छत्तीसगढ़दुर्गभिलाई

निगम भिलाई में विभिन्न विषयों को लेकर कार्यशाला आयोजित…

भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई के मुख्य कार्यालय सभागार में नशा मुक्ति, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम एवं स्वच्छता को लेकर कार्यशाला का आयोजन आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला में प्रमुख रूप से स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली, विशिष्ठ अतिथि के रूप में डाक्टर मोहनीश भगत एवं नर्सिंग की छात्राएं उपस्थित रही।

कार्यशाला में डाक्टर मोहनीश भगत ने एल्कोहल एवं तंबाकू से होने वाला क्रानिक बिमारी के बारे में बताया है। इससे मानवीय स्थिति पूरी तरह खराब हो जाती है। सुबह से शराब के लत वाले या प्रतिदिन शराब पीने से शरीर को बहुत नुकसान होता है। शराब एवं तंबाकू से नुकसान ब्रेन डेमेज, हार्ट कैंसर, लीवर केंसर, आंत का कैंसर, पेट का कैंसर, मुंह का कैंसर एवं गले का कैंसर होता है।

पुरूषो एवं महिलाओं में शराब पीने का प्रचलन आम होता जा रहा है इससे महिलाओं के गर्भधारण के दौरान समस्या हो रही है। अगर बच्चा हुआ तो बच्चो में चाईल्ड सिन्ड्रोम या मानसिक बीमारी होने का खतरा रहता है।
आयुक्त पाण्डेय ने बताया कि मानव खुशी पाने के चक्कर में नशा का सेवन करता है।

यदि कोई दूसरा व्यक्ति नशा की ओर खीच रहा है तो स्वयं को वहां से दूर करना है। उनके बहकावे में नहीं आना है और उनके पीछे नहीं जाना है। जो व्यक्ति छोटा नशा करता है, वह नशा करने के लिए पैसा नहीं होने पर चोरी का रास्ता अपनाता है। भगवान हर व्यक्ति को कुछ अच्छा करने भेजा है, किन्तु वह अपने जीवन को व्यर्थ में बबार्द कर रहा है।

नशा स्वयं के साथ पुरे परिवार को खत्म कर देता है। आयुक्त पाण्डेय ने बताया कि गिरते भूजल स्तर को बचाने एवं वर्षा जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। बरसात के समय छतों के पानी को संचय करना ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है।

शहर का वाटर लेवल नीचे जा रहा है, जिसको सुधारना अति आवश्यक है। भविष्य में पानी की समस्या होने से अच्छा है हम सबको मिलकर अभी से पानी को संरक्षण कर बचा लेना है। इसलिए अधिक से अधिक संख्या में घरो, होटल, अस्पताल, सार्वजनिक भवनो में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर पानी बचाएं।

स्वच्छता सालिड वेस्ट मेनेजमेंट 2016 से प्रारंभ किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है संग्रहण, परिवहन, उपचार/निपटान एवं प्रसंस्करण करना है। इसके माध्यम से घरो एवं व्यावसायिक परिसर से निकलने वाले गीला कचरा की छटाई कर 45 दिन में खाद बनाया जाता है। जो फसलों एवं उद्यानों में उपयोग किया जा रहा है।

जबकि सालिड वेस्ट प्लास्टिक (झिल्ली, पन्नी) का कोई निपटान नहीं है, इसलिए प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसका किसी भी स्थिति में निपटान नहीं किया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान जोन स्वास्थ्य अधिकारी अनिल मिश्रा, अंकित सक्सेना, बीरेन्द्र बंजारे, हेमंत मांझी, पीआईयू सुभम पाटनी, युक्ति देवांगन आदि उपस्थित रहे।

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