बिना पलक झपकाए मूर्ति रूप में दर्शन दे रहीं चैतन्य देवियां, भिलाई के राजयोग भवन में आकर्षण का केंद्र बनी दिव्य झांकी…
ब्रह्माकुमारी सेक्टर-7 राजयोग भवन में शारदीय नवरात्रि पर ध्वनि और प्रकाश के समन्वय से सजी चैतन्य देवियों की झांकी, 22 अक्टूबर से शुरू होगा 10 दिवसीय ‘अपनी शक्तियों से करें मुलाकात’ राजयोग शिविर

भिलाई । शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर भिलाई के सेक्टर-7 स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के राजयोग भवन में चैतन्य देवियों की आकर्षक झांकी सजाई गई है। ध्वनि और प्रकाश के सुंदर समन्वय से तैयार इस झांकी का शुभारंभ शिवशक्ति स्वरूपा ब्रह्माकुमारी दीदियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। झांकी में राजयोग के अभ्यास से तन और मन को स्थिर रखने वाली ब्रह्माकुमारी बहनें बिना पलक झपकाए जड़ मूर्ति के समान विराजित दिखाई देती हैं, जो दर्शनार्थियों के लिए आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बनी हुई हैं।

पर्वतों और गुफाओं के बीच चैतन्य देवियों के दिव्य दर्शन
झांकी में विशाल पर्वत श्रृंखलाओं, गुफाओं और पहाड़ों के बीच एक के बाद एक चैतन्य देवियों के मूर्ति रूप में प्रकट होने का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। ध्वनि और प्रकाश के विशेष संयोजन से सजा यह दृश्य श्रद्धालुओं को अलौकिक एवं दिव्य अनुभूति कराता है।

चैतन्य देवियों के रूप में विराजित ब्रह्माकुमारी बहनें राजयोग के नियमित अभ्यास के माध्यम से तन और मन की स्थिरता का प्रदर्शन करती हैं। बिना पलक झपकाए लंबे समय तक मूर्ति के समान स्थिर बैठी बहनों को देखकर दर्शनार्थियों को सहज ही विश्वास नहीं होता कि उनके सामने जीवंत स्वरूप विराजमान हैं।
आंतरिक शक्तियों को जागृत करने का संदेश
यह झांकी केवल देवी दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा भी दी जा रही है।

झांकी का संदेश है कि मनुष्य के भीतर व्याप्त अशांति को दूर कर ज्ञान का प्रकाश जगाया जा सकता है। मां दुर्गा की अष्ट भुजाओं को आठ शक्तियों का प्रतीक बताते हुए स्वयं में इन शक्तियों को जागृत करने और उन्हें व्यवहार में लाने पर जोर दिया गया है।
इसके लिए भारत की प्राचीन राजयोग ध्यान पद्धति को आत्मिक जागृति और सकारात्मक जीवनशैली का माध्यम बताया गया है।
शुद्धता और पवित्रता अपनाने की प्रेरणा
झांकी में बचपन की शुद्धता और नदी के उद्गम स्थल की पवित्रता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जीवन में भी इसी प्रकार की निर्मलता बनाए रखने का संदेश दिया गया है।

इसके अनुसार, जीवन में शिव की शक्तियों को धारण करने के लिए बुराइयों, अशुद्धियों, नकारात्मकता, व्यसनों, ईर्ष्या और द्वेष जैसी प्रवृत्तियों को त्यागना आवश्यक है। जब व्यक्ति इन नकारात्मक भावनाओं से स्वयं को मुक्त करने का प्रयास करता है, तब उसके व्यवहार और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की संभावना बढ़ती है।
चैतन्य देवियों की झांकी का मूल उद्देश्य लोगों को बाहरी दर्शन के साथ-साथ अपने भीतर झांकने, आत्मचिंतन करने और आंतरिक शक्तियों को पहचानने के लिए प्रेरित करना है।
22 अक्टूबर से शुरू होगा 10 दिवसीय राजयोग शिविर
चैतन्य देवियों की झांकी के साथ ही ब्रह्माकुमारी राजयोग भवन की ओर से ‘अपनी शक्तियों से करें मुलाकात’ नाम से 10 दिवसीय राजयोग शिविर का आयोजन भी किया जाएगा। शिविर की शुरुआत 22 अक्टूबर 2026 से होगी।
शिविर में शामिल होने के लिए तीन समय निर्धारित किए गए हैं:
- प्रातःकाल: सुबह 7 बजे से 8 बजे तक
- संध्याकाल: शाम 5:30 बजे से 6:30 बजे तक
- रात्रिकाल: शाम 7:30 बजे से रात 8:30 बजे तक
इच्छुक व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक समय में शिविर का लाभ ले सकते हैं।
राजयोग शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी आंतरिक शक्तियों से परिचित होने, मन की स्थिरता का अभ्यास करने और जीवन में सकारात्मकता को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।
आत्मचिंतन और सकारात्मक बदलाव का संदेश
नवरात्रि के अवसर पर आयोजित चैतन्य देवियों की झांकी श्रद्धा, साधना और आत्मिक जागृति का संदेश दे रही है। पर्वतों और गुफाओं के बीच मूर्ति रूप में विराजित देवियों का दृश्य जहां लोगों को आकर्षित कर रहा है, वहीं इसका आध्यात्मिक संदेश स्वयं की शक्तियों को पहचानने और नकारात्मक प्रवृत्तियों को छोड़ने की प्रेरणा देता है।
आयोजन के साथ शुरू होने वाला 10 दिवसीय राजयोग शिविर भी इसी दिशा में एक अवसर है, जिसके माध्यम से लोग राजयोग अभ्यास से परिचित होकर आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवनशैली की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
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