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Lebanon President on Iran: ‘ईरान अपने फायदे के लिए लेबनान का इस्तेमाल कर रहा’, राष्ट्रपति जोसेफ आउन का बड़ा आरोप…

Lebanon President on Iran: लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने ईरान पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे विवाद में लेबनान को एक सौदेबाजी के औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. CNN को दिए एक इंटरव्यू में आउन ने कहा कि लेबनान के लोग लगातार युद्ध से परेशान हो चुके हैं और अब शांति चाहते हैं. लेबनान के लोग सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने के हकदार हैं. वे हर कुछ साल बाद अपने घर तबाह होते नहीं देखना चाहते.

दरअसल, 1980 के दशक में ईरान के समर्थन से बने हिज्बुल्लाह ने कई बार इजराइल के खिलाफ युद्ध लड़ा है. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद इस साल भी हिज्बुल्लाह ने इजराइल पर रॉकेट दागे थे. इसके बाद इजराइल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हमले किए. इन हमलों में 3,500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और देश की लगभग 20% आबादी को अपना घर छोड़ना पड़ा.

हिज्बुल्लाह का प्रभाव कम करने की कोशिश

लेबनान सरकार लंबे समय से विदेशी दखल, सांप्रदायिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों से जूझ रही है. आउन ने कहा कि उनकी सरकार हिज्बुल्लाह के हथियारों को नियंत्रित करने और उसके प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रही है, ताकि इजराइल के साथ संघर्ष खत्म हो सके.

राष्ट्रपति ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को निशाने पर लेते हुए कहा, यह आपका देश नहीं, हमारा देश है. ईरान अमेरिका के साथ अपनी बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल कर रहा है. लेबनान के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं. हमारे हित और ईरान के हित एक जैसे नहीं हैं.

इजराइल से सीधे बातचीत को तैयार लेबनान

आउन ने कहा कि उनकी सरकार इजराइल के साथ सीधे बातचीत और युद्धविराम समझौते के लिए तैयार है. उनका मानना है कि लेबनान और इजराइल के पास दशकों पुरानी दुश्मनी खत्म करने का बड़ा मौका है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोग 1948 से संघर्ष झेल रहे हैं और अब उन्हें युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति का रास्ता चुनना चाहिए.

हालांकि, हिज्बुल्लाह के प्रमुख नाइम कासिम ने लेबनान-इजराइल वार्ता को सरेंडर बताते हुए खारिज कर दिया है. कासिम का कहना है कि जब तक इजराइली सेना लेबनान की जमीन नहीं छोड़ती, तब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ेगा.

बातचीत से होगा समस्या का समाधान: आउन

पूर्व सेना प्रमुख रह चुके आउन ने कहा कि वे खुद युद्ध की पीड़ा झेल चुके हैं और आज भी उनके शरीर में युद्ध के दौरान लगे छर्रे मौजूद हैं. इसके बावजूद वे मानते हैं कि किसी भी समस्या का सबसे अच्छा समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति है. उन्होंने कहा कि वह हिज्बुल्लाह को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी रखेंगे, भले ही यह रास्ता आसान न हो.

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