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Quantum Breakthrough: न्यूट्रिनो के “क्वांटम डांस” का राज खुला, IIT भिलाई के शोध से बड़ी खोज…

Quantum Breakthrough: क्वांटम एंटैंगलमेंट एक महत्वपूर्ण विचार है, जो नई तकनीकों जैसे क्वांटम कंप्यूटर और क्वांटम संचार के पीछे काम करता है। न्यूट्रिनो जैसे छोटे कणों में एंटैंगलमेंट का अध्ययन दो क्षेत्रों—पार्टिकल फिजिक्स और क्वांटम इंफॉर्मेशन साइंस—को जोड़ने में मदद करता है। हाल ही में, आईआईटी भिलाई के शोधकर्ताओं ने, सुधन्वा पात्रा के नेतृत्व में, अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी की पत्रिका फिजिकल रिव्यु डी (2026) में एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया।

यह शोध मुख्य रूप से पीएचडी छात्रा राजरुपा बनर्जी द्वारा पी. के. पाणिग्रही (SOA University के सेंटर फॉर क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक) और हिरनमया मिश्रा (NISER और Institute of Physics Bhubaneswar में विज़िटिंग प्रोफेसर) के सहयोग से किया गया। उनका काम क्वांटम एंटैंगलमेंट को मापने के नए तरीकों का अध्ययन करता है, जिसमें “कांफ्रेंस फिल” नाम की एक अवधारणा भी शामिल है।

न्यूट्रिनो बहुत छोटे कण होते हैं जो चलते समय अपनी पहचान बदल सकते हैं, बिल्कुल गिरगिट की तरह। क्वांटम भौतिकी में इनके तीन प्रकार या “फ्लेवर” होते हैं: इलेक्ट्रॉन (νe), म्यूऑन (νμ), और टाउ (ντ)।जब कोई न्यूट्रिनो पहली बार बनता है (जैसे किसी पार्टिकल एक्सेलेरेटर में), तब वह एक ही प्रकार का होता है। लेकिन जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता है, वह एक जैसा नहीं रहता।

इसके बजाय, वह इन तीनों प्रकारों के बीच बदलता रहता है और एक समय पर तीनों का मिश्रण बन जाता है। इस व्यवहार को न्यूट्रिनो ऑसिलेशन कहा जाता है। इस घटना को प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया गया है, और इसके लिए भौतिकी के क्षेत्र में नोबल प्राइज 2015 तकाकी कतिजा (Takaaki Kajita) और अर्थर बी मैकडोनाल्ड (Arthur B. McDonald) को दिया गया था।

प्रोफेसर पात्रा के शोध समूह ने एक रोचक सवाल पूछा: क्या न्यूट्रिनो में होने वाला यह बदलाव सिर्फ एक साधारण परिवर्तन है, या यह कुछ और गहरा है? उनका मानना है कि यह कुछ ज्यादा गहरा है। उनके अनुसार, एक अकेला न्यूट्रिनो वास्तव में एक ही कण है, जो तीन अलग-अलग “मोड्स” (तीन फ्लेवर) में खुद के साथ ही उलझा हुआ (entangled) होता है।

+-यह ऐसा है जैसे एक संगीतकार पियानो पर एक साथ तीन कुंजियाँ दबाकर एक कॉर्ड बजाता है। यह ध्वनि सिर्फ एक कुंजी की नहीं होती, बल्कि तीनों कुंजियों की मिली-जुली एक संगठित ध्वनि होती है।

The “Chameleon” and the “Entangled Trio “गिरगिट” और “उलझी हुई तिकड़ी”:

आमतौर पर, जब हम “एंटैंगलमेंट” (वह अजीब संबंध जिसे आइंस्टीन पसंद नहीं करते थे) की बात करते हैं, तो हम दो अलग-अलग कणों के बारे में सोचते हैं—जैसे दो पासे, जो कितनी भी दूर हों, हमेशा एक ही संख्या दिखाते हैं। लेकिन यहाँ विचार अलग है। यह पेपर सुझाव देता है कि एक अकेला न्यूट्रिनो खुद के साथ ही उलझा हुआ (entangled) होता है।

कल्पना कीजिए कि एक ही व्यक्ति एक साथ तीन अलग-अलग कमरों (Room E, Room M और Room T) में मौजूद है। आप यह नहीं कह सकते कि वह केवल Room E में है या केवल Room M में। वह एक “भूत जैसी तिकड़ी” की तरह तीनों जगहों पर एक साथ मौजूद है। जैसे-जैसे न्यूट्रिनो आगे बढ़ता है, यह “भूत” अपना भार (मौजूदगी का हिस्सा) इन कमरों के बीच बदलता रहता है।

क्वांटम मैकेनिक्स में, जब तीन चीजें आपस में उलझी होती हैं, तो उनके दो मुख्य प्रकार होते हैं। पहला है “सब-कुछ या कुछ नहीं” टीम (GHZ स्टेट)। कल्पना कीजिए कि तीन दोस्त एक रस्सी पकड़कर खड़े हैं। अगर उनमें से एक भी छोड़ दे, तो पूरा संबंध टूट जाता है। इस तरह की उलझन बहुत नाज़ुक होती है। दूसरा है “मज़बूत” टीम (W स्टेट)। इसमें तीन दोस्त एक गोल घेरे में हाथ पकड़कर खड़े हैं। अगर एक व्यक्ति हाथ छोड़ भी दे, तो बाकी दो अभी भी जुड़े रहते हैं। यह प्रकार ज्यादा मजबूत और स्थिर होता है।

पेपर की बड़ी खोज: लेखकों ने न्यूट्रिनो के “एंटैंगलमेंट स्कोर” की गणना की और पाया कि “सब-कुछ या कुछ नहीं” (GHZ) स्कोर हमेशा शून्य होता है। इसका मतलब है कि न्यूट्रिनो हमेशा “मज़बूत” (W-प्रकार) वाले होते हैं। अगर एक फ्लेवर गायब भी हो जाए, तो बाकी दो अभी भी गहराई से जुड़े रहते हैं। यह न्यूट्रिनो के व्यवहार का एक मूल नियम है।

इस “जुड़ाव” की ताकत मापने के लिए, लेखकों ने Concurrence Fill नाम का एक तरीका बनाया। कल्पना कीजिए कि आप एक त्रिकोण बनाते हैं, जिसकी हर भुजा यह दिखाती है कि फ्लेवर आपस में कितने मजबूत जुड़े हैं।

• अगर त्रिकोण का कोई क्षेत्रफल नहीं है (यानी वह सीधी रेखा जैसा है), तो फ्लेवर अकेले या सिर्फ जोड़ों में काम कर रहे हैं।
• अगर त्रिकोण का क्षेत्रफल बड़ा है, तो इसका मतलब है कि तीनों फ्लेवर गहराई से और जटिल तरीके से जुड़े हुए हैं।

यह त्रिकोण का आकार न्यूट्रिनो के चलते समय लगातार बदलता रहता है। यह उसकी ऊर्जा और उसने कितनी दूरी तय की है, इस पर निर्भर करता है।

गुप्त कोड: CP वायलेशन, कण भौतिकी में एक रहस्यमय पैरामीटर होता है जिसे CP फेज़ कहा जाता है। यह एक “नॉब” (घुंडी) की तरह है, जो यह नियंत्रित करता है कि पदार्थ (matter) और प्रतिपदार्थ (antimatter) अलग तरह से व्यवहार करेंगे या नहीं। न्यूट्रिनो कितने “एंटैंगल्ड” हैं, इसे अलग-अलग ऊर्जाओं पर मापकर वैज्ञानिक इस CP नॉब की सेटिंग को अधिक सटीक रूप से समझ सकते हैं।
यह अध्ययन दिखाता है कि इन नए एंटैंगलमेंट मापों को बड़े अंतरराष्ट्रीय न्यूट्रिनो प्रयोगों में परखा जा सकता है, जैसे:
• DUNE (अमेरिका)
• T2K (जापान)
ये प्रयोग लंबी दूरी तक न्यूट्रिनो का अध्ययन करते हैं और CP वायलेशन को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह वही घटना है जो यह समझाने में मदद कर सकती है कि ब्रह्मांड में पदार्थ, प्रतिपदार्थ की तुलना में ज्यादा क्यों है।

इस शोध से पता चलता है कि एंटैंगलमेंट के पैटर्न इस CP फेज़ के प्रति संवेदनशील होते हैं, जिससे मूलभूत भौतिकी को समझने का एक नया तरीका मिलता है। यह अध्ययन हमें बताता है कि न्यूट्रिनो ऑसिलेशन सिर्फ एक कण का अपना निर्णय बदलना नहीं है; बल्कि यह एक ही कण का एक जटिल, तीन-तरफ़ा क्वांटम नृत्य है।

यह अनुमानित “W-प्रकार” का नृत्य न्यूट्रिनो के चलते समय कभी मजबूत और कभी कमजोर होता रहता है, जिससे एक ऐसा पैटर्न बनता है जिसे मापा जा सकता है। इस नृत्य को देखकर (जैसे DUNE और T2K जैसे प्रयोगों के माध्यम से), हम ब्रह्मांड के कुछ रहस्यों को समझ सकते हैं—खासकर यह कि पदार्थ (matter) प्रतिपदार्थ (antimatter) से ज्यादा क्यों है। यह “एंटैंगलमेंट पैटर्न” को समझकर संभव हो सकता है।

इस प्रकार, न्यूट्रिनो प्रकृति के सबसे अद्भुत क्वांटम बाजीगर (jugglers) हैं, और अब हमारे पास यह मापने के तरीके हैं कि वे यह करतब कैसे कर रहे हैं। भारतीय प्रद्योगिकी संस्थान भिलाई के प्रोफेसर पात्रा का शोध समूह न्यूट्रिनो भौतिकी के कई क्षेत्रों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जैसे CP और T वायलेशन, क्षय (decay) और डेकोहेरेंस प्रभाव, तथा मल्टी-मैसेंजर खगोल भौतिकी। यह समूह उच्च-ऊर्जा भौतिकी और क्वांटम सूचना सिद्धांत को जोड़ने के लिए जाना जाता है, जो एक उभरता हुआ बहु-विषयक क्षेत्र है।

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