रायपुर

विशेष लेख : श्रमिकों के सशक्तिकरण का नया दौर: छत्तीसगढ़ में श्रम कल्याण को मिल रही नई गति…

सामाजिक सुरक्षा, बेहतर सुविधाओं, डिजिटल सेवाओं और रोजगारोन्मुख योजनाओं से श्रमिकों के जीवन में बदलाव की मजबूत पहल

रायपुर। राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उनके सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के बिना विकसित राज्य की परिकल्पना अधूरी है। इसी दृष्टिकोण के साथ छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार, सामाजिक सुरक्षा के विस्तार और सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में बीते ढाई वर्षों में किए गए प्रयासों ने श्रमिक कल्याण को नई दिशा दी है।

प्रशासनिक ढांचे को मिला विस्तार

श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और श्रमिकों को त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पांच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं। इनमें से पांच कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय सहित कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं। इससे श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन को गति मिली है।

बदलते दौर के अनुरूप श्रम कानूनों में सुधार

औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के बीच संतुलन कायम करने के लिए श्रम कानूनों में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में बदलाव कर आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के बाद श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र 24 घंटे के भीतर जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे कारोबारी प्रतिष्ठानों को सरल और पारदर्शी सेवाएं मिलने के साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा।

56 लाख से अधिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवच

छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक करीब 56.83 लाख संगठित, निर्माण और असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है। यह आंकड़ा राज्य में श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का दायरा पहुंचाने की व्यापकता को दर्शाता है।

3.48 लाख लोगों को योजनाओं का सीधा लाभ

वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से करीब 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल उन्नयन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन योजनाओं पर करीब 173.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

आवास सहायता में बढ़ोतरी से मजबूत हुआ आशियाने का सपना

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास निर्माण या घर खरीदने के लिए मिलने वाली सहायता राशि को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये किया गया है। इससे निर्माण श्रमिक परिवारों को अपने घर का सपना पूरा करने में अतिरिक्त आर्थिक संबल मिलेगा।

महिलाओं के लिए स्वरोजगार का नया रास्ता

दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों और उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि भी एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। यह पहल महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का मजबूत आधार

श्रमिक परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अटल कैरियर निर्माण योजना शुरू की गई है। इसके तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके साथ ही अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। वर्ष 2026-27 से लाभार्थी बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।

स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष जोर

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इससे बीमारियों की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।

पांच रुपये में पौष्टिक भोजन

शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना श्रमिकों के लिए राहत का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। इसके तहत पंजीकृत निर्माण, संगठित और असंगठित श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केंद्र संचालित हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से सेवाएं हुईं आसान

श्रम विभाग का ई-श्रम साथी मोबाइल एप श्रमिकों और नियोजकों के बीच संपर्क का प्रभावी माध्यम बन रहा है। इसके जरिए स्वयं पंजीयन, रोजगार से जुड़ी जानकारी और श्रमिक-नियोजक संपर्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। डिजिटल व्यवस्था से सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ने के साथ रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी आसान हुई है।

मॉडल लेबर चौक से मिलेगा बेहतर माहौल

श्रमिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर पंजीयन, विभिन्न योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

संकट की घड़ी में परिवारों को आर्थिक सहारा

मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर 5 लाख रुपये और स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं अपंजीकृत निर्माण श्रमिक की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये तथा दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।

सुरक्षित कार्यस्थल, बेहतर उत्पादकता

राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों और सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन के साथ कार्यस्थल दुर्घटनाओं में कमी लाना और उत्पादकता को बेहतर करना है।

कल्याण से सशक्तिकरण की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग की पहलों ने श्रमिक कल्याण को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, डिजिटल सेवाओं और सम्मानजनक कार्य वातावरण से जोड़ा है। प्रशासनिक व्यवस्था के विस्तार से लेकर तकनीक आधारित सेवाओं और परिवार-केंद्रित योजनाओं तक, इन प्रयासों का केंद्र श्रमिक और उनका भविष्य है।

राज्य सरकार की यह पहल इस सोच को मजबूत करती है कि श्रमिक विकास योजनाओं के महज लाभार्थी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा के सक्रिय सहभागी और महत्वपूर्ण आधारस्तंभ हैं।

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