामिनी जायसवाल तथा व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी ऐश्वर्या दीवान उपस्थित रहे।
इसके अलावा विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के प्राध्यापक, मनोविज्ञान विभाग के शिक्षक, विद्यार्थी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी तथा पैरालीगल वॉलंटियर्स भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
शांतिपूर्ण विवाद समाधान की संस्कृति को बढ़ावा
मध्यस्थता 3.0 के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को विवादों के समाधान के वैकल्पिक तरीकों को समझने और उनका व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर दिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि संवाद, आपसी सम्मान और स्वैच्छिक सहमति के जरिए विवादों को सुलझाने की संस्कृति विकसित की जा सकती है।
जिला न्यायपालिका, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय और साइंस कॉलेज, दुर्ग की संयुक्त सहभागिता ने न्यायिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग की अहमियत को रेखांकित किया। इस पहल के माध्यम से युवाओं को जागरूक नागरिक बनाने और समाज में शांतिपूर्ण विवाद समाधान की सोच को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किया गया।
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