छत्तीसगढ़भिलाई

संयंत्र के एसएमएस-3 में मशीनीकृत हाउसकीपिंग व्यवस्था लागू; सुरक्षा, स्वच्छता एवं कार्यकुशलता को मिला नया आयाम…

सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वच्छता एवं परिचालन दक्षता को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्टील मेल्टिंग शॉप-3 (एसएमएस-3) में नवीन मशीनीकृत हाउसकीपिंग एवं सफाई अनुबंध लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से आधुनिक मशीनों एवं उन्नत सफाई उपकरणों का उपयोग कर कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाया जा रहा है।

एसएमएस-3 का विशाल कार्यक्षेत्र तथा चुनौतीपूर्ण औद्योगिक वातावरण हाउसकीपिंग कार्य को अत्यंत श्रम-प्रधान बनाता है। पूर्ववर्ती अनुबंध के अंतर्गत अधिकांश सफाई कार्य मैन्युअल रूप से किए जाते थे तथा मशीनीकृत सफाई के लिए केवल एक बैकहो लोडर (जेसीबी) उपलब्ध था। सीमित मशीनीकरण के कारण अपेक्षित स्तर की स्वच्छता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था।

साथ ही, कर्मचारियों को हॉट मेटल क्षेत्रों एवं अन्य जोखिमपूर्ण स्थानों पर कार्य करना पड़ता था, जिससे सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ बनी रहती थीं। इसके अतिरिक्त, संयंत्र के परिधीय मार्गों, हॉट मेटल डीसल्फराइजेशन स्टेशन (एचएमडीएस) क्षेत्र तथा कास्टर सीवी-2 के आसपास की सफाई पूर्व अनुबंध के कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं थी।

संयंत्र के एसएमएस-3 में मशीनीकृत हाउसकीपिंग व्यवस्था लागू; सुरक्षा, स्वच्छता एवं कार्यकुशलता को मिला नया आयाम...

नवीन अनुबंध के अंतर्गत एसएमएस-3 में व्यापक स्तर पर मशीनीकृत सफाई व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए डम्पर/ट्रक, बैकहो लोडर (जेसीबी), व्हील्ड स्किड स्टीयर लोडर (बॉबकैट), बैटरी संचालित राइड-ऑन स्वीपर, इलेक्ट्रिक/बैटरी संचालित स्क्रबर ड्रायर, ग्लास क्लीनिंग किट सहित अन्य आधुनिक सफाई उपकरणों की तैनाती की गई है। इन अत्याधुनिक संसाधनों के उपयोग से सफाई कार्य अब अधिक प्रभावी, तीव्र एवं सुरक्षित ढंग से संपादित किए जा रहे हैं।

नई व्यवस्था के परिणामस्वरूप हाउसकीपिंग कार्य में कुल जनशक्ति की आवश्यकता 69 से घटकर 44 हो गई है, जबकि कार्य का दायरा एवं गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अनुबंध की कुल लागत भी लगभग ₹6.37 करोड़ से घटकर ₹5.55 करोड़ हो गई है, जिससे संसाधनों का अधिक प्रभावी एवं किफायती उपयोग सुनिश्चित हुआ है।

उल्लेखनीय है मशीनीकृत सफाई व्यवस्था लागू होने से जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में मैन्युअल कार्य में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे कर्मचारियों का असुरक्षित परिस्थितियों के प्रति जोखिम कम हुआ है। इसके साथ ही संयंत्र परिसर की स्वच्छता, मलबे एवं औद्योगिक अपशिष्ट (मक) का वैज्ञानिक निष्पादन, परिधीय क्षेत्रों एवं सड़कों का नियमित रखरखाव तथा समग्र औद्योगिक वातावरण में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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