
भिलाई – औद्योगिक कचरे के कारण पानी का प्रदूषण भारत में एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, जिससे साफ और सुरक्षित पानी तक पहुँच दिन-प्रतिदिन कठिन होती जा रही है। जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के समर्थन में, आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिकों ने एक नई पर्यावरण-अनुकूल सामग्री विकसित की है, जो दूषित पानी से हानिकारक प्रदूषकों को हटाने में मदद कर सकती है।
कौशिक माहात, निशिकांत सिंह, दुर्गेश कुमार सिन्हा, स्वरूप मैती और डॉ. संजीब बेनार्जी की शोध टीम ने यह अमीनो अम्ल-आधारित हाइड्रोजेल तैयार किया है। इस सामग्री की खास बात यह है कि यह कमरे के तापमान पर अपने-आप बन जाती है और इसमें किसी भी हानिकारक रसायन या उत्प्रेरक की आवश्यकता नहीं होती।
इससे यह प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, सरल और टिकाऊ बनती है। यह हाइड्रोजेल स्पंज जैसी संरचना वाला होता है, जिससे यह औद्योगिक अपशिष्ट जल में मौजूद जहरीले रंगों को आसानी से सोख लेता है। इसका परीक्षण न केवल प्रयोगशाला में किया गया, बल्कि वास्तविक रूप से प्रदूषित नदी के पानी में भी किया गया, जहाँ इसने बेहतरीन परिणाम दिखाए।
यह सामग्री कई बार इस्तेमाल की जा सकती है, विभिन्न आकारों में ढाली जा सकती है और उपयोग के बाद प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाती है, जिससे आगे किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता।
इस शोध का नेतृत्व करने वाले डॉ. संजीब बेनार्जी ने कहा, “आज पानी को साफ करने वाली कई सामग्री ऐसे रसायनों से बनी होती हैं जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकती हैं। हमारा शोध यह दिखाता है कि प्राकृतिक स्रोतों से बनी सामग्री भी पानी को प्रभावी ढंग से साफ कर सकती हैं और बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए सुरक्षित हैं।”
मुख्य लाभ
• प्रदूषित पानी की सफाई: अपशिष्ट जल से हानिकारक कार्बनिक प्रदूषकों को हटाती है
• पर्यावरण-अनुकूल: प्राकृतिक सामग्री से बनी, बिना जहरीले रसायनों के
• वास्तविक उपयोग में सफल: प्रदूषित नदी के पानी में प्रभावी और बार-बार उपयोग योग्य
• पर्यावरण के लिए सुरक्षित: जैव-अपघटनीय हाइड्रोजेल लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाते
पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइन और मजबूत जल-शोधन क्षमता के साथ, यह नई सामग्री भविष्य में अपशिष्ट जल उपचार के लिए एक उम्मीदभरा समाधान प्रस्तुत करती है, विशेष रूप से औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों के लिए। यह शोध भारत के स्वच्छ जल, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को मजबूत करता है।
यह शोध कार्य विश्व-प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका Advanced Functional Materials (Wiley-VCH) में प्रकाशित हुआ है, जो पर्यावरणीय स्थिरता के लिए उन्नत सामग्री अनुसंधान में आईआईटी भिलाई के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
🔗 डीओआई: https://doi.org/10.1002/adfm.202519401
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