
भिलाई – देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 14 अगस्त 2021 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने की घोषणा के पश्चात राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा प्रतिवर्ष विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का मनाई जा रही है इसी तारतम्य में दुर्ग जिला भाजपा के द्वारा भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक की अध्यक्षता में गौरव पथ में स्थित सतनामी आश्रम में कार्यक्रम आयोजित कर विभाजन विभीषिका के समय के दौर को याद किया गया और विभाजन के जनकों के कृत्यों की कड़ी आलोचना की गई।
आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष अशोक बजाज उपस्थित रहे कार्यक्रम में उनके साथ अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा, अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक, विधायक ललित चंद्राकर ,गजेंद्र यादव, महापौर अल्का बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता प्रितपाल बेलचंदन, कार्यक्रम के संयोजक अजय तिवारी, सदस्य अरुण सिंह, गोपाल खत्री ,सीए श्रीचंद लेखवानी, सिंधी समाज के अध्यक्ष अटल गोदवानी उपस्थित रहे सतनामी आश्रम में कार्यक्रम के पूर्व भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के द्वारा दुर्ग शहर के रानी लक्ष्मीबाई चौक से मौन जुलूस के रूप में पैदल मार्च करते हुए कसारिडीह ,साई मंदिर से होते हुए सिविल लाइन के सामने से सतनामी आश्रम पहुंची।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत से शताब्दियों से जकड़ी हुई परतंत्रता की बेड़ियां 1947 में एक लंबे स्वतंत्रता संग्राम के बाद टूट गईं । देश जन-जन की आशाओं व आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में बढ़ चला।
लेकिन देश को स्वतंत्रता के साथ ही साथ विभाजन की विभीषिका भी झेलनी पड़ी। मुस्लिम लीग की मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग ने लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया, यह विस्थापन कोई सामान्य नहीं था। हजारों-हजार लोगों का जनसंहार हुआ, महिलाओं के साथ जघन्यतम अपराध हुए- उस दौर में भारतीय उपमहाद्वीप में मानवता त्राहिमाम कर उठी।
भाजपा प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज ने आगे कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के विरुद्ध देश एकजुट होकर लड़ा था, उस दौर में किसी ने इस तरह के विभाजन के बारे में सोचा भी नहीं होगा। लेकिन अंग्रेजों की शातिराना कोशिशों तथा सांप्रदायिक एजेंडे ने आधुनिक काल में मनुष्यता पर विभाजन द्वारा बड़ा संकट खड़ा किया।
सन् 1905 में बंगाल के धर्म आधारित विभाजन के बाद से ही विभाजन की कुत्सित रूपरेखा बननानवत शुरू हो गई थी, विभिन्न इतिहासकारों ने अंग्रेजों के इस कदम को भारत विभाजन के बीज के रूप में देखा है। वहीं विभाजन के जिम्मेदारों पर बात करते हुए समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने अपनी किताब ‘गिल्टी मेन ऑफ़ पार्टिशन’ में लिखा है कि कई बड़े कांग्रेसी नेता जिनमें नेहरू भी शामिल थे वे सत्ता के भूखे थे जिनकी वजह से बँटवारा हुआ।
विभाजन की विभीषिका ने जिन लोगों को असमय मृत्यु की ओर ढकेल दिया, जिन परिवारों के साथ अमानवीय ज्यादतियां हुईं – क्या देश को वर्तमान आधुनिक लोकतांत्रिक देश बनाने तथा स्वतंत्रता दिलाने में उनका योगदान था? यदि हां, तो उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए।
बीते वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अगस्त के दिन को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की। नरेन्द्र मोदी जी ने यह घोषणा करते हुए यह कहा “देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी।
उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया । विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का तय होना ऐसे लोगों को हर भारतवासी की तरफ़ से आदरपूर्वक श्रद्धांजलि है। यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को ख़त्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मज़बूत होंगी।”
भाजपा प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा एवं कार्यक्रम के संयोजक ने इस अवसर पर पर कहा कि अखंड भारत के विभाजन की यादें निश्चित ही बहुत भयावह हैं। इन यादों के भुक्तभोगी और प्रत्यक्षदर्शी अब लाखों-करोड़ों की संख्या में नहीं बचे होंगे। वर्ष 1947 में अविभाजित भारत की कुल आबादी लगभग 36 करोड़ थी।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक़, विभाजन के दौरान हुई साम्प्रदायिक हिंसा और मची अफ़रा-तफ़री में कोई बीस लाख लोगों की जानें गईं थीं और एक से दो करोड़ के बीच लोग विस्थापित हुए थे। ‘सीने को छलनी’ करने वाले विभाजन की विभीषिका को देखने और भोगने वाले जो भी लोग इस वक्त जीवित होंगे उनकी उम्र पचासी-नब्बे के क़रीब या उससे ऊपर की ही होगी।
कहीं ना कहीं इन सब को हम सभी को याद रखना होगा और आम जनमानस को बताना होगा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने निजी हित के लिए देश का विभाजन किया ऐसे भुक्त भोगियों को जो विभाजन के समय विस्थापित हुए थे और उनके परिवार जनों का बिछोह उन्हें मिला था उन्हें मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ।
जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने इस अवसर पर कहा कि जब कोई व्यक्ति या देश अपने अंदर से विभाजित होता है तो वह विभाजन भौगोलिक सीमाओं के बंटवारों की तरह नज़र नहीं आता। विभाजन के बाद जो हिंदू, सिख भारत आए उन्हें अनेक विषमताओं का सामना करना पड़ा
लेकिन इन्हीं आर्थिक, भाषाई, भौगौलिक तथा सामाजिक विषमताओं की सीमा को लांघ अपनी मेहनत के बलबूते ये नागरिक एक आधुनिक लोकतंत्र के व्यवहारिक रूप में लागू होने की दिशा में अन्य भारतीयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल पड़े और इस वर्ष देश जब 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है तब विभाजन की ज्वालामुखी को मात देकर आए परिवार की पीढ़ियां बहुविविध भारतीय समाज में रचबस कर बेहतर कर रही हैं।
पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में जो अल्पसंख्यक रह गए थे, उनके साथ बाद के वर्षों में हुई ज्यादतियां किसी से छिपी नहीं हैं। आज भी पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में बहुत कम संख्या में बचे हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादतियों की अमानवीयता जारी है- विभाजन का दंश जिन्हें सबसे ज्यादा झेलना पड़ा वह हैं महिलाएं।
लाखों महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्याएं तथा उन्हें दास बनाने के, न भुला सकने वाले जघन्य अपराध हुए हैं। मनुष्यता के विरुद्ध हुई इस जघन्यतम विभीषिका में नृशंसता की भेंट चढ़ गए लोगों को स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव में सरकार तथा आम जनमानस द्वारा याद करना निश्चित ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
आयोजित कार्यक्रम में चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीचंद लेखवानी जी ने भी संबोधित किया। आयोजित कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के संयोजक अजय तिवारी ने किया और आभार कार्यक्रम के सदस्य अरुण सिंह ने किया।
भाजपा प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा,अजय तिवारी दिलीप साहू विनायक नातू, राजेंद्र पाध्ये, अरविंदर खुराना, दीपक चोपड़ा आशीष निमजे,सह कोषाध्यक्ष नीलेश अग्रवाल, कार्यालय मंत्री मनोज सोनी,सह कार्यालय मंत्री अनूप सोनी प्रवक्ता दिनेश देवांगन मीडिया प्रभारी राजा महोबिया सोशल मीडिया संयोजक रजनीश श्रीवास्तव आईटी सेल जिला संयोजक जितेंद्र सिंह राजपूत,सह संयोजक विनय महोबिया मंडल अध्यक्ष मनमोहन शर्मा महेंद्र लोढ़ा, कमलेश फेकर, कौशल साहू, राजू जंघेल ,लोकमणी चंद्राकर, साजन जोसेफ, मुकेश सोनकर मोहन बागुल दिनेश पाटील संतोष सोनी गायत्री वर्मा बानी सोनी कंचन सिंह नवीन साहू दिनेश नालोडे मदन बढई उमेश गोस्वामी सैयद आसिफ अली रितेश शर्मा, गौरव शर्मा, नवीन पवार, देवनारायण चंद्राकर ज्ञानेश्वर ताम्रकार लीलाधर पाल संजय अग्रवाल सरिता चंद्राकर अमित पटेल विनोद चंद्राकर रितेश जैन अनिल शुक्ला सरिता साहू डॉ उमा साहू अरविंद लोखंडे सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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