भिलाई निगम के डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पर संजय दानी के तीखे सवाल, 13.79 करोड़ की अतिरिक्त लागत पर मांगा जवाब
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए प्रश्न, टेंडर, भुगतान और एजेंसी के कामकाज की सूक्ष्म जांच की मांग

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सफाई कार्यों को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष संजय दानी ने निगम के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सफाई ठेके की लागत, निविदा प्रक्रिया, कार्य अवधि, एजेंसी को किए गए भुगतान और अतिरिक्त स्वीकृति से जुड़े मामलों की बिंदुवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
संजय दानी का आरोप है कि आम जनता से प्राप्त टैक्स और राज्य शासन से निगम को आवंटित राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ तथा सफाई व्यवस्था से जुड़े मामलों में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। उन्होंने स्वास्थ्य प्रभारी, स्वास्थ्य अधिकारी और तत्कालीन आयुक्त की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि निगम के स्वास्थ्य विभाग और सफाई कार्यों से संबंधित तकनीकी अधिकारियों को उनके द्वारा उठाए गए सवालों का सिलसिलेवार और स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
36.49 करोड़ के काम की लागत 50.28 करोड़ कैसे पहुंची?
संजय दानी ने सबसे प्रमुख सवाल डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं सफाई कार्यों की लागत को लेकर उठाया है।
उनके अनुसार निगम के 52 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सफाई का काम करीब 36 करोड़ 49 लाख रुपये में कराया जा सकता था। इसके बाद इसी कार्य की लागत बढ़कर करीब 50 करोड़ 28 लाख रुपये कैसे हो गई, यह जांच का विषय है।
उन्होंने सवाल किया कि जब सफाई का क्षेत्र नहीं बढ़ा और सफाई मित्रों के वेतन में भी कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई, तो करीब 13 करोड़ 79 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि किन मदों में खर्च की गई, इसका स्पष्ट विवरण निगम के स्वास्थ्य विभाग को देना चाहिए।
करीब 50 फीसदी लागत वृद्धि पर मांगा हिसाब
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने 52 वार्डों में सफाई कार्यों के ठेके की लागत में हुई वृद्धि पर भी सवाल उठाया है।
उनका कहना है कि सफाई कार्यों की लागत में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, लेकिन इसके बावजूद सफाई व्यवस्था की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।
उन्होंने निगम से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि लागत बढ़ाने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और अतिरिक्त राशि किन-किन कार्यों या मदों में खर्च की गई।
टेंडर की शर्तों का पालन हुआ या नहीं?
संजय दानी ने सफाई ठेके की निविदा में निर्धारित नियमों एवं शर्तों के पालन को लेकर भी जानकारी मांगी है।
उन्होंने निगम के स्वास्थ्य विभाग से पूछा है कि जिस आधार पर संबंधित निविदाकार को सफाई का ठेका दिया गया था, क्या अनुबंध में निर्धारित सभी नियम और शर्तों का पूरी तरह पालन किया गया?
उन्होंने कार्य की निगरानी, निर्धारित मानकों और एजेंसी के प्रदर्शन से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
अर्बन इन्वाइरो को हर महीने 4.75 करोड़ के भुगतान पर सवाल
संजय दानी ने अर्बन इन्वाइरो वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी को किए जा रहे भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार निगम द्वारा कंपनी को लगभग 4 करोड़ 75 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा था।
उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी राशि के भुगतान के बावजूद क्या भिलाई शहर वास्तव में कचरा मुक्त हो गया? क्या सफाई एजेंसी का कार्य निगम और आम जनता के मानकों के अनुरूप संतोषप्रद रहा?
उन्होंने कंपनी के कार्य की गुणवत्ता और निगम द्वारा किए गए भुगतान का तुलनात्मक परीक्षण कराने की मांग की है।
रोड स्वीपिंग मशीन का इस्तेमाल कितनी बार हुआ?
सफाई व्यवस्था में रोड स्वीपिंग मशीन के इस्तेमाल को लेकर भी पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने जानकारी मांगी है।
उनके अनुसार निविदा की नियम-शर्तों में निगम के प्रमुख एवं मुख्य मार्गों की सफाई रोड स्वीपिंग मशीन के माध्यम से किए जाने का प्रावधान था।
ऐसे में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से पूछा है कि अर्बन इन्वाइरो वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा कब-कब और कितनी बार रोड स्वीपिंग मशीन का उपयोग कर प्रमुख मार्गों की सफाई की गई?
उन्होंने इस संबंध में मशीन के संचालन का रिकॉर्ड, तारीख, मार्ग और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
नई निविदा में देरी को लेकर भी उठे सवाल
संजय दानी ने सफाई ठेके की अवधि समाप्त होने के बाद नई निविदा समय पर नहीं बुलाए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि यदि सफाई ठेके की अवधि एक वर्ष निर्धारित थी, तो अवधि समाप्त होने के बाद नई निविदा प्रक्रिया समय सीमा के भीतर क्यों शुरू नहीं की गई?
उन्होंने आरोप लगाया कि नई निविदा में देरी के कारण संबंधित एजेंसी को अतिरिक्त स्वीकृति और कार्य वृद्धि के माध्यम से आर्थिक लाभ पहुंचाने की स्थिति बनी।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित निगम अधिकारियों या एजेंसी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
वित्तीय अधिकारों को लेकर भी उठाया सवाल
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने निगम के विभिन्न स्तरों पर निर्धारित वित्तीय अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाया है।
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार आयुक्त के पास 1.50 करोड़ रुपये, महापौर परिषद के पास 3 करोड़ रुपये और सामान्य सभा के पास 10 करोड़ रुपये तक के वित्तीय अधिकार हैं, जबकि इससे अधिक राशि की स्वीकृति राज्य शासन के स्तर पर होती है।
उन्होंने दावा किया कि सफाई कार्यों के ठेकों की लागत पर नजर डालने पर प्रत्येक जोन में राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक दिखाई देती है। ऐसे में उन्होंने संबंधित स्वीकृतियों और वित्तीय प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
सामान्य सभा को गुमराह करने का आरोप
संजय दानी ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने महापौर परिषद और सामान्य सभा को पूरी जानकारी दिए बिना ऐसा संकल्प पारित कराया, जिसके तहत नई निविदा आमंत्रित होने तक अर्बन इन्वाइरो कंपनी से ही सफाई कार्य जारी रखने की व्यवस्था की गई।
उनके अनुसार इस प्रक्रिया में प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति भी ली गई। उन्होंने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।
दानी का दावा है कि नई निविदा की प्रक्रिया में देरी के कारण संबंधित एजेंसी लगभग 8 से 9 महीने तक सफाई कार्य करती रही। उनके अनुसार करीब 4 करोड़ 75 लाख रुपये प्रतिमाह के हिसाब से इस अवधि में भुगतान की राशि लगभग 38 से 39 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में सामान्य सभा और राज्य शासन को दी गई जानकारी की भी जांच कराने की मांग की है।
19 दिसंबर 2025 के प्रस्ताव पर विशेष जांच की मांग
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने महापौर परिषद की बैठक 19 दिसंबर 2025 के प्रस्ताव क्रमांक-02 का उल्लेख करते हुए इस प्रस्ताव की भी सूक्ष्म जांच की मांग की है।
उनका आरोप है कि अतिरिक्त स्वीकृति के नाम पर सामान्य सभा में राशि का स्पष्ट उल्लेख किए बिना प्रस्ताव पारित कराया गया। उन्होंने राज्य शासन से इस प्रक्रिया की जांच कराने तथा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
भुगतान रोकने और जांच की मांग
संजय दानी ने राज्य शासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और सूक्ष्म जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सफाई कार्यों की लागत में वृद्धि, निविदा प्रक्रिया, अतिरिक्त स्वीकृति, एजेंसी को किए गए भुगतान और कार्य की गुणवत्ता—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
उन्होंने संबंधित एजेंसी के भुगतान की भी जांच पूरी होने तक समीक्षा किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
“वित्तीय अनियमितता नहीं, डकैती का कृत्य” : संजय दानी
संजय दानी ने अपने आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि सफाई कार्यों में जिस तरह से राशि खर्च की गई और प्रक्रिया अपनाई गई, उसकी विस्तृत जांच जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के पैसे के दुरुपयोग का गंभीर मामला है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी की भूमिका तय करने की मांग की है।
हालांकि, संजय दानी द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार के स्तर पर नहीं हुई है। मामले में नगर पालिक निगम भिलाई, स्वास्थ्य विभाग तथा संबंधित एजेंसी का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा।
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