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भारी तबाही के बीच दुर्ग रीजन के विद्युत कर्मियों ने युद्ध स्तर पर बहाल की बिजली…

दुर्ग – दिनांक 19 मई 2026 की शाम आए भीषण आंधी-तूफान के कारण दुर्ग जिले के शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों मेें बिजली के बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इस भयावह स्थिति और सीमित कर्मचारियों के बावजूद, बिजली विभाग ने आस-पास के कार्यालयों के लाइन स्टाफ और फ्यूज ऑफ कॉल ठेकेदारों की मदद से अतिरिक्त टीमें (गैंग) बनाकर युद्ध स्तर पर सुधार कार्य शुरू किया।

कनिष्ठ और सहायक अभियंताओं के नेतृत्व में तकनीकी अमले ने पहले सभी 33 के.व्ही. फीडर्स को सेक्शनाइज कर अधिकतम क्षेत्रों की बिजली चालू की और फिर फॉल्ट दुरुस्त कर शेष क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति बहाल कीं। इस त्वरित प्रबंधन का नतीजा रहा कि अधिकांश उपभोक्ताओं को मात्र 02 घंटे के भीतर राहत मिल गई, बड़े फॉल्ट को भी रात-दिन एक करके सुबह 03 बजे तक ठीक कर लिया गया। शेष फॉल्ट को भी शीघ्र सुधारा जा रहा है।

ज्ञात हो कि तूफान के कारण दुर्ग जिले में लगभग 60 एचटी (हाई टेंशन) एवं एलटी (लो टेंशन) बिजली के खंभे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इसके साथ ही दुर्ग-भिलाई शहर के 15 से अधिक मुख्य स्थानों पर विशालकाय पेड़ों की शाखाएं सीधे बिजली लाइनों पर आ गिरी, जिससे तार टूटकर सड़कों पर बिखर गए।

तकनीकी रूप से वितरण प्रणाली को गहरा झटका लगा, जिसके तहत 400 ट्रांसफार्मरों के डीओ फ्यूज और 700 ट्रांसफार्मरों के एलटी फ्यूज उड़ गए। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जगह-जगह इंसुलेटर पंचर होने और पोल टूटने के कारण विद्युत आपूर्ति ठप हो गई, जिससे बिजली विभाग के सामने एक साथ कई मोर्चों पर काम करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि बिजली का पूरा पारेषण और वितरण तंत्र खुले आसमान के नीचे रहता है, जिसके कारण तेज आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं का इस पर सीधा असर पड़ता है। दिनांक 19 मई 2026 की शाम आए भीषण तूफान से दुर्ग रीजन के नगपुरा, रसमड़ा, धमधा, स्मृति नगर, नेहरू नगर सहित ग्रामीण इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए, जहां लाइनों पर भारी संख्या में पेड़ों की डालियां गिरने से कई फीडर ट्रिप हो गए।

पॉवर कंपनी के निर्देशों का पालन करते हुए विभाग के नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने पूरी तत्परता के साथ मोर्चा संभाला और चंद घंटों में ही अंधकारमय क्षेत्र को दोबारा रोशन कर दिया। मैदानी कर्मचारियों ने फील्ड पर आने वाली व्यावहारिक और तकनीकी समस्याओं को साझा करते हुए बताया कि 132 केवी उपकेंद्र से लेकर उपभोक्ता के घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सैकड़ों की संख्या में जम्पर, डीओ, फ्यूज, इंसुलेटर और तार लगे होते हैं।

जब भीषण आंधी-तूफान के साथ बारिष आता है, तो लोगों द्वारा घरों पर लगाए गए झंडे, सड़कों और इमारतों के किनारे लगे फ्लेक्स व होर्डिंग्स एवं पेड़ों की शाखएं उड़कर लाइनों में चिपक जाते हैं तथा कड़कड़ाती बिजली चमकने से इंसुलेटर पंचर हो जाते हैं। इन उपकरणों में हुए फॉल्ट का पता लगाने और तारों में फंसे फ्लेक्स व पेड़ों को हटाने में अत्यधिक मेहनत और समय लगता है, जो कि पूरी तरह मानवीय श्रम पर निर्भर है।

उल्लेखनीय है कि दुर्ग जिले में विद्युत की बढ़ती मांग की पूर्ति एवं गुणवत्तापूर्ण निर्बाध विद्युत प्रदाय के लिए 385 करोड़ रुपए की लागत से विद्युत के बुनियादी ढाचे को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत 06 अति उच्च दाब उपकेंद्र लिटिया(सेमरिया), अहिवारा, कुम्हारी, अण्डा, औरी(जामगांव आर) एवं आईआईटी भिलाई में तथा 33/11 के.व्ही. के 02 उपकेंद्रों का निर्माण माटरा एवं ग्रीन वैली भिलाई में किया जा रहा है, जिसे वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त अनेक वितरण ट्रांसफार्मर एवं लाइनों के काम भी किये जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) दुर्ग क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक ने उपभोक्ताओं से आग्रह करते हुए कहा कि विपरीत मौसम और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने वाले मैदानी अमले के जान-माल के जोखिम को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

आंधी-तूफान और बारिश के बीच टूटे तारों और बिजली के खंभों को ठीक करना बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के समय उपभोक्ताओं का थोड़ा सा संयम और सकारात्मक सहयोग ही हमारे मैदानी कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखता है, ताकि वे पूरी ऊर्जा के साथ आपकी सेवा में डटे रहें।

उन्होंने कहा कि अक्सर बिजली बंद होने पर उपभोक्ताओं की यह आम शिकायत होती है कि अधिकारी उनका फोन नहीं उठा रहे हैं, परंतु वे फील्ड की उस भयावह और चुनौतीपूर्ण स्थिति को नहीं समझ पाते जिससे अधिकारी जूझ रहे होते हैं। दरअसल आंधी-तूफान के कारण जैसे ही बिजली गुल होती है, वैसे ही अधिकारियों के पास एक साथ कई उपभोक्ताओं के फोन आने लगते हैं, यदि वे फील्ड पर रहकर सुधार कार्य की कमान संभालने के बजाय केवल फोन उठाने में ही व्यस्त रहेंगे, तो युद्ध स्तर पर चल रहे तकनीकी काम की मॉनिटरिंग और मैदानी समन्वय पूरी तरह ठप हो जाएगा।

जिससे बिजली बहाली में और भी अधिक देरी होगी। उपभोक्ताओं को इस भीषण गर्मी में विद्युत अवरोध उत्पन्न होने से समस्या तो होती है, लेकिन इसकी चिंता बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी रहती है कि कितनी जल्दी और सुरक्षित तरीके से प्रभावित क्षेत्र में रोशनी लौटाई जा सके, ऐसी स्थ्तिि में उनकी पहली प्राथमिकता फोन पर बात करने से ज्यादा मैदानी फॉल्ट को तेजी से दुरुस्त करने की होती है।

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