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चॉकलेट और कैंडी खाने से बच्चों में कौन सी बीमारियां होती हैं, डॉक्टर ने बताया इनमें क्या-क्या पड़ा होता है?

बच्चे और बड़े सभी स्वाद लेकर चॉकलेट खाते हैं। शायद ही कोई घर ऐसा होगा जहां बच्चे चॉकलेट न खाते हों। चॉकलेट खाने में स्वादिष्ट लगती है और बच्चों को चॉकलेट, कैंडी जैसी रंग बिरंगी चीजें सबसे ज्यादा अट्रैक्ट करती है। लेकिन जब आप इनके नुकसान जानेंगे तो आंखें खुलेंगी कि ये चीजें सेहत के लिए कितनी हानिकारक हैं।

बच्चे की जिद पर आप जो चॉकलेट उसे खुश करने के लिए खिलाते हैं वो स्वीट पॉइजन है। जो धीरे-धीरे शरीर को बीमारियों का घर बना रही हैं। चॉकलेट खाने से सिर्फ दांत खराब नहीं होते बल्कि इससे डायबिटीज और हाइपरएक्टिव होने का खतरा भी बढ़ रहा है। डॉक्टर ने बताया कि चॉकलेट में कितनी चीनी और दूसरी हानिकारक चीजें मिलाई जाती हैं, जिससे इनका रंग और स्वाद बच्चों को इनकी लत लगा देता है।

डॉ. विवेक जैन (सीनियर डायरेक्टर एवं यूनिट हेड, पीडियाट्रिक्स, फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग) ने बताया कि चॉकलेट में चीनी की मात्रा कहीं अधिक होती है। इसमें कृत्रिम रंग और प्रिज़र्वेटिव मिलाए जाते हैं जो लंबे समय में आपकी सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। बच्चों की कोमल उम्र में इन मीठी चीजों का अधिक सेवन मोटापा, दांतों की सड़न, पाचन संबंधी समस्या, डायबिटीज़ और इम्यूनिटी कमजोर होने जैसी कई दिक्कतें पैदा कर सकता है।

चॉकलेट में क्या होता है सबसे खतरनाक?

चीनी- एक छोटी कैंडी या चॉकलेट बार में कई चम्मच चीनी छिपी होती है। ये शरीर में खाते ही ब्लड शुगर को बढ़ाने का काम करती है।

कृत्रिम रंग और फ्लेवर- स्वाद और रंग बढ़ाने के लिए कई बार ऐसे केमिकल मिलाए जाते हैं, जो एलर्जी या हाइपरएक्टिविटी का कारण बन सकते हैं।

सैचुरेटेड फैट और हाइड्रोजेनेटेड ऑयल- चॉकलेट में अक्सर ट्रांस फैट होते हैं, जो हार्ट और लिवर पर असर डालते हैं।

प्रिजर्वेटिव- लंबे समय तक स्टोर करने के लिए ऐसे रसायन डाले जाते हैं, जो बच्चों के शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

चॉकलेट खाने से बच्चों में बीमारी

दांतों की सड़न (Tooth Decay)- मीठा खाने के बाद मुंह में बैक्टीरिया शुगर को एसिड में बदल देते हैं, जिससे दांतों की एनामेल खराब हो जाती है और दांतों में सड़न पैदा हो सकती है।

मोटापा (Childhood Obesity)- चॉकलेट्स में हाई कैलोरी और दूसरे जरूरू न्यूट्रिएंट की कमी होने से वजन तेजी से बढ़ाती हैं। बचपन में ही ओवेसिटी का शिकार हो सकते हैं।

टाइप-2 डायबिटीज का खतरा- (Type 2 Diabetes In kids): चॉकलेट और कैंडीज में अधिक चीनी से इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो सकता है।

पाचन समस्या (Digestive Issues)- कैंडी और चॉकलेट में फाइबर की कमी और फैट की अधिकता पाचन बिगाड़ सकती है।

इम्यूनिटी कमजोर (Low Immunity)- ज्यादा शुगर इम्यून सिस्टम की कार्यक्षमता को घटा सकती है, जिससे बार-बार संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

हाइपरएक्टिविटी और ध्यान की कमी (Hyperactivity)- कैंड और चॉकलेट में मिलाए गए आर्टिफिशियल रंग और एडिटिव्स के कारण कुछ बच्चों में हाइपरएक्टिविटी की समस्या हो सकती है जिससे  एकाग्रता में कमी देखी गई है।

कैंडी और चॉकलेट खाने से सेहत पर असर

अगर तुरंत असर की बात करें तो मीठा खाते ही ऊर्जा का स्तर बढ़ता है, लेकिन जल्दी ही थकान और चिड़चिड़ापन आ सकता है। लंबे समय में ज्यादा चॉकलेट और कैंडी का सेवन करने से क्रॉनिक बीमारियों का खतरा, हड्डियों की मजबूती में कमी और हार्मोनल असंतुलन हो सकता है।

बच्चे की चॉकलेट की आदत कैसे छुड़ाएं

बच्चों को चॉकलेट और कैंडी सीमित मात्रा में दें, रोजाना की आदत न बनाएं। घर पर हेल्दी स्नैक्स जैसे फल, ड्राई फ्रूट्स, होममेड डार्क चॉकलेट विकल्प के रूप में दें। मीठा खाने के बाद बच्चों को पानी पिलाएं और ब्रश करने की आदत डालें। पैक्ड मीठी चीज खरीदते समय लेबल पर शुगर, फैट और एडिटिव्स की जानकारी जरूर पढ़ें।

चॉकलेट और कैंडी का स्वाद भले ही बच्चों को खुशी देता हो, लेकिन उनका ज्यादा सेवन भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। माता-पिता को चाहिए कि बचपन से ही बच्चों को संतुलित आहार और मीठा सीमित मात्रा में लेने की आदत डालें, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास स्वस्थ तरीके से हो सके।

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