छत्तीसगढ़दुर्गभिलाई

बीएमडीसी में “संशोधित पीसीपी-2024” पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न…

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के भिलाई प्रबंधन विकास केन्द्र (बीएमडीसी) में “संशोधित पीसीपी-2024 के तहत सेवा अनुबंध” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 25 एवं 26 जुलाई 2025 को किया गया। संयंत्र के एचआर-एलएंडडी विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य संशोधित पीसीपी-2024 के दिशा-निर्देशों से कर्मचारियों को अवगत कराना तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु उन्हें सक्षम बनाना था।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य महाप्रबंधक (संविदा प्रकोष्ठ-कार्यक्षेत्र) इन्द्रजीत सेनगुप्ता, विशिष्ट अतिथि के रूप में महाप्रबंधक प्रभारी एवं विभागाध्यक्ष (एचआर-एलएंडडी) संजीव कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

इन्द्रजीत सेनगुप्ता ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए कहा कि संशोधित पीसीपी-2024 के अनुरूप सेवा अनुबंधों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है और इस दिशा में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी हैं। वहीं संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कर्मचारियों को बदलती नीतियों के अनुरूप निरंतर अद्यतन रहने और सीखते रहने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने शैक्षणिक सत्रों, संवादात्मक चर्चाओं और व्यावहारिक केस स्टडीज़ के माध्यम से संशोधित पीसीपी-2024 की प्रक्रियाओं की व्याख्या एवं कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को सेवा अनुबंधों की प्रक्रिया में व्यावहारिक समझ और स्पष्टता प्रदान की।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा महाप्रबंधक (एचआर-एलएंडडी) सौरभ वार्ष्णेय द्वारा संयंत्र के विभिन्न विभागों सीबीडी, कॉन्ट्रैक्ट सेल- नॉन वर्क्स, सतर्कता आदि विभाग के अधिकारियों के परामर्श से तैयार की गई थी। कार्यक्रम का समन्वयन विकास सरिन द्वारा किया गया।

समापन सत्र में आयोजन समिति की ओर से उप प्रबंधक (एचआर-एलएंडडी) जोजन जोस ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने मुख्य महाप्रबंधक (सीसी-डब्ल्यू), एसीवीओ, महाप्रबंधक (आईईडी), विभागाध्यक्षों और एचआर-एलएंडडी तथा बीएमडीसी टीमों के निरंतर सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम ने संगठित और योजनाबद्ध प्रशिक्षण के माध्यम से भिलाई इस्पात संयंत्र के मानव संसाधनों को निरंतर सशक्त बनाने के साथ ही कार्यकुशलता, ज्ञान-साझाकरण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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