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अर्नब चक्रवात से फसल को नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर दें सूचना, टोल फ्री नंबर 14447 जारी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजे के लिए किसान व्हाट्सएप नंबर 7065514447 पर भी भेज सकेंगे नुकसान का विवरण

दुर्ग। पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न भीषण चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से दुर्ग जिले में हो रही भारी वर्षा के कारण फसलों को नुकसान होने की आशंका है। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित फसलों को क्षति होने पर किसानों को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे फसल नुकसान की सूचना निर्धारित समय सीमा के भीतर दर्ज कराएं, ताकि बीमा दावा प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

किसान फसल नुकसान की जानकारी देने के लिए केंद्र सरकार के टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकृत व्हाट्सएप नंबर 7065514447 पर भी नुकसान का विवरण भेजा जा सकता है।

फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देना जरूरी

उपसंचालक कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में स्थानीय आपदा और फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को होने वाले नुकसान पर अंतरिम राहत दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए प्रभावित किसानों को नुकसान की सूचना घटना के 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है।

समय सीमा के भीतर सूचना मिलने पर संबंधित नुकसान का सर्वेक्षण कर बीमा दावे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि फसल को नुकसान होने की स्थिति में बिना देरी किए संबंधित माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।

खरीफ 2026 की इन फसलों को योजना में किया गया है अधिसूचित

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ 2026 के लिए दुर्ग जिले में निम्नलिखित फसलों को अधिसूचित किया गया है:

  • धान (सिंचित एवं असिंचित)

  • मक्का

  • सोयाबीन

  • तुअर (अरहर)

  • मूंग

  • उड़द

  • मूंगफली

  • कोदो

  • कुटकी

  • रागी

इन अधिसूचित फसलों का बीमा कराने वाले किसान योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र नुकसान की स्थिति में दावा प्रक्रिया के लिए सूचना दे सकते हैं।

इन परिस्थितियों में नुकसान को किया गया है शामिल

कृषि विभाग के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए तीन प्रमुख जोखिम श्रेणियां शामिल की गई हैं।

1. प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई या रोपाई नहीं होना: प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के चलते फसल की बुवाई या रोपाई नहीं हो पाने की स्थिति को योजना में शामिल किया गया है।

2. स्थानीयकृत आपदाएं: ओलावृष्टि, जलप्लावन और अतिवृष्टि से होने वाले नुकसान को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार शामिल किया गया है। हालांकि, धान की फसल में जलप्लावन से होने वाली क्षति को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।

3. फसल कटाई के बाद नुकसान: खेत में कटाई के बाद सुखाने के लिए रखी गई फसल को होने वाली क्षति भी योजना के प्रावधानों के अंतर्गत शामिल है।

स्थानीय आपदा और कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल के नुकसान की स्थिति में अंतरिम राहत का प्रावधान है। इसके लिए समय सीमा के भीतर सूचना देना जरूरी है।

फोन, व्हाट्सएप और ऑनलाइन माध्यम से दर्ज कराएं शिकायत

फसल नुकसान की सूचना देने के लिए किसानों के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं:

  • टोल फ्री नंबर: 14447 पर कॉल करें।

  • व्हाट्सएप नंबर: 7065514447 पर नुकसान का विवरण भेजें।

  • ऑनलाइन शिकायत: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल pmfby.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

  • क्रॉप इंश्योरेंस ऐप: गूगल प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर फसल नुकसान का पूरा विवरण दर्ज करें।

  • स्थानीय स्तर पर सूचना: अपने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, राजस्व विभाग, संबंधित बैंक या बीमा कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी दें।

कृषि विभाग की किसानों से अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि चक्रवात अर्नब के प्रभाव से अत्यधिक वर्षा होने पर यदि उनकी बीमित फसल को नुकसान पहुंचा है, तो तत्काल इसकी सूचना दर्ज कराएं। नुकसान का विवरण समय पर उपलब्ध कराने से संबंधित सर्वेक्षण और बीमा दावा प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिलेगी

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