आईआईटी भिलाई में पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान पर दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, जनजातीय चिकित्सा के संरक्षण और वैज्ञानिक शोध पर हुआ मंथन…

भिलाई/ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई में 10 एवं 11 जुलाई, 2026 को आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “पारंपरिक स्वास्थ्य–ज्ञान पद्धति : शोध एवं सतत आजीविका विकास” का सफल समापन हुआ। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए पारंपरिक वैद्यों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
आयोजन के दौरान जनजातीय चिकित्सा परंपरा, औषधीय पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक शोध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग तथा सतत आजीविका के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 385 पारंपरिक वैद्यों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जिनमें से 35 से 40 वैद्य वर्तमान में वैज्ञानिक अनुसंधान में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।
उनके पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, प्रमाणीकरण और संरक्षण किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से इस ज्ञान को स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान तथा स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ा जा सकता है।

कार्यशाला में कैंसर, मधुमेह, हड्डी फ्रैक्चर तथा न्यूरोलॉजिकल विकारों सहित विभिन्न रोगों में पारंपरिक उपचार पद्धतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पौधा बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान को राज्य की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने की।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय स्वास्थ्य, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है। इस अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से आए डॉ. अशोक कुमार प्रधान, राशिक प्रधान एवं उनकी टीम ने पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान के संरक्षण एवं वैज्ञानिक अनुसंधान पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यशाला का आयोजन मात्रा लैब (Matra Lab), कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी भिलाई द्वारा “Exploring Health and Financial Impact Analysis of Medicinal Plants through Product Development and Scientific Validation in Remote Location of Chhattisgarh: Bridging Tribal Indigenous Knowledge through Artificial Intelligence” परियोजना के अंतर्गत किया गया।
परियोजना का नेतृत्व डॉ. राजेश कुमार मुण्डोतिया कर रहे हैं। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. सत्यजीत, डॉ. संतोष, डॉ. डाकेश्वर कुमार वर्मा, मात्रा लैब की टीम तथा डॉ. निर्मल अवस्थी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में सभी अतिथियों, पारंपरिक वैद्यों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
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