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तांदुला जल संसाधन संभाग की 25 वर्षों में बड़ी उपलब्धि, सिंचाई का रकबा 87 हजार से बढ़कर 1.13 लाख हेक्टेयर के पार…

118 सिंचाई परियोजनाओं और 1,349 किलोमीटर नहर नेटवर्क से किसानों को मिल रहा लाभ, 42 हजार से अधिक कृषकों को मिली प्रत्यक्ष सिंचाई सुविधा

दुर्ग । छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद बीते 25 वर्षों में तांदुला जल संसाधन संभाग, दुर्ग ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, जल संरक्षण और आधुनिक जल प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य गठन के समय अविभाजित दुर्ग जिले में सिंचाई का रकबा 87,930 हेक्टेयर था, जो बढ़कर वर्तमान में 1,13,538 हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में सिंचाई परियोजनाओं की संख्या 97 से बढ़कर 118 और नहरों की कुल लंबाई 1,148 किलोमीटर से बढ़कर 1,349 किलोमीटर हो गई है।

तांदुला जल संसाधन संभाग की 25 वर्षों में बड़ी उपलब्धि, सिंचाई का रकबा 87 हजार से बढ़कर 1.13 लाख हेक्टेयर के पार...

‘जल ही जीवन, जल ही विकास’ और ‘हर खेत तक पानी, हर किसान के चेहरे पर मुस्कान’ के ध्येय के साथ विभाग सिंचाई क्षेत्र के विस्तार, जल संसाधनों के संरक्षण और किसानों को बेहतर जल सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इन प्रयासों से 42 हजार से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष सिंचाई सुविधा मिली है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादन, ग्रामीण आजीविका और खेती में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

97 से बढ़कर 118 हुई सिंचाई परियोजनाएं

राज्य गठन के समय तांदुला जल संसाधन संभाग के अंतर्गत 97 सिंचाई परियोजनाएं संचालित थीं। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 118 हो गई है। वहीं, नहर नेटवर्क का विस्तार 1,148 किलोमीटर से बढ़कर 1,349 किलोमीटर तक पहुंच गया है। इससे सिंचाई जल के वितरण के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है।

तांदुला जल संसाधन संभाग की 25 वर्षों में बड़ी उपलब्धि, सिंचाई का रकबा 87 हजार से बढ़कर 1.13 लाख हेक्टेयर के पार...

विभाग द्वारा नहरों की लाइनिंग, जल वितरण संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण और गेट स्वचालन जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी काम किया गया है। इन उपायों का उद्देश्य जल वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाना और पानी की बर्बादी कम करना है।

दुर्ग-बालोद अंचल में ग्रामीण क्षेत्रों तक जलापूर्ति को मजबूत बनाने के लिए खरखरा-शिवनाथ नदी पाइपलाइन योजना, जिसकी लागत 1,520 करोड़ रुपये बताई गई है, तथा 238 करोड़ रुपये की तांदुला ऑगुमेंटेशन सहगांव उद्वहन सिंचाई योजना जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं से 18,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। उद्वहन सिंचाई योजनाओं के माध्यम से ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक भी पानी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

भू-जल पुनर्भरण के लिए 565 रिचार्ज और सोक पिट

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ जल संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विभाग के अनुसार, इस वर्ष वर्षा जल के संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से 265 रिचार्ज पिट तथा 300 सोक पिट का निर्माण किया गया है। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल को जमीन में समाहित करने और भू-जल स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

तांदुला जल संसाधन संभाग की 25 वर्षों में बड़ी उपलब्धि, सिंचाई का रकबा 87 हजार से बढ़कर 1.13 लाख हेक्टेयर के पार...

इसके अलावा तालाबों, बांधों, परकोलेशन टैंकों और अन्य पुनर्भरण संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जलाशयों की गाद निकालने, मरम्मत और आधुनिकीकरण के कार्यों से उनकी जल संग्रहण क्षमता में सुधार लाने पर भी जोर दिया गया है।

विभाग एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन और जल बजटिंग के माध्यम से उपलब्ध जल के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में काम कर रहा है। महिला समूहों और स्व-सहायता समूहों की भागीदारी से जल प्रबंधन को सामुदायिक स्तर पर मजबूत बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

42 हजार से अधिक किसानों को सिंचाई सुविधा

तांदुला जल संसाधन संभाग के अनुसार, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से 42 हजार से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। खेतों तक पानी की उपलब्धता से किसानों को फसल उत्पादन में मदद मिलती है और कृषि कार्यों के लिए वर्षा पर निर्भरता कम करने का अवसर मिलता है।

विभागीय जानकारी में सिंचाई सुविधाओं के कारण फसल उत्पादकता में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि का उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह वृद्धि फसल, क्षेत्र और अन्य कृषि परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के उद्देश्य से स्प्रिंकलर और ड्रिप जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक जल उपयोगिता समितियों के माध्यम से जल वितरण में किसानों की भागीदारी बढ़ाने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया जा रहा है।

सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से कृषि आधारित लघु उद्योगों, कृषि उपज प्रसंस्करण और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना बढ़ती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।

ड्रोन सर्वेक्षण और डिजिटल निगरानी से आधुनिक जल प्रबंधन

जल संसाधनों के प्रबंधन में तकनीक का उपयोग बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा डिजिटल प्रणालियों को अपनाने की जानकारी दी गई है। इसमें डीजीपीएस, ड्रोन सर्वेक्षण और जीआईएस मानचित्रण के माध्यम से स्थल सर्वेक्षण तथा योजनाओं की तैयारी शामिल है।

रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (आरटीएमएस) के माध्यम से नहरों और जलाशयों की निगरानी को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं, ई-ऑफिस और ऑनलाइन परियोजना ट्रैकिंग सिस्टम का उद्देश्य विभागीय कामकाज तथा परियोजनाओं की प्रगति में पारदर्शिता बढ़ाना है।

विभागीय प्रयासों में राज्य स्तरीय जल डेटा पोर्टल और जन शिकायत निवारण प्रणाली का भी उल्लेख किया गया है। इन व्यवस्थाओं के जरिए जल संसाधनों से जुड़े आंकड़ों की उपलब्धता और नागरिकों की शिकायतों के समाधान को अधिक व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका पर जोर

सिंचाई नेटवर्क के विस्तार के साथ जलाशयों और तालाबों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण तथा जल के संतुलित उपयोग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। जल शक्ति अभियान के अंतर्गत पानी बचाने और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विभाग का मानना है कि जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायक हो सकता है। जलाशयों में मत्स्य पालन और जैव विविधता के संरक्षण को प्रोत्साहित करना भी इसी दिशा के प्रयासों में शामिल है।

भविष्य में सूक्ष्म सिंचाई और नहरों के आधुनिकीकरण पर फोकस

आगामी वर्षों में विभाग द्वारा सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के विस्तार, नहरों के आधुनिकीकरण और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंपों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करने की योजना बताई गई है। इसके साथ ही एनीकट को बैराज में परिवर्तित करने की योजनाओं पर भी काम करने का उल्लेख किया गया है।

विभाग का लक्ष्य सिंचाई क्षमता में लगातार वृद्धि करना और उपलब्ध जल का न्यायसंगत एवं सतत उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके तहत कृषि के साथ औद्योगिक, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

तांदुला जल संसाधन संभाग की ओर से प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि राज्य गठन के बाद सिंचाई परियोजनाओं, नहर नेटवर्क और सिंचित क्षेत्र में विस्तार हुआ है। आने वाले समय में इन सुविधाओं का प्रभावी संचालन, जल संरक्षण और अंतिम छोर तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती और प्राथमिकता बनी रहेगी।

 

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