आईआईटी भिलाई में सजेगा कला और संस्कृति का नया मंच, छत्तीसगढ़ के कलाकारों को मिलेगा रचनात्मक अवसर
CCLT-NTPC की पहल से पारंपरिक विधाओं को मिलेगा संरक्षण और शोध का आधार, 31 अक्टूबर तक आवेदन

भिलाई। आईआईटी भिलाई के सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑन कल्चर, लैंग्वेज एंड ट्रेडिशन्स (CCLT) द्वारा नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) के वित्तीय सहयोग से विशेष कलाकार आवासीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह छत्तीसगढ़ में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है।
इस पहल का उद्देश्य कलाकारों को शांत, रचनात्मक और प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे अपनी कला पर गंभीरता से विचार करने के साथ-साथ उसके अध्ययन, दस्तावेजीकरण और विकास पर काम कर सकें।
कार्यक्रम के जरिए छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला विधाओं को प्रोत्साहित करने और संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे राज्य की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
जनजातीय विरासत से जुड़ी है छत्तीसगढ़ की संस्कृति
छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति उसकी जनजातीय विरासत से गहराई से जुड़ी हुई है। पारंपरिक संगीत, नृत्य और कहानी-कहने जैसी कलाएं यहां के जनजातीय समुदायों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।
इन लोक कलाओं के माध्यम से समुदायों का इतिहास, परंपराएं, जीवन-दृष्टि और पारंपरिक ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा है। यही वजह है कि इन विधाओं का संरक्षण सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कलाकारों और कारीगरों के सामने कई चुनौतियां
बदलते समय के साथ पारंपरिक कला विधाओं से जुड़े कलाकारों और कारीगरों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमित आजीविका के अवसर, कला के लिए उचित पारिश्रमिक का अभाव और आवश्यक सामग्री की उपलब्धता जैसी समस्याएं उनके सामने बनी हुई हैं।
विशेष रूप से हस्तशिल्प से जुड़े कलाकारों के लिए उचित बाजार, विक्रेताओं और वितरकों तक पहुंच एक बड़ी चुनौती है। इसके कारण पारंपरिक कला से जुड़े कई हुनर आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह पा रहे हैं।
युवा पीढ़ी में घटती रुचि भी चिंता का विषय
कार्यक्रम की आवश्यकता का एक महत्वपूर्ण कारण युवा पीढ़ी में लोक कला के प्रति धीरे-धीरे कम होती रुचि भी है। इसके चलते संगीत वाद्ययंत्रों, पारंपरिक आभूषणों, परिधानों और लोककथाओं से जुड़ी कई कला विधाएं और पारंपरिक कौशल विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रहे हैं।
ऐसे में नई पीढ़ी को पारंपरिक कला से जोड़ने और कलाकारों को नए प्रयोगों के लिए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शोध और नए विचारों को मिलेगा प्रोत्साहन
कलाकार आवासीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कला के माध्यम से शोध को बढ़ावा देना और पारंपरिक कला विधाओं के प्रति वर्तमान समय में रुचि बढ़ाने के लिए नए विचार विकसित करना है।
तीन महीने के इस आवासीय कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ के एक कलाकार का चयन किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदर्शन कला के साथ-साथ हस्तशिल्प के क्षेत्र में काम करने वाले कलाकार भी आवेदन कर सकते हैं।
चयनित कलाकार को मिलेंगी विशेष सुविधाएं
कार्यक्रम के तहत चयनित कलाकार को प्रत्येक महीने मानदेय प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही आईआईटी भिलाई परिसर में रहने के लिए आवास और अपने रचनात्मक कार्य के लिए स्टूडियो की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
यह व्यवस्था कलाकार को बिना किसी व्यवधान के अपनी कला, शोध, दस्तावेजीकरण और रचनात्मक प्रयोगों पर काम करने का अवसर प्रदान करेगी।
31 अक्टूबर तक कर सकते हैं आवेदन
इच्छुक कलाकार इस आवासीय कार्यक्रम के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक आवेदन जमा कर सकते हैं। कार्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी CCLT के वेबपेज पर उपलब्ध है।
आवेदन करने के लिए इच्छुक कलाकार आईआईटी भिलाई के CCLT वेबपेज पर दिए गए लिंक के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
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