छत्तीसगढ़भिलाई

सयंत्र द्वारा उच्च जोखिम प्रक्रियाओं की पहचान एवं जोखिम प्रबंधन पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित…

सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के मानव संसाधन विकास केंद्र में 07 मार्च, 2026 को “उच्च जोखिम प्रक्रियाओं की पहचान, जोखिम आकलन तथा बो-टाई विश्लेषण के माध्यम से उसके प्रबंधन” विषय पर एक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में संयंत्र के विभिन्न विभागों से लगभग 50 कार्यपालकों ने भाग लिया।

यह प्रशिक्षण मुख्यतः संयंत्र के विभिन्न डीआईसी के एचएचपी–एसपीओसी (सिंगल प्वाइंट ऑफ कॉन्टैक्ट) के लिए आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) देबदत्त सतपथी रहे। इस अवसर पर तकनीकी सत्र का संचालन महाप्रबंधक (ईएमडी) एस. रमणी द्वारा किया गया।

अपने प्रस्तुतीकरण में उन्होंने जोखिम आकलन एवं प्रबंधन की चार-चरणीय पद्धति पर विस्तृत जानकारी दी, जिसमें डाउ फायर एंड एक्सप्लोजन इंडेक्स के माध्यम से उच्च जोखिम प्रक्रियाओं की पहचान, एलओएचए सॉफ्टवेयर के माध्यम से संभावित परिणामों का विश्लेषण, जोखिम मैट्रिक्स के माध्यम से जोखिम आकलन तथा बो-टाई विश्लेषण के माध्यम से जोखिम प्रबंधन के उपायों को विस्तार से समझाया गया।

अपने संबोधन में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) देबदत्त सतपथी ने संयंत्र के विभिन्न विभागों में नए बो-टाई डायग्राम तैयार करने पर विशेष बल दिया, जिससे खतरे के विश्लेषण एवं जोखिम प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित एवं प्रभावी प्रणाली विकसित की जा सके।

इस अवसर पर सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग (एसईडी) द्वारा जानकारी दी गई कि अब तक प्रमुख जोखिम परिदृश्यों के लिए कुल 73 बो-टाई डायग्राम विकसित किए जा चुके हैं, जो मुख्यतः सीओ एवं सीसीडी, ईएमडी, प्रोपेन प्लांट तथा वाटर मैनेजमेंट विभागों में लागू किए गए हैं। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए अब इसे मिल्स, पी एंड बीएस, टी एंड डी तथा सी एंड आईटी विभागों तक विस्तारित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का समन्वय सहायक महाप्रबंधक (एसईडी) अजय टल्लू एवं सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग (एसईडी) द्वारा किया गया। संयंत्र के कार्मिकों के संदर्भ एवं उपयोग के लिए ये बो-टाई डायग्राम ई-सुरक्षा पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए हैं।

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